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भगवान शिव के मंत्र | Shiva Mantra

जानें इनके चमत्कारिक लाभ और सही जाप करने का तरीका। जीवन में नकारात्मकता से मुक्ति और आशीर्वाद पाने का सरल उपाय।

शिव मंत्र के बारे में

भगवान शिव के मंत्रों का सनातन धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इन मंत्रों के जाप से मन की शांति, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति और आत्मिक बल की प्राप्ति होती है। शिव मंत्र साधना और भक्ति के मार्ग को सुदृढ़ करते हैं। इस लेख में जानिए भगवान शिव के ऐसे शक्तिशाली मंत्र, जिनका जाप जीवन में शांति, शक्ति और सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

भगवान शिव मंत्र का महत्व

भगवान शिव के मंत्रों का महत्व अत्यंत गहरा और पवित्र माना जाता है। जब कोई भक्त श्रद्धा से इनका जप करता है, तो उसके भीतर मानसिक शांति और आत्मिक शक्ति का संचार होता है। मंत्रों की ध्वनि तरंगें मन को स्थिर करती हैं और तनाव, भय व चिंता को कम करती हैं। शिव मंत्रों का जप मन और आत्मा को संतुलन देता है तथा जीवन में सकारात्मकता लाता है। इनके उच्चारण से नकारात्मकता दूर होती है, जिससे साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह मंत्र तनाव और डर को कम करके मानसिक शांति प्रदान करते हैं और साधक को आध्यात्मिक उन्नति व मोक्ष की ओर अग्रसर करते हैं।

भगवान शिव के मंत्र

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**1.** **शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।** **ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।।**

अर्थ: इस मंत्र में भगवान शिव को उनके कई स्वरूपों में प्रणाम किया गया है। शिव को शम्भु, शंकर, शिवतर और ईशान कहकर उन्हें सम्पूर्ण ज्ञान, शक्ति और ब्रह्मांड के अधिपति के रूप में नमन किया गया है।

इस मंत्र के लाभ

  • साधक के भीतर आत्मविश्वास और आस्था मजबूत होती है।
  • नकारात्मकता और अज्ञान का नाश होता है।
  • मन में पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
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**2.** **ॐ नमो भगवते रूद्राय ।** **रूद्र गायत्री मंत्र** **ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय** **धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥**

अर्थ: यह मंत्र भगवान रुद्र की वंदना है। इसमें प्रार्थना है कि हम महादेव का ध्यान करें और वे हमारी बुद्धि को सही मार्ग पर प्रेरित करें ताकि जीवन धर्म और सत्य की ओर अग्रसर हो।

लाभ: स्मरण शक्ति और विवेक का विकास करता है। बेचैनी और तनाव को कम करता है। साधक को सही निर्णय लेने की क्षमता देता है।

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**3. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्** **उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥**

अर्थ: इस मंत्र में भगवान शिव से प्रार्थना की जाती है कि जैसे बेल से पक चुकी लौकी सहजता से अलग हो जाती है, वैसे ही वे हमें जीवन के बंधनों और मृत्यु से मुक्त करके दीर्घायु और अमरत्व प्रदान करें।

लाभ: अकाल मृत्यु और गंभीर संकट से रक्षा करता है। स्वास्थ्य, दीर्घायु और मानसिक शांति देता है। कठिन समय में आत्मबल और सहनशक्ति बढ़ाता है।

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**4. भगवान श‍िव का नामावली मंत्र** **श्री शिवाय नम:** **श्री शंकराय नम:** **श्री महेश्वराय नम:** **श्री सांबसदाशिवाय नम:** **श्री रुद्राय नम:** **ॐ पार्वतीपतये नम:** **ॐ नमो नीलकण्ठाय नम:**

अर्थ: इस मंत्र में शिव के विभिन्न नामों जैसे शिव, शंकर, महेश्वर, सदाशिव, रुद्र, पार्वतीपति और नीलकण्ठ का स्मरण किया जाता है। हर नाम उनके अलग-अलग स्वरूप और गुणों की याद दिलाता है।

लाभ: शिव के हर स्वरूप का आशीर्वाद मिलता है। घर-परिवार में शांति और समृद्धि बनी रहती है। मन एकाग्र होकर भक्ति में स्थिर होता है।

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5. भगवान शिव से क्षमा मांगने का मंत्र ॐ मृत्युंजय परेशान जगदाभयनाशन । तव ध्यानेन देवेश मृत्युप्राप्नोति जीवती ।। वन्दे ईशान देवाय नमस्तस्मै पिनाकिने । नमस्तस्मै भगवते कैलासाचल वासिने । आदिमध्यांत रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।। त्र्यंबकाय नमस्तुभ्यं पंचस्याय नमोनमः । नमोब्रह्मेन्द्र रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।। नमो दोर्दण्डचापाय मम मृत्युम् विनाशय ।। देवं मृत्युविनाशनं भयहरं साम्राज्य मुक्ति प्रदम् । नमोर्धेन्दु स्वरूपाय नमो दिग्वसनाय च । नमो भक्तार्ति हन्त्रे च मम मृत्युं विनाशय ।। अज्ञानान्धकनाशनं शुभकरं विध्यासु सौख्य प्रदम् । नाना भूतगणान्वितं दिवि पदैः देवैः सदा सेवितम् ।। सर्व सर्वपति महेश्वर हरं मृत्युंजय भावये ।।

अर्थ: इस मंत्र में भक्त भगवान शिव से प्रार्थना करता है कि वे मृत्यु और भय को दूर करें तथा मोक्ष का मार्ग प्रदान करें। इसमें शिव को कैलासवासी, त्र्यंबक, पंचमुखी, पिनाकधारी, रुद्र और करुणामय देवता के रूप में याद करके अपने सभी पापों और भूलों के लिए क्षमा माँगी जाती है।

लाभ: अपराधबोध और मानसिक बोझ समाप्त होता है। जीवन की रुकावटें और डर कम होते हैं। आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग आसान होता है।

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**6. शिव प्रार्थना मंत्र** करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं श्रावण वाणंजं वा मानसंवापराधं । विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो ॥

अर्थ: यह प्रार्थना अपनी गलतियों की क्षमा माँगने की है। इसमें स्वीकार किया जाता है कि हाथ-पैर, वाणी, मन या विचार से चाहे जानकर या अनजाने में जो भी अपराध हुए हों, महादेव उन्हें क्षमा करें।

लाभ: मन हल्का और निर्मल अनुभव करता है। भक्ति और भगवान पर विश्वास गहरा होता है। साधक के भीतर शांति और करुणा की भावना बढ़ती है।

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**7. ॐ भूतनाथाय नमः**

अर्थ: भूतनाथ का मतलब है “सभी जीवों और प्राणियों के स्वामी शिव।” इस मंत्र में शिव को उनके इस रूप में स्मरण किया जाता है कि वे सम्पूर्ण जीवन और शक्ति के अधिपति हैं।

लाभ: जीवन में सुरक्षा और संरक्षण की अनुभूति होती है। कठिन परिस्थितियों में साहस और धैर्य बढ़ता है। नकारात्मक ऊर्जा और भय दूर होते हैं। घर और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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**8. ॐ शिवाय शान्ताय नमः**

अर्थ: इस मंत्र में शिव को शांति और संतुलन देने वाले स्वरूप में स्मरण किया जाता है। लाभ: मन और विचार स्थिर और शांत रहते हैं। तनाव, चिंता और भय कम होते हैं। मानसिक संतुलन और सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। साधना और ध्यान में सफलता मिलती है।

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**9. ॐ अघोराय नमः**

अर्थ: अघोर का अर्थ है “जो भय और नकारात्मकता का नाश करता है।” यह मंत्र शिव के उस रूप को स्मरण करता है जो बुराई और अज्ञान का अंत करता है।

लाभ: भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। कठिन परिस्थितियों में साहस और आत्मबल मिलता है। जीवन में बाधाओं का नाश होता है। मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है।

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**10. ॐ शिवशक्त्यै नमः**

अर्थ: यह मंत्र शिव और उनकी दिव्य शक्ति (ऊर्जा) को समर्पित है। इसमें भगवान शिव और उनकी शक्ति का ध्यान किया जाता है।

लाभ: शरीर, मन और आत्मा में ऊर्जा और शक्ति आती है। साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ती है। जीवन की चुनौतियों का सामना करना आसान होता है। आध्यात्मिक प्रगति और भक्ति में स्थिरता मिलती है।

निष्कर्ष

शिव मंत्रों का जाप मन और आत्मा को स्थिरता और शक्ति प्रदान करता है। यह जीवन से नकारात्मक ऊर्जा और भय को दूर करता है। साधक के आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और सफलता में वृद्धि होती है। साथ ही यह आध्यात्मिक प्रगति और मोक्ष प्राप्ति में मदद करता है।

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Published by Sri Mandir·February 5, 2026

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