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मृत संजीवनी मंत्र | Mrit Sanjeevani Mantra

जानें इसे पढ़ने के अद्भुत लाभ और सही जाप का तरीका। जीवन में स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति पाने का सरल उपाय।

मृत संजीवनी मंत्र के बारे में

मृत संजीवनी मंत्र बहुत ही शक्तिशाली और दुर्लभ माना जाता है। कहा जाता है कि इसका ज्ञान केवल महर्षि शुक्राचार्य के पास था। इस अद्भुत मंत्र की शक्ति से मृत व्यक्ति को भी जीवन मिल सकता था, इसी कारण इसे “मृत संजीवनी मंत्र” कहा गया।

मृत संजीवनी मंत्र क्या है?

मृत संजीवनी मंत्र को बहुत ही प्रभावशाली और रहस्यमय वैदिक मंत्र माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंत्र की शक्ति से मृत व्यक्ति में भी फिर से प्राण जागृत हो सकते हैं। यह मंत्र जीवन और मृत्यु पर नियंत्रण की दिव्य शक्ति का प्रतीक है।

मृत संजीवनी मंत्र

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ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुव: स्व: ॐ त्रयंबकंयजामहे ॐ तत्सर्वितुर्वरेण्यं ॐ सुगन्धिंपुष्टिवर्धनम ॐ भर्गोदेवस्य धीमहि ॐ उर्वारूकमिव बंधनान ॐ धियो योन: प्रचोदयात ॐ मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ स्व: ॐ भुव: ॐ भू: ॐ स: ॐ जूं ॐ हौं ॐ

अर्थ

  • ॐ हौं जूं सः ये पवित्र बीज मंत्र हैं, जो ब्रह्मांड की ऊर्जा, शक्ति और सुरक्षा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  • सृष्टि के मूल स्रोत और परमात्मा का प्रतीक।

  • हौं: भगवान शिव की चेतन शक्ति का द्योतक।

  • जूं: रक्षण और सुरक्षात्मक ऊर्जा का प्रतीक।

  • सः : पूर्णता और दिव्यता का सूचक।

  • ॐ भूर्भुवः स्वः: यह मंत्र तीन लोकों पृथ्वी (भूः), अंतरिक्ष (भुवः) और स्वर्ग (स्वः) की दिव्य शक्तियों को नमन करता है और उनके सामंजस्यपूर्ण प्रभाव का आह्वान करता है।

ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारूकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्

  • यह महामृत्युंजय मंत्र है, जिसमें हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो जीवन को पुष्ट करते हैं और हर ओर व्याप्त हैं। जैसे पका हुआ फल बेल से स्वतः अलग हो जाता है, वैसे ही हम मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर अमरत्व को प्राप्त करें, यही इस मंत्र का भाव है।

ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

  • यह गायत्री मंत्र है, जिसमें हम उस परम प्रकाशमय ऊर्जा का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को प्रेरित कर धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की शक्ति देती है।

अंतिम भाग

ॐ स्वः ॐ भुवः ॐ भूः ॐ सः ॐ जूं ॐ हौं ॐ

  • यह भाग ब्रह्मांडीय ऊर्जा को पुनः सक्रिय करने का संकेत है, जिससे साधक के चारों ओर एक अदृश्य दिव्य कवच बनता है, जो उसे नकारात्मकता और भय से सुरक्षित रखता है।

मृत संजीवनी मंत्र पढ़ने के फायदे

मृत संजीवनी मंत्र को ऐसा अद्भुत वैदिक मंत्र माना गया है जो जीवन में ऊर्जा, शक्ति और सुरक्षा प्रदान करता है। यह केवल मृत्यु से रक्षा का नहीं, बल्कि जीवन में स्थिरता और आत्मिक जागरण का मंत्र है। इसके नियमित जप से साधक के जीवन में गहरा सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है।

1. दीर्घायु और मृत्यु से मुक्ति

इस मंत्र का सबसे प्रमुख प्रभाव है अकाल मृत्यु और गंभीर संकटों से रक्षा। जो व्यक्ति श्रद्धा से इसका जप करता है, वह जीवन के बड़े से बड़े संकट से बच जाता है। यह मंत्र आयु वृद्धि का आशीर्वाद देता है और भय को दूर करता है।

2. रोगों से राहत और स्वास्थ्य में सुधार

मृत संजीवनी मंत्र शरीर की प्राण शक्ति को जागृत करता है। यह मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों में संतुलन बनाए रखता है। नियमित जप से रोगों का प्रभाव कम होता है, थकान और कमजोरी दूर होती है, और शरीर में नई स्फूर्ति आती है।

3. नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा कवच

यह मंत्र एक दिव्य सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति पर कोई भी नकारात्मक शक्ति, बुरी नज़र या भय प्रभाव नहीं डाल पाता। यह मन को स्थिर रखकर आत्मविश्वास बढ़ाता है।

4. मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि

मंत्र जप से मन की बेचैनी, तनाव और भ्रम समाप्त होते हैं। व्यक्ति के विचारों में स्पष्टता आती है और उसका आत्मबल बढ़ता है। यह साधक को शांत, दृढ़ और सकारात्मक बनाता है।

5. आध्यात्मिक जागरण और ईश्वरीय शक्ति का अनुभव

मृत संजीवनी मंत्र का गहरा असर आध्यात्मिक स्तर पर महसूस होता है। यह व्यक्ति के भीतर छिपी दिव्यता को जगाता है और आत्मा को उच्च चेतना से जोड़ता है। इससे साधक को आंतरिक सुख और शांति की अनुभूति होती है।

6. जीवन में सौभाग्य और प्रगति

नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से जीवन की रुकावटें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। कार्य सिद्ध होते हैं और भाग्य का मार्ग खुलने लगता है। साधक के जीवन में सकारात्मक घटनाएँ बढ़ने लगती हैं।

7. संकट के समय दिव्य रक्षा कवच

जब जीवन में भय, बीमारी या कठिनाई आए, तब इस मंत्र का जप दिव्य सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह मन को स्थिर रखकर आत्मविश्वास और साहस प्रदान करता है।

मृत संजीवनी मंत्र पढ़ने के नियम

मृत संजीवनी मंत्र अत्यंत प्रभावशाली और दिव्य माना जाता है। इसे पढ़ते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है ताकि मंत्र का पूरा लाभ प्राप्त हो सके।

1. समय और अवधि

  • मंत्र पढ़ने के लिए सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4–6 बजे) है।
  • हालांकि दिन या शाम को भी पढ़ सकते हैं, लेकिन सुबह का समय सबसे प्रभावशाली माना जाता है।
  • मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना उत्तम होता है।

2. स्थान और वातावरण

  • मंत्र जप का स्थान शांत, स्वच्छ और पवित्र होना चाहिए।
  • यदि संभव हो तो धूप या दीपक जलाकर वातावरण को शुद्ध करें।
  • जप करते समय मन को पूर्ण रूप से एकाग्र रखें।

3. आसन और मुद्रा

  • आरामदायक पद्मासन या सुखासन में बैठें।
  • रीढ़ को सीधा रखें और शरीर में तनाव न हो।
  • मंत्र उच्चारण के दौरान हृदय और मस्तिष्क पर ध्यान केंद्रित करें।

4. श्रद्धा और मानसिक स्थिति

  • मंत्र का जप केवल उच्चारण करने से नहीं, बल्कि श्रद्धा और ध्यान के साथ करना चाहिए।
  • मन को शुद्ध और सकारात्मक रखें।
  • जप के दौरान यह भाव बनाए रखें कि ईश्वर की शक्ति आप पर कार्य कर रही है।

5. सामग्री

  • चाहें तो पीले फूल, हल्दी या तांबे का थाल रख सकते हैं।
  • जप के दौरान हल्का भोग या सादा पानी भी रखा जा सकता है।
  • मंत्र पढ़ने के बाद ध्यानपूर्वक शांत रहें और पानी का सेवन करें।

6. नियमितता

  • नियमित जप से मंत्र का प्रभाव अधिक बढ़ता है।
  • प्रतिदिन 1–2 बार या विशेष समय पर (जैसे संकट, रोग, भय) इसका जप लाभकारी होता है।
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Published by Sri Mandir·February 10, 2026

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