7 सितंबर 2025 को क्या है?
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7 सितंबर 2025 को क्या है?

7 सितंबर 2025 को क्या है? जानिए इस दिन का पंचांग, भाद्रपद पूर्णिमा, सत्यानारायण व्रत, ऋषि पंचमी व्रत और चंद्र दर्शन का महत्व और पूजा विधि।

आज के दिन के बारे में

7 सितंबर 2025 का दिन धार्मिक महत्व और पौराणिक परंपराओं से जुड़ा होगा। इस दिन कौन-कौन से व्रत और पर्व मनाए जाएंगे, इनके पीछे की मान्यताएं क्या कहती हैं और कौन से शुभ मुहूर्त आपके लिए खास रहेंगे, यह जानना उपयोगी और रोचक होगा। इस लेख में जानिए 7 सितंबर 2025 से जुड़ी पूरी और खास जानकारी, जो इस दिन को विशेष महत्व देती है।

7 सितंबर 2025: क्या है खास?

7 सितंबर 2025, रविवार का दिन है और यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है। इस दिन विशेष रूप से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है, जो पितरों को श्रद्धांजलि देने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इसके साथ ही, इस दिन एक दुर्लभ पूर्ण चंद्रग्रहण भी होगा, जो भारत में दिखाई देगा। यह खगोलीय घटना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखती है।

पितृ पक्ष की शुरुआत

पितृ पक्ष एक 16 दिवसीय अवधि है, जिसमें हिंदू धर्म में पितरों को तर्पण, श्राद्ध और पूजा अर्चना के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। इस दिन से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है, जो 22 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान पितरों के आशीर्वाद से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

पूर्ण चंद्रग्रहण का महत्व

7 सितंबर को होने वाला यह पूर्ण चंद्रग्रहण वर्ष 2025 का अंतिम चंद्रग्रहण है। यह ग्रहण विशेष रूप से कुंभ राशि में लगेगा, जिसमें राहु और चंद्रमा की युति होगी। ज्योतिषियों के अनुसार, यह ग्रहण कुछ राशियों पर विशेष प्रभाव डाल सकता है:

  • वृषभ राशि: स्वास्थ्य और आर्थिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।

  • मिथुन राशि: संतान को लेकर मानसिक तनाव और पारिवारिक असंतुलन हो सकता है।

  • सिंह राशि: वैवाहिक जीवन में परेशानी और परिवार में कलह की संभावना है।

  • तुला राशि: खर्चे बढ़ेंगे और कार्यों में देरी हो सकती है।

  • कुंभ राशि: दुर्घटना का खतरा और करियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इन राशियों को सलाह दी जाती है कि वे ग्रहण के समय विशेष सावधानी बरतें और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लें।

पंचांग विवरण

  • तिथि: भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा

  • वार: रविवार

  • नक्षत्र: शतभिषा

  • योग: धृति

  • करण: वणिज

  • राहुकाल: अपराह्न 2:30 से 4:00 बजे तक

  • अभिजीत मुहूर्त: प्रात: 11:30 से 12:00 बजे तक

पूजा विधि

पितृ पक्ष पूजा विधि

  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  • पितरों के नाम का स्मरण करें और उन्हें तर्पण अर्पित करें।

  • पुश्प, फल, तिल और जल अर्पित करें।

  • 'ॐ पितृभ्यो नमः' मंत्र का जाप करें।

  • ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा दें।

चंद्रग्रहण के दौरान

  • ग्रहण के समय पूजा-पाठ और ध्यान करना शुभ माना जाता है।

  • ग्रहण के समय खाना-पीना और मंगल कार्यों से बचना चाहिए।

  • ग्रहण के बाद स्नान करके शुद्धि प्राप्त करें।

निष्कर्ष

7 सितंबर 2025 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। पितृ पक्ष की शुरुआत और पूर्ण चंद्रग्रहण दोनों ही घटनाएं इस दिन को विशेष बनाती हैं। इस दिन पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और ग्रहण के समय धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने से जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। अत: इस दिन को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाएं और पितरों के आशीर्वाद से अपने जीवन को धन्य बनाएं।

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Published by Sri Mandir·September 8, 2025

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