फाल्गुन अष्टाह्निका विधान प्रारंभ कब है
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फाल्गुन अष्टाह्निका विधान प्रारंभ कब है

क्या आप जानना चाहते हैं कि फाल्गुन अष्टाह्निका विधान 2026 में कब प्रारंभ होगा और इसका जैन धर्म में क्या महत्व है? इस लेख में जानिए अष्टाह्निका की तिथि, विधान के नियम, पूजा-पाठ की विधि और आध्यात्मिक लाभ – सब कुछ एक ही जगह।

फाल्गुन अष्टाह्निका विधान प्रारंभ के बारे में

अष्टाह्निका पर्व जैन धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है, जिसे वर्ष में तीन बार कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ़ मास में मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर भगवान महावीर स्वामी की शिक्षाओं को याद करते हैं और संयम व आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। फाल्गुन अष्टाह्निका विधान जैन पंचांग के अनुसार निश्चित तिथियों पर आरंभ होता है और पूरे आठ दिनों तक विधिपूर्वक पूजा, जप, तप और कई अन्य अनुष्ठानों के साथ संपन्न किया जाता है। चलिए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि 2026 में फाल्गुन अष्टाह्निका विधान प्रारंभ कब है?

2026 में फाल्गुन अष्टाह्निका विधान प्रारंभ कब है?

जैन पंचांग के अनुसार फाल्गुन अष्टाह्निका शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर पूर्णिमा तक चलती है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 24 फरवरी 2026, मंगलवार से शुरू होगा और 03 मार्च 2026, मंगलवार तक चलेगा। यानी पूरे आठ दिन धर्म, साधना और पूजा के लिए समर्पित रहेंगे।

फाल्गुन अष्टाह्निका विधान का धार्मिक महत्व

अष्टाह्निका का मूल उद्देश्य आत्मा को कर्म-बंधन से मुक्त करना है। जैन दर्शन के अनुसार मनुष्य की आत्मा अनेक जन्मों से संचित कर्मों के प्रभाव में फँसी रहती है। साधना, तप, संयम और ध्यान के द्वारा ही इन कर्मों को नष्ट किया जा सकता है। अष्टाह्निका के आठ दिन ऐसे समय का संकेत हैं जब धार्मिक गतिविधियों और साधना का प्रभाव सामान्य दिनों की तुलना में अधिक फलदायी होता है। इन दिनों की गई साधना, पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और विनम्रता आत्मा को भीतर से मजबूत बनाती है और मन को संयमित करती है।

जैन समुदाय में यह भी मान्यता है कि इन आठ दिनों में देवगण विशेष पूजा-अर्चना में लीन रहते हैं और वातावरण स्वाभाविक रूप से धार्मिक ऊर्जा से भरा होता है। इसलिए जैन साधक इन तिथियों पर विशेष अनुष्ठान करते हैं।

फाल्गुन अष्टाह्निका विधान के पीछे धार्मिक मान्यता

जैन धर्मग्रंथों में बताया गया है कि अष्टाह्निका का समय अत्यंत पवित्र काल होता है। ऐसा माना जाता है कि इन आठ दिनों में नंदीश्वर द्वीप और सिद्धलोक की सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रभाव पृथ्वी पर भी विशेष रूप से महसूस की जाती है। यही कारण है कि इस समय की गई पूजा, जप और साधना का फल कई गुना अधिक मिलता है।

यहाँ हम आपको बता दें कि जैन मान्यता के अनुसार नंदीश्वर द्वीप पर देवगण स्वयं तीर्थंकर भगवान की भक्ति और पूजा-अर्चना करते हैं। इसी उपलक्ष्य में पृथ्वी पर रहने वाले श्रद्धालु उसी दिव्य पूजा का अनुसरण करते हुए अपने घरों और मंदिरों में अष्टाह्निका विधान करते हैं।

शास्त्र कहते हैं कि साधना सिर्फ़ पूजा पाठ से नहीं, बल्कि अपने भीतर झाँकने से शुरू होती है। ऐसे में अष्टाह्निका पर्व का संदेश है कि हम अपने मन के क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह जैसे विकारों को छोड़ें और मन, वाणी व कर्म में संयम लाएँ। जब हम भीतर से शुद्ध बनते हैं, तभी आध्यात्मिक प्रगति संभव होती है।

फाल्गुन अष्टाह्निका विधान के दौरान क्या करें?

फाल्गुन अष्टाह्निका के आठ दिनों का सर्वोत्तम लाभ उठाने के लिए साधक अनेक अनुष्ठान करते हैं। यदि आप भी ये पर्व मनाते हैं तो सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मंदिर या घर में पूजा-अर्चना करें। सिद्धचक्र विधान, नंदीश्वर पूजा, नवकार मंत्र का जप, भागवतम् पाठ और ध्यान इन दिनों विशेष रूप से किये जाते हैं।

ध्यान के माध्यम से मन को स्थिर, शांत और परमात्मा की ओर केंद्रित किया जाता है। साधु और श्रद्धालु संयमित आहार, व्रत और मौन में रहते हुए अपने भीतर की आत्मा-चेतना को मजबूत करते हैं। इस दौरान किसी जरूरतमंद की सहायता करना, दान-पुण्य करना, जीवों के प्रति करुणा दिखाना और गरीबों को भोजन देना भी इस अवधि में विशेष फल देने वाला माना जाता है।

फाल्गुन अष्टाह्निका विधान के दौरान क्या ना करें?

जैन धर्म में ये स्पष्ट कहा गया है कि बाहरी पूजा-अनुष्ठान के साथ आंतरिक शुद्धता भी उतनी ही आवश्यक है। इसलिए अष्टाह्निका के दौरान क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या, लोभ, झूठ, छल-कपट और कठोर वाणी बोलने से बचना चाहिए।

हिंसा, तामसिक आहार, नशा या अनैतिक कार्यों से भी दूरी बनाना आवश्यक है, क्योंकि ये सभी मन की पवित्रता को प्रभावित करते हैं। यदि मन अशांत होगा तो साधना का प्रभाव कमजोर रहेगा। जैन धर्म में संयम, अहिंसा, सत्य और आत्मनियंत्रण को साधना की मूल भावना माना गया है, इसलिए इन विचारों को जीवन में अपनाना अष्टाह्निका के सच्चे पालन की पहचान है।

ये थी 'फाल्गुन अष्टाह्निका' से जुड़ी विशेष जानकारी। हमारी कामना है कि इस दिन आपके द्वारा किए गए अनुष्ठान सफल हों, उनका संपूर्ण फल प्राप्त हो, और महावीर स्वामी की कृपा आप पर सदा बनी रहे। व्रत त्योहारों से जुड़ी जानकारियों के लिए जुड़े रहिए श्री मंदिर पर।

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Published by Sri Mandir·February 16, 2026

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