
वृषभोत्सव 2025 कब है? जानें भगवान शिव को समर्पित इस पावन पर्व की तिथि, पूजा विधि, व्रत नियम और शुभ मुहूर्त की सम्पूर्ण जानकारी।
वृषभोत्सव एक पारंपरिक पर्व है जो विशेष रूप से बैलों (वृषभ) के सम्मान में मनाया जाता है। किसान इस दिन अपने बैलों को सजाकर पूजा करते हैं। यह उत्सव कृषि जीवन में पशुओं के महत्व को दर्शाता है और समृद्धि की कामना करता है।
हिंदू धर्म में कई ऐसे विशेष पर्व आते हैं, जब भगवान शिव की आराधना की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके वाहन नंदी की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। वृषभोत्सव एक ऐसा ही पर्व है, जब भगवान भोलेनाथ के उपासक विधि विधान से उनके वाहन नंदी की पूजा करते हैं।
मुहूर्त | समय |
ब्रह्म मुहूर्त | 04:06 ए एम से 04:50 ए एम तक |
प्रातः सन्ध्या | 04:28 ए एम से 05:34 ए एम तक |
अभिजित मुहूर्त | 11:35 ए एम से 12:26 पी एम तक |
विजय मुहूर्त | 02:09 पी एम से 03:01 पी एम तक |
गोधूलि मुहूर्त | 06:27 पी एम से 06:49 पी एम तक |
सायाह्न सन्ध्या | 06:27 पी एम से 07:34 पी एम तक |
अमृत काल | 10:40 पी एम से 12:16 ए एम, 23 अगस्त तक |
निशिता मुहूर्त | 11:39 पी एम से 12:23 ए एम, 23 अगस्त तक |
वृषभोत्सव एक धार्मिक पर्व है जो भगवान शिव के प्रिय वाहन नंदी बैल को समर्पित होता है। यह पर्व भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों में किसान वर्ग बड़ी श्रद्धा के साथ नंदी और शिवजी की पूजा करता है। ‘वृषभ’ का अर्थ होता है बैल, और यही वजह है कि इस दिन नंदी की पूजा का विशेष विधान होता है।
वृषभोत्सव मनाने का मुख्य उद्देश्य नंदी की महत्ता को सम्मान देना और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करना है। विशेष रूप से कृषक समुदाय इस पर्व को कृतज्ञता के रूप में मनाता है क्योंकि नंदी (बैल) खेतों की जुताई, बोआई आदि में मुख्य सहायक होता है। साथ ही, यह दिन धार्मिक दान-पुण्य, उपवास और समाज सेवा के संकल्प लेने का भी होता है।
वृषभोत्सव का महत्व आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से है।
वृषभोत्सव के दिन भगवान शिव और उनके वाहन नंदी बैल की विशेष पूजा की जाती है। नंदी को भगवान शिव का प्रमुख सेवक, वाहन और उनके द्वारपाल के रूप में जाना जाता है। इस दिन नंदी को पुष्प, जल और प्रसाद अर्पित कर शिव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की जाती है। कई स्थानों पर नंदी की मूर्ति का विशेष श्रृंगार कर मंदिरों में दर्शन-पूजन भी कराया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि, जो भक्त इस दिन उपवास रखते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही ये पर्व अमावस्या तिथि पर पड़ने के कारण श्राद्ध तर्पण या पितृ तर्पण के लिए भी ये दिन उत्तम माना जाता है। कहा जाता है इस दिन गाय का दान करना विशेष पुण्यफल प्रदान करने वाला होता है, वहीं जो भक्त इस दिन निर्धन यथासंभव दान देते हैं, उनपर सदा भगवान शिव की कृपा बनी रहती है।
वृषभोत्सव पर्व से जुड़ी एक मान्यता के अनुसार एक बार सभी देवताओं ने वृषभोत्सव का व्रत किया, जिसके प्रभाव से भगवान शिव ने भगवान विष्णु को वाहन के रूप में गरुड़ को दिया। वहीं इंद्रदेव को ऐरावत मिला। भगवान सूर्य को अपने सात घोड़ों का रथ प्राप्त हुआ और चंद्रदेव को विशेष माणिक हवाई जहाज मिला, जल के देवता को मगरमच्छ मिला, भगवान यमराज को वाहन के रूप में भैंसा मिला और भगवान कुबेर को इस व्रत के प्रभाव से पुष्कर विमान मिला।
तो यह थी वृषभोत्सव पर्व से जुड़ी जानकारी। हमारी कामना है कि आपको इस व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो, और आप पर भगवान भोलेनाथ की कृपा सदैव बनी रहे।
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