
जानें इसे पढ़ने के अद्भुत लाभ और सही जाप का तरीका। जीवन में नकारात्मकता से मुक्ति और आंतरिक शक्ति बढ़ाने का सरल उपाय।
अतुलित बलधाम मंत्र का हनुमान भक्ति में विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह मंत्र अद्भुत शक्ति, साहस और भय से मुक्ति का प्रतीक है, जो भक्त के भीतर आत्मबल और विश्वास को जाग्रत करता है। श्रद्धा के साथ इसके जाप से संकटों से रक्षा की मान्यता है। इस लेख में जानिए अतुलित बलधाम मंत्र का अर्थ, महत्व और इसके जाप से मिलने वाले लाभ।
अतुलितबलधामं “ मात्र एक शब्द नहीं, बल्कि श्री हनुमान ध्यान मंत्र (या हनुमान स्तवन) का पहला चरण है। यह श्लोक भगवान हनुमान के दिव्य स्वरूप, असीम शक्ति, ज्ञान और उनकी परम भक्ति का संक्षिप्त और शक्तिशाली वर्णन करता है। यह श्लोक ही अपने आप में एक संपूर्ण प्रार्थना है, जिसका जप हनुमान जी के ध्यान और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है।
“अतुलितबलधामं” वास्तव में हनुमान ध्यान श्लोक का आरंभिक पद है, जो सीधे पवनपुत्र हनुमान जी के प्रति नमन और उनकी स्तुति को समर्पित है। इस श्लोक को हनुमान चालीसा या अन्य पाठों के शुरू में ध्यान के लिए पढ़ा जाता है।
**अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं, दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं, रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥**
यह श्लोक एक शक्तिशाली स्तुति है जिसमें भक्त पवनपुत्र हनुमान के अद्भुत गुणों का बखान करते हुए उन्हें प्रणाम करता है। मंत्र का अर्थ इस प्रकार है:
1. “अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्”
अतुलित-बल-धामं: जो अतुलनीय (जिसकी तुलना न हो सके) शक्ति के निवास स्थान हैं, यानी अपार बल के भंडार हैं।
हेम-शैला-भ-देहम्: जिनका विशाल शरीर सोने के पर्वत (जैसे सुमेरु पर्वत) के समान कांतिमान और तेजोमय है।
अर्थ: मैं उन हनुमान जी को नमन करता हूँ जो अपार बल के धाम हैं और जिनका शरीर सोने के पर्वत के समान तेजस्वी है।
2. “दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्”
दनुज-वन-कृशानुं: जो दैत्य (राक्षस) रूपी वन को भस्म करने के लिए अग्नि के समान हैं। (जैसे अग्नि पूरे वन को जला देती है, वैसे ही हनुमान जी राक्षसों का विनाश करते हैं)।
ज्ञानिनाम्-अग्रगण्यम्: जो ज्ञानियों और बुद्धिमानों में सबसे आगे (अग्रगण्य) गिने जाते हैं।
अर्थ: जो राक्षसों के विनाश के लिए अग्नि के समान हैं और ज्ञानियों में सबसे श्रेष्ठ हैं।
3. “सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं”
सकल-गुण-निधानं: जो समस्त गुणों के भंडार (निधान) हैं।
वानराणाम-धीशम्: जो वानरों के स्वामी या अधिपति हैं।
अर्थ: जो सभी गुणों के भंडार हैं और वानरों के राजा (सुग्रीव के मंत्री) के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
4. “रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥”
रघुपति-प्रिय-भक्तम्: जो रघुपति (श्रीराम) के सबसे प्रिय भक्त हैं।
वात-जातम्: जो वायु (पवन) के पुत्र हैं।
नमामि: मैं प्रणाम करता हूँ।
अर्थ: मैं श्री राम के प्रिय भक्त, पवनपुत्र हनुमान जी को नमन करता हूँ।
संपूर्ण भावार्थ: मैं अतुलनीय शक्ति के धाम, सोने के पर्वत के समान कांतिवान शरीर वाले, राक्षसों के जंगल को जलाने वाली अग्नि के समान, ज्ञानियों में सबसे श्रेष्ठ, सभी गुणों के भंडार, वानरों के स्वामी, श्री राम के प्रिय भक्त, पवनपुत्र श्री हनुमान जी को प्रणाम करता हूँ।
इस ध्यान मंत्र का नियमित और श्रद्धापूर्वक जाप करने से भक्तों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सभी स्तरों पर लाभ प्राप्त होते हैं। यह मंत्र बजरंगबली की कृपा प्राप्त करने का एक सीधा माध्यम है।
1. बल, बुद्धि और साहस में वृद्धि
यह मंत्र सीधे तौर पर हनुमान जी के बल, ज्ञान और पराक्रम का आह्वान करता है, जिसके कारण व्यक्ति में निम्नलिखित लाभ होते हैं।
अपार शक्ति का संचार: मंत्र की पहली ही पंक्ति हनुमान जी को ‘अतुलित बल धाम’ बताती है। इसका जाप करने से साधक में शारीरिक शक्ति, बल और सहनशीलता में वृद्धि होती है।
ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति: हनुमान जी ज्ञानियों में अग्रगण्य माने जाते हैं। इस मंत्र के जाप से बुद्धि, विवेक और एकाग्रता बढ़ती है, जिससे छात्र और ज्ञानीजन विशेष रूप से लाभान्वित होते हैं।
निर्भीकता और आत्मविश्वास: हनुमान जी निडरता के प्रतीक हैं। इस मंत्र के नित्य जाप से मन से भय, चिंता और असुरक्षा की भावना दूर होती है, और व्यक्ति में आत्मविश्वास तथा साहस का संचार होता है।
2. नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से मुक्ति
शत्रु और नकारात्मकता का नाश: मंत्र में हनुमान जी को ‘दनुजवनकृशानुं’ (राक्षस रूपी वन के लिए अग्नि) कहा गया है। इसका अर्थ है कि यह मंत्र शत्रुओं, बुरी शक्तियों, तंत्र-मंत्र और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को समाप्त करने में अत्यंत प्रभावी है।
संकटमोचन: हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। इस मंत्र का जाप जीवन के कठिन कार्यों, बाधाओं और समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है। यह कोर्ट-कचहरी के मामलों में भी सफलता दिलाने वाला माना जाता है।
3. आध्यात्मिक और मानसिक लाभ
मन की शांति और स्थिरता: हनुमान जी जितेंद्रिय हैं। उनके ध्यान से मन को शांति और स्थिरता प्राप्त होती है, जिससे मानसिक तनाव और बेचैनी दूर होती है।
रोगों से मुक्ति: माना जाता है कि नियमित जाप से गंभीर बीमारियों और रोगों से मुक्ति मिलती है।
समस्त गुणों का विकास: मंत्र में उन्हें ‘सकलगुणनिधानं’ कहा गया है। उनके गुणों का स्मरण करने से साधक में भी विनम्रता, भक्ति, सेवाभाव और निष्ठा जैसे सद्गुणों का विकास होता है।
4. शनि ग्रह के दुष्प्रभाव से सुरक्षा
माना जाता है कि हनुमान जी की पूजा और मंत्र जाप से शनि देव के साढ़ेसाती या ढैय्या जैसे बुरे प्रभावों से भी रक्षा होती है, क्योंकि शनि देव ने स्वयं हनुमान भक्तों को न सताने का वचन दिया था।
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