
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
आज चंद्रमा वृषभ राशि में रहेगा और रात लगभग 10:06 बजे मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। ज्योतिषीय गणना में चंद्र राशि का यह परिवर्तन दिन के प्रमुख विवरणों में गिना जाता है। इसी दिन रोहिणी नक्षत्र भी सुबह समाप्त होकर मृगशिरा में बदल जाएगा।
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29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रात 10:11 PM तक रहेगी। आज की पंचांग गणना में सुबह का समय विशेष ध्यान देने योग्य है, क्योंकि रोहिणी नक्षत्र 11:12 AM तक और बव करण 11:38 AM तक रहेगा। वहीं परिघ योग रात 12:06 AM तक प्रभावी रहेगा। दिन का शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक है। पूजा, व्रत या किसी खास काम की तैयारी कर रहे हैं, तो इन समयों के साथ तिथि की अवधि को भी देखना उपयोगी होगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष चतुर्थी (10:11 PM तक) |
वार | गुरुवार |
पूर्णिमांत मास | कार्तिक |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 06:05 |
सूर्यास्त | 17:20 |
चंद्रोदय | 19:58 |
चंद्रास्त | 09:24 |
नक्षत्र | रोहिणी (11:12 AM तक) |
योग | परिघ (12:06 AM तक) |
करण | बव (11:38 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:20 AM से 12:04 PM |
राहुकाल | 1:07 PM से 2:31 PM |
गुलिक काल | 8:53 AM से 10:18 AM |
यमघण्टकाल | 6:05 AM से 7:29 AM |
दिशाशूल | दक्षिण |
सूर्य राशि | तुला |
चंद्र राशि | वृष |
चंद्र निवास | दक्षिण |
आज कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रात 10:11 PM तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि आरंभ होगी। चतुर्थी तिथि का संबंध धार्मिक परंपराओं में भगवान गणेश की उपासना से भी जोड़ा जाता है। हालांकि किसी व्रत या विशेष पूजा का निर्णय लेते समय उस अवसर के निर्धारित नियम और स्थानीय पंचांग को देखना चाहिए।
आज गुरुवार है, जिसे पारंपरिक रूप से गुरु और बृहस्पति से संबंधित दिन माना जाता है। इस दिन अध्ययन, ज्ञान प्राप्ति, गुरुजनों के सम्मान और आध्यात्मिक गतिविधियों को महत्व दिया जाता है। दिन की शुरुआत पूजा-पाठ या अपने जरूरी कार्यों की प्राथमिकता तय करके करना एक व्यवस्थित तरीका हो सकता है।
आज पूर्णिमांत पद्धति से कार्तिक मास और अमांत पद्धति से अश्विन मास माना गया है। मास के इन दोनों नामों का अंतर चंद्र मास की गणना की अलग-अलग परंपराओं के कारण है। इसलिए व्रत, त्योहार या धार्मिक आयोजन की जानकारी पढ़ते समय यह देखना जरूरी है कि पंचांग किस पद्धति का उपयोग कर रहा है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) चल रहे हैं। ये दोनों पारंपरिक भारतीय संवत हैं, जिनका उपयोग पंचांग में समय और तिथि की पहचान के लिए किया जाता है।
आज शरद ऋतु है और सूर्य की वार्षिक गति के अनुसार दक्षिणायन चल रहा है। ऋतु का उल्लेख पंचांग में वर्ष के प्राकृतिक चक्र को समझने में मदद करता है, जबकि अयन सूर्य की गति से जुड़ी पारंपरिक समय गणना का हिस्सा है।
सुबह और शाम के समय मौसम में अंतर महसूस हो सकता है। बाहर जाने या दिनभर की गतिविधियों की योजना बनाते हुए स्थानीय मौसम को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
आज सूर्योदय 6:05 AM पर और सूर्यास्त 5:20 PM पर होगा। इन समयों से दिन के उजाले की अवधि और सुबह-शाम की दिनचर्या का अनुमान लगाया जा सकता है। पूजा या सूर्य से संबंधित धार्मिक गतिविधियों के लिए अपनी परंपरा के अनुसार समय निर्धारित किया जा सकता है।
आज चंद्रोदय 7:58 PM पर होगा और चंद्रास्त अगले दिन 9:24 AM पर रहेगा। यानी चंद्रमा शाम को उदित होगा और अगली सुबह अस्त होगा। आज चंद्रमा वृष राशि में स्थित है तथा पंचांग में चंद्र निवास दक्षिण दिशा बताया गया है।
आज रोहिणी नक्षत्र 11:12 AM तक रहेगा। इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र आरंभ होगा। रोहिणी को वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा से संबंधित नक्षत्र माना जाता है। नक्षत्र की अवधि दिन के पहले हिस्से में समाप्त होने के कारण सुबह और दोपहर के पंचांग विवरण में अंतर रहेगा।
परिघ योग रात 12:06 AM तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि के बाद अगला योग आरंभ होगा। पंचांग में योग की स्थिति को तिथि और नक्षत्र के साथ पढ़ा जाता है, ताकि किसी खास समय की पारंपरिक गणना समझी जा सके।
आज बव करण 11:38 AM तक रहेगा। इसके बाद करण में परिवर्तन होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि रोहिणी नक्षत्र 11:12 AM पर समाप्त होगा और बव करण उसके 26 मिनट बाद तक रहेगा। इसलिए इन दोनों की समाप्ति का समय अलग-अलग है; किसी कार्य के लिए पंचांग देखते समय इन्हें एक ही समय मानना सही नहीं होगा।
आज का शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक है। किसी शुभ कार्य का समय तय करते समय इस अवधि को पारंपरिक पंचांग के अनुसार देखा जा सकता है। विशेष धार्मिक कार्यों में संबंधित पूजा-विधि और स्थानीय परंपरा भी महत्वपूर्ण होती है।
आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 1:07 PM से 2:31 PM
गुलिक काल: 8:53 AM से 10:18 AM
यमघण्टकाल: 6:05 AM से 7:29 AM
पारंपरिक मान्यता के अनुसार इन अवधियों में नए महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। जरूरी कामों के लिए अपनी परिस्थितियों और उपलब्ध समय को देखते हुए निर्णय लेना व्यावहारिक रहेगा।
आज दिशाशूल दक्षिण दिशा में है। पारंपरिक पंचांग में यात्रा की दिशा तय करते समय दिशाशूल को ध्यान में रखा जाता है। यदि दक्षिण दिशा की यात्रा करनी हो, तो अपनी मान्यता के अनुसार उपायों पर विचार किया जा सकता है। साथ ही यात्रा की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
राशिगत स्थिति के अनुसार आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा वृष राशि में है। चंद्र निवास भी दक्षिण दिशा बताया गया है। इन विवरणों को तिथि, नक्षत्र और योग के साथ देखकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति का आकलन किया जाता है।
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