विनायक चतुर्थी कब है
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विनायक चतुर्थी कब है?

क्या आप जानते हैं विनायक चतुर्थी 2026 कब है? यहां जानिए तिथि, पूजा-विधि, व्रत नियम, शुभ मुहूर्त और श्रीगणेश आराधना से जुड़ी धार्मिक परंपराओं की सभी महत्वपूर्ण जानकारी एक ही स्थान पर

विनायक चतुर्थी के बारे में

हर महीने आने वाली चतुर्थी तिथि भगवान गणेश जी को समर्पित होती है। हर मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है, जबकि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी कहलाती है। इस दिन भगवान श्री गणेश की विशेष पूजा-अर्चना, व्रत और आराधना करने से जीवन में सुख, समृद्धि और बाधा-मुक्ति प्राप्त होती है।

विनायक चतुर्थी कब कब है?

वासुदेव चतुर्थी - 22 मार्च 2026, रविवार

  • 11:15 एएम से 01:41 पीएम (चतुर्थी: 02 घंटे 26 मिनट्स),
  • चैत्र, शुक्ल चतुर्थी, प्रारम्भ - 11:56 पीएम,
  • 21 मार्च, समाप्त - 09:16 पीएम 22 मार्च

संकर्षण चतुर्थी - 20 अप्रैल 2026, सोमवार

  • 11:02 एएम से 01:38 पीएम (चतुर्थी: 02 घंटे 36 मिनट्स),
  • वैशाख, शुक्ल चतुर्थी, प्रारम्भ - 07:27 एएम,
  • 20 अप्रैल, समाप्त - 04:14 ए.एम., 21 अप्रैल

वरदा चतुर्थी - 20 मई 2026, बुधवार

  • 10:56 एएम से 11:06 एएम (चतुर्थी: 00 घंटे 10 मिनट्स),
  • ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी, प्रारम्भ - 02:18 पीएम,
  • 19 मई, समाप्त - 11:06 एएम, 20 मई

प्रद्युम्न चतुर्थी - 18 जून 2026, बृहस्पतिवार

  • 10:58 एएम से 01:46 पीएम (चतुर्थी: 02 घंटे 48 मिनट्स),
  • ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी, प्रारम्भ - 09:38 पीएम,
  • 17 जून, समाप्त - 06:58 पीएम, 18 जून

अनिरुद्ध चतुर्थी - 17 जुलाई 2026, शुक्रवार

  • 11:05 एएम से 01:50 पीएम (चतुर्थी: 02 घंटे 45 मिनट्स),
  • आषाढ़, शुक्ल चतुर्थी, प्रारम्भ - 06:27 एएम,
  • 17 जुलाई, समाप्त - 04:42 एएम, 18 जुलाई

दूर्वा गणपति चतुर्थी - 16 अगस्त 2026, रविवार

  • 11:06 एएम से 01:44 पीएम (चतुर्थी: 02 घंटे 38 मिनट्स),
  • श्रावण, शुक्ल चतुर्थी, प्रारम्भ - 05:28 पीएम,
  • 15 अगस्त, समाप्त - 04:52 पीएम, 16 अगस्त

गणेश चतुर्थी - 14 सितम्बर 2026, सोमवार

  • 11:02 एएम से 01:31 पीएम (चतुर्थी: 02 घंटे 28 मिनट्स),
  • भाद्रपद, शुक्ल चतुर्थी, प्रारम्भ - 07:06 एएम,
  • 14 सितम्बर, समाप्त - 07:44 एएम, 15 सितम्बर

कपर्दिश चतुर्थी - 14 अक्टूबर 2026, बुधवार

  • 10:58 एएम से 01:16 पीएम (चतुर्थी: 02 घंटे 18 मिनट्स),
  • आश्विन, शुक्ल चतुर्थी, प्रारम्भ - 11:27 पीएम,
  • 13 अक्टूबर, समाप्त - 01:13 एएम, 15 अक्टूबर

लाभ चतुर्थी - 13 नवम्बर 2026, शुक्रवार

  • 11:01 एएम से 01:10 पीएम. (चतुर्थी: 02 घंटे 09 मिनट्स),
  • कार्तिक, शुक्ल चतुर्थी, प्रारम्भ - 06:09 पीएम,
  • 12 नवम्बर, समाप्त - 08:42 पीएम, 13 नवम्बर

कृच्छ्र चतुर्थी - 13 दिसम्बर 2026, रविवार

  • 11:13 एएम से 01:17 पीएम (चतुर्थी: 02 घंटे 04 मिनट्स),
  • मार्गशीर्ष, शुक्ल चतुर्थी, प्रारम्भ - 02:06 पीएम,
  • 12 दिसम्बर, समाप्त - 04:47 पीएम, 13 दिसम्बर

विनायक चतुर्थी का महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता कहा गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे पहले की जाती है ताकि कार्य सिद्धि में कोई विघ्न न आए। विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रखने और गणेश जी की विधिवत पूजा करने से जीवन में चल रही रुकावटें समाप्त होती हैं, मनोबल बढ़ता है और परिवार में सौहार्द का वातावरण बनता है।

पुराणों में कहा गया है कि इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा करने से ‘विघ्न विनाशक’ ऊर्जा प्राप्त होती है। यह तिथि ज्ञान, बुद्धि और सफलता की देवी सरस्वती माता के पूजन का भी उत्तम समय मानी जाती है क्योंकि गणेश जी स्वयं ‘बुद्धि के देवता’ हैं।

विनायक चतुर्थी व्रत और पूजा विधि

  • व्रत रखने वाले जातक को प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। फिर भगवान गणेश का ध्यान कर व्रत रखने का संकल्प लें।
  • घर में पूजास्थल को साफ करके लाल या पीले वस्त्र पर गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • अब भगवान गणेश जी का आवाहन करें, और उन्हें जल, अक्षत, चंदन, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • गणेश जी के 21 नामों का जाप करें या “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
  • अब भगवान गणेश जी की आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल चूक के लिए क्षमा-प्रार्थना करें।
  • इस दिन व्रत रखने वाला व्यक्ति दिनभर निर्जला या फलाहार उपवास रखता है। संध्या समय गणेश पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है।

विनायक चतुर्थी पर क्या करें

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और गणेश जी की मूर्ति को जल से स्नान कराएं।
  • इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है क्योंकि यह गणेश जी का प्रिय रंग है।
  • घर में मोदक, लड्डू या गुड़ से बने व्यंजन बनाएं और उन्हें भोग लगाएं।
  • भगवान गणेश की कथा सुनें और परिवार के साथ आरती करें।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फलदान करें।

विनायक चतुर्थी पर क्या न करें

  • इस दिन मांस, मदिरापान या तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • चंद्र दर्शन से बचना चाहिए क्योंकि पुराणों के अनुसार चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से मिथ्या दोष लग सकता है।
  • विनायक चतुर्थी के दिन किसी को कटु वचन बोलने या विवाद करने से बचें।
  • झूठ बोलने और छल-कपट से बचें। विनायक चतुर्थी पर असत्य और कपटपूर्ण आचरण शुभ फल को कम करता है।
  • अनुचित या अपवित्र कार्यों से दूरी रखें। घर और मन दोनों को शुद्ध रखना इस दिन का मुख्य नियम माना गया है।

विनायक चतुर्थी के लाभ

बाधा निवारण

जो भी व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करता है, उसके जीवन की रुकावटें दूर होती हैं। नौकरी, व्यापार या परिवार में चल रही कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है।

सफलता और बुद्धि की प्राप्ति

गणेश जी को ‘बुद्धि और विवेक के दाता’ कहा गया है। उनकी पूजा करने से निर्णय शक्ति बढ़ती है और जीवन में सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।

धन और सौभाग्य की वृदधि

इस दिन किए गए गणेश पूजन से घर में सुख-समृद्धि और धनवृद्धि का आशीर्वाद मिलता है, साथ ही लक्ष्मी जी की कृपा भी प्राप्त होती है।

परिवार में सुख और शांति

विनायक चतुर्थी व्रत से परिवार में एकता, प्रेम और सौहार्द बढ़ता है। पति-पत्नी के बीच संबंध मधुर होते हैं और बच्चों की उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

मनोकामना पूर्ति

सच्चे मन से की गई प्रार्थना और पूजा जीवन की छोटी-बड़ी सभी मनोकामनाओं को पूरा करने में सहायक होती है।

स्वास्थ्य लाभ

यह व्रत शरीर को ऊर्जा, संतुलन और आरोग्य प्रदान करता है तथा मानसिक शांति बढ़ाता है।

कार्यसिद्धि

विनायक चतुर्थी की पूजा से रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं, सफलता मिलती है और जीवन में नई राहें खुलती हैं।

यह थी ‘विनायक चतुर्थी’ से जुड़ी जानकारी। सनातन धर्म में भगवान गणेश प्रथम पूज्य माने जाते हैं। अर्थात प्रत्येक पूजा से पहले श्री गणेश जी का आह्वान और पूजन किया जाता है। हमारी कामना है कि मनोवांछित फल देने वाले इस पर्व पर भगवान गणेश आपकी सभी इच्छाएं पूर्ण करें, और आपके घर परिवार में सुख समृद्धि बनाएं रखें।

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Published by Sri Mandir·March 16, 2026

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