
"श्री कृष्ण की दिव्य छटा का आनंद लें, 'बांके बिहारी की देख छटा' भजन के पावन बोल अभी पढ़ें!"
ये भजन भगवान श्रीकृष्ण की मोहक और दिव्य छवि का वर्णन करता है। इसे सुनने और गाने से मन को शांति और आनंद की अनुभूति होती है। यह भजन भक्तों को भगवान की लीलाओं से जोड़ता है और उनके प्रति प्रेम और भक्ति की भावना को प्रबल करता है। इसे गाकर जीवन में सकारात्मकता, आत्मिक बल और आध्यात्मिक संतोष का अनुभव किया जा सकता है।
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
कब से खोजूं बनवारी को,
बनवारी को, गिरिधारी को।
कोई बता दे उसका पता,
मेरो मन है गयो लटा पटा॥
॥ बांके बिहारी की देख छटा...॥
मोर मुकुट श्यामल तन धारी,
कर मुरली अधरन सजी प्यारी।
कमर में बांदे पीला पटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा॥
॥ बांके बिहारी की देख छटा...॥
पनिया भरन यमुना तट आई,
बीच में मिल गए कृष्ण कन्हाई।
फोड़ दियो पानी को घटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा॥
॥ बांके बिहारी की देख छटा...॥
टेडी नज़रें लत घुंघराली,
मार रही मेरे दिल पे कटारी।
और श्याम वरन जैसे कारी घटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा॥
॥ बांके बिहारी की देख छटा...॥
मिलते हैं उसे बांके बिहारी,
बांके बिहारी, सनेह बिहारी।
राधे राधे जिस ने रटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा॥
॥ बांके बिहारी की देख छटा...॥
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
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