लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी कब है
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लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी कब है?

क्या आप जानते हैं लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है? जानिए इस पावन दिन की तिथि, पूजा विधि, मुहूर्त और भगवान गणेश की कृपा पाने का रहस्य – सब कुछ एक ही जगह!

लम्बोदर संकष्टी के बारे में

लम्बोदर संकष्टी व्रत भगवान गणेश को समर्पित एक पवित्र संकष्टी चतुर्थी का दिन है, जिसमें लम्बोदर रूप में गणपति की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन व्रत और चंद्र दर्शन के बाद गणेश जी की आराधना करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी कब है?

लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाएगी। लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार, 10 जनवरी 2025, को पढ़ रही है। चतुर्थी तिथि का प्रारम्भ 09 अक्टूबर 2025, गुरुवार को रात 10 बजकर 54 मिनट पर होगा। वहीं, चतुर्थी तिथि का समापन 10 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को शाम 07 बजकर 38 मिनट पर होगा। इस दिन चंद्रोदय रात 08 बजकर 13 मिनट पर होगा।

लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी पर्व का महत्व

चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन जातक गणेश जी की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। पंचांग के अनुसार हर मास में दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली चतुर्थी तिथियों के अलग अलग नाम हैं, जिनमें से माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।

लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है। यह व्रत हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है, परंतु जब यह चतुर्थी मंगलवार को आती है, तो इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जो सबसे शुभ मानी जाती है। इस दिन भगवान गणेश को ‘लम्बोदर’ रूप में पूजने की परंपरा है। ‘लम्बोदर’ का अर्थ होता है, लंबा उदर (पेट)। यह उनके ज्ञान और धैर्य का प्रतीक है। मान्यता है कि भगवान लम्बोदर अपने भक्तों के सभी संकटों (कष्टों) को दूर कर देते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्रदान करते हैं।

पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त (सुबह जल्दी) उठें और स्नान करें।
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें।
  • पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • अपने सामने तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरें, उस पर नारियल रखें।
  • अब संकल्प लें, ‘मैं भगवान लम्बोदर की कृपा पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत कर रहा/रही हूँ।’
  • गणेश जी को सिंदूर, अक्षत (चावल), फूल, दूर्वा, रोली, और धूप-दीप अर्पित करें।
  • मोदक, लड्डू, गुड़ और फल का भोग लगाएँ (मोदक उनका प्रिय प्रसाद है)।
  • ‘ॐ लम्बोदराय नमः’ या ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जप करें (108 बार करना शुभ होता है)।
  • संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  • इसके बाद गणेश आरती करें, जैसे ‘जय गणेश देवा’।
  • शाम के समय फिर से दीप प्रज्वलित करें और गणेश जी का ध्यान करें।
  • चंद्रोदय (रात में चाँद निकलने) के समय चंद्र दर्शन करें।
  • चाँद को अर्घ्य (जल) अर्पित करें और गणेश जी से प्रार्थना करें, हे लम्बोदर, हमारे जीवन से सभी संकटनाश करें।
  • इसके बाद व्रत का पारायण करें (फलाहार या प्रसाद ग्रहण करें)।
  • पूरे दिन संयम व्रत रखें, फल, दूध या पानी का सेवन कर सकते हैं।
  • क्रोध, नकारात्मक विचार और किसी का अपमान न करें।
  • पूजा में शुद्धता और श्रद्धा सर्वोपरि रखें।

FAQs

लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या करना चाहिए?

लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा करें, व्रत रखें और शाम को चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलें। इस दिन सुबह उठकर स्नान कर पूजा के लिए गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें, उन्हें दूर्वा, मोदक और फूल चढ़ाएं, गणेश मंत्रों का जाप करें, संकष्टी चतुर्थी कथा का पाठ करें और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें। व्रत के दौरान तामसिक भोजन से परहेज करें।

लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी क्या है?

लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी भगवान श्रीगणेश को समर्पित एक पवित्र व्रत और पर्व है। यह हर महीने आने वाली संकष्टी चतुर्थी में से एक होती है, जिसमें भगवान गणेश के एक विशेष रूप ‘लम्बोदर’ की पूजा की जाती है। प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। जब यह चतुर्थी किसी विशेष दिन या नक्षत्र के साथ पड़ती है, तो उसका नाम बदल जाता है। अक्टूबर 2025 की संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश के लम्बोदर रूप को समर्पित है, इसलिए इसे लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।

लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाएगी

लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाएगी। लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार, 10 जनवरी 2025, को मनाई जाएगी।

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Published by Sri Mandir·January 5, 2026

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