गणेश चतुर्थी कब है?
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गणेश चतुर्थी कब है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए भगवान गणेश की पूजा की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, पौराणिक कथा, आध्यात्मिक महत्व और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों की संपूर्ण जानकारी।

गणेश चतुर्थी के बारे में

गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक प्रमुख और अत्यंत लोकप्रिय त्यौहार है, जो भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आता है। इस दिन श्रद्धालु अपने घरों और सार्वजनिक मंडपों में विघ्नहर्ता गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते हैं। दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में पूजा-अर्चना के बाद अनंत चतुर्दशी को गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाता है।

गणेश चतुर्थी 2026 की सम्पूर्ण जानकारी

हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, मांगलिक आयोजन, पूजा, यज्ञ या नए कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण के बिना अधूरी मानी जाती है। भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, सुख, समृद्धि, सफलता और विघ्नों को दूर करने वाले देवता हैं। यही कारण है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे भारत में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा, सामाजिक एकता और भक्तिभाव का महापर्व है। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश पृथ्वी लोक पर अपने भक्तों के बीच विराजमान होते हैं और उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर जीवन के सभी कष्टों, विघ्नों और दुखों को दूर करते हैं। इसलिए यह पर्व भक्तों के लिए अत्यंत विशेष और शुभ माना जाता है।

इस लेख में हम जानेंगे गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व, पूजा विधि, पूजन सामग्री, परंपराएं, मान्यताएं, विशेष नियम, किए जाने वाले शुभ कार्य और इस पर्व का आध्यात्मिक संदेश।

गणेश चतुर्थी कब है?

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी शुभ तिथि पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था। वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितम्बर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त गणपति बप्पा की प्रतिमा को घर और पंडालों में स्थापित कर पूरे श्रद्धा भाव से पूजा करेंगे। गणेशोत्सव का यह पावन पर्व चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होकर अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इन दस दिनों के दौरान भक्त गणेश जी की आराधना, भजन-कीर्तन, आरती, प्रसाद वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। गणेश चतुर्थी विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर भारत के कई राज्यों में अत्यंत धूमधाम के साथ मनाई जाती है। मुंबई की गणेशोत्सव की भव्यता विश्वभर में प्रसिद्ध है।

गणेश चतुर्थी 2026 के शुभ मुहूर्त व तिथि

गणेश चतुर्थी का पर्व शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की स्थापना और पूजा करने से अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सही मुहूर्त में गणपति स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।

गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि और प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे:

  • गणेश चतुर्थी - 14 सितम्बर 2026, सोमवार
  • मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त - प्रातः 10 बजकर 39 मिनट से दोपहर 01 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।
  • जिसकी कुल अवधि 02 घण्टे 28 मिनट्स रहेगी।
  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ - 14 सितम्बर 2026 को सुबह 07 बजकर 06 मिनट से।
  • चतुर्थी तिथि समाप्त - 15 सितम्बर 2026 को सुबह 07 बजकर 44 मिनट तक।
  • गणेश विसर्जन - 25 सितम्बर 2026, शुक्रवार को किया जाएगा।
  • वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 08:37 ए एम से 07:46 पी एम
  • जिसकी कुल अवधि 11 घण्टे 09 मिनट्स रहेगी।

अन्य शहरों में गणेश चतुर्थी मुहूर्त

  • 11:16 ए एम से 01:44 पी एम तक - पुणे
  • 11:02 ए एम से 01:31 पी एम तक - नई दिल्ली
  • 10:51 ए एम से 01:18 पी एम तक - चेन्नई
  • 11:08 ए एम से 01:36 पी एम तक - जयपुर
  • 10:58 ए एम से 01:25 पी एम तक - हैदराबाद
  • 11:03 ए एम से 01:31 पी एम तक - गुरुग्राम
  • 11:04 ए एम से 01:33 पी एम तक - चण्डीगढ़
  • 10:18 ए एम से 12:46 पी एम तक - कोलकाता
  • 11:20 ए एम से 01:48 पी एम तक - मुम्बई
  • 11:02 ए एम से 01:28 पी एम तक - बेंगलूरु
  • 11:21 ए एम से 01:49 पी एम तक - अहमदाबाद
  • 11:02 ए एम से 01:30 पी एम तक - नोएडा

इस दिन के अन्य शुभ मुहूर्त

  • इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 12 मिनट से प्रातः 04 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।
  • प्रातः सन्ध्या मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 35 मिनट से सुबह 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।
  • अभिजित मुहूर्त पूर्वाह्न 11 बजकर 31 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।
  • विजय मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से 02 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।
  • गोधूलि मुहूर्त सायंकाल 06 बजकर 06 मिनट से 06 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।
  • सायाह्न सन्ध्या काल सायंकाल 06 बजकर 06 मिनट से रात्रि 07 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
  • अमृत काल रात्रि 09 बजकर 18 मिनट से 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
  • निशिता मुहूर्त रात्रि 11 बजकर 31 मिनट से रात्रि 12 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।

विशेष योग

  • सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 05 बजकर 44 मिनट से अगले दिन प्रातः 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगा।
  • रवि योग भी इसी अवधि में रहेगा।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश स्थापना के लिए मध्याह्न काल सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि इसी समय भगवान गणेश का जन्म हुआ था।

गणेश चतुर्थी क्या है?

गणेश चतुर्थी भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला अत्यंत पवित्र और लोकप्रिय हिंदू पर्व है। इसे विनायक चतुर्थी या गणेशोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान गणेश की भक्ति, श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, ज्ञान, सफलता और शुभता के देवता कहा जाता है। वे विघ्नहर्ता हैं अर्थात जीवन के सभी विघ्नों और बाधाओं को दूर करने वाले देवता। इसलिए किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है।

गणेश चतुर्थी पर भक्त मिट्टी की प्रतिमा को अपने घर या सार्वजनिक पंडालों में स्थापित करते हैं। प्रतिमा स्थापना के बाद दस दिनों तक पूजा-अर्चना, मंत्र जाप, भजन-कीर्तन, आरती और प्रसाद वितरण किया जाता है। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी का विसर्जन किया जाता है।

गणेश चतुर्थी का महत्व

गणेश चतुर्थी का महत्व धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सभी दृष्टियों से अत्यंत विशेष माना जाता है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता कहा गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक गणेश चतुर्थी का व्रत और पूजा करता है, उसके जीवन से बाधाएं दूर होती हैं और सफलता प्राप्त होती है।

यह पर्व घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है। विद्यार्थी, व्यापारी, कलाकार, लेखक और साधक विशेष रूप से इस दिन भगवान गणेश की पूजा करते हैं क्योंकि गणपति जी बुद्धि और विवेक के देवता हैं। गणेश चतुर्थी सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। सार्वजनिक गणेशोत्सव लोगों को एक साथ जोड़ता है और समाज में भाईचारे, सहयोग और एकता की भावना को मजबूत करता है।

इसके अलावा यह पर्व पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है। आजकल इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे प्रकृति की रक्षा का संदेश मिलता है।

गणेश चतुर्थी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक रूप से गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार माता पार्वती ने अपने उबटन से भगवान गणेश की रचना की थी और उन्हें द्वारपाल नियुक्त किया था। बाद में भगवान शिव ने उन्हें गणों का स्वामी बनाया और प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया।

भगवान गणेश ज्ञान, विवेक और शुभता के प्रतीक हैं। इसलिए उनकी पूजा करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। आध्यात्मिक दृष्टि से गणेश चतुर्थी हमें यह सिखाती है कि जीवन में सफलता पाने के लिए धैर्य, विवेक, विनम्रता और एकाग्रता अत्यंत आवश्यक हैं। भगवान गणेश का विशाल मस्तक हमें बड़ा सोचने की प्रेरणा देता है। उनके बड़े कान हमें दूसरों की बात ध्यानपूर्वक सुनने का संदेश देते हैं। छोटी आंखें एकाग्रता का प्रतीक हैं और लंबी सूंड विवेक और अनुकूलन क्षमता को दर्शाती है।

इस प्रकार गणेश चतुर्थी केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक उत्सव भी है।

गणेश चतुर्थी से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं

  • गणेश चतुर्थी से कई धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
  • सबसे प्रमुख परंपरा गणेश प्रतिमा की स्थापना और विसर्जन की है।
  • भक्त गणेश जी को अपने घर लाकर उनकी सेवा करते हैं और उन्हें परिवार का सदस्य मानते हैं।
  • मान्यता है कि गणेश जी इन दस दिनों में अपने भक्तों के घर स्वयं विराजमान रहते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
  • भगवान गणेश को मोदक अत्यंत प्रिय है, इसलिए उन्हें मोदक और लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। दूर्वा भी गणेश जी को अत्यंत प्रिय मानी जाती है।
  • एक अन्य मान्यता चंद्र दर्शन से जुड़ी हुई है। धार्मिक कथा के अनुसार गणेश जी ने चंद्रदेव को श्राप दिया था कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन जो व्यक्ति चंद्र दर्शन करेगा, उसे झूठे कलंक का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस दिन चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा है।
  • गणेश विसर्जन के दौरान “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारे लगाए जाते हैं। यह भक्तों के प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

गणेश चतुर्थी की तैयारी कैसे की जाती है?

  • गणेश चतुर्थी की तैयारी कई दिन पहले से प्रारंभ हो जाती है। भक्त अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और पूजा स्थल को सजाते हैं।
  • सबसे पहले घर में एक स्वच्छ और शांत स्थान चुना जाता है जहाँ गणेश जी की स्थापना की जाएगी। उस स्थान को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है।
  • इसके बाद गणेश प्रतिमा का चयन किया जाता है। आजकल लोग मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
  • मंडप को फूलों, आम के पत्तों, रंगोली, दीपक और रोशनी से सजाया जाता है। भक्त पूजा सामग्री जैसे दूर्वा, मोदक, नारियल, फल, रोली, अक्षत, पंचामृत, धूप, दीपक और कलश आदि पहले से एकत्र कर लेते हैं।
  • कुछ लोग गणेश चतुर्थी के अवसर पर व्रत का संकल्प भी लेते हैं। कई घरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी भी की जाती है।

गणेश चतुर्थी कैसे मनाई जाती है?

  • गणेश चतुर्थी का यह महापर्व पूरे भारत देश में बहुत ही श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई जाती है।
  • इस दिन शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की प्रतिमा को घर या पंडाल में स्थापित किया जाता है। स्थापना के बाद गणपति जी का आवाहन कर विधिपूर्वक पूजा की जाती है। भक्त भगवान गणेश को फूल, दूर्वा, मोदक, लड्डू, नारियल और फल अर्पित करते हैं। पूरे दिन भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और आरती की जाती है।
  • सार्वजनिक गणेशोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य, संगीत, धार्मिक प्रवचन और समाजसेवा से जुड़े आयोजन भी होते हैं। गणेशोत्सव के अंतिम दिन भक्त गणेश जी का विसर्जन करते हैं। विसर्जन के समय भक्त भावुक होकर गणपति बप्पा से अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं।

गणेश चतुर्थी के दिन किए जाने वाले कार्य

गणेश चतुर्थी के दिन कुछ विशेष शुभ कार्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

  • भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करें।
  • गणपति अथर्वशीर्ष और गणेश मंत्रों का जाप करें।
  • मोदक और दूर्वा अर्पित करें।
  • जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करें।
  • घर में भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करें।
  • परिवार के साथ आरती करें।
  • विद्यार्थी अपनी पुस्तकों और अध्ययन सामग्री की पूजा करें।
  • व्यापारी अपने व्यापार स्थल पर गणेश पूजन करें।
  • इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा का उपयोग करें।
  • गणेश विसर्जन के समय पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखें।

गणेश चतुर्थी का संदेश

गणेश चतुर्थी का पर्व हमें जीवन में सकारात्मकता, भक्ति, अनुशासन और एकता का संदेश देता है। भगवान गणेश हमें सिखाते हैं कि बुद्धि और विवेक के साथ जीवन की हर बाधा को पार किया जा सकता है। यह पर्व हमें परिवार, समाज और संस्कृति से जोड़ता है।

गणेशोत्सव हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपने जीवन से अहंकार, क्रोध और नकारात्मकता को दूर करें और ज्ञान, प्रेम, सहयोग तथा विनम्रता को अपनाएं। इसके साथ ही यह पर्व प्रकृति संरक्षण का भी संदेश देता है। इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं और प्राकृतिक सजावट के माध्यम से हम पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं।

गणेश चतुर्थी हमें यह याद दिलाती है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा में नहीं, बल्कि अच्छे कर्मों, सेवा, दया और सदाचार में भी होती है। हमारी कामना है कि भगवान गणेश की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे। गणपति बप्पा आपके जीवन से सभी विघ्नों को दूर करें और सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य तथा सफलता का आशीर्वाद प्रदान करें।

गणपति बप्पा मोरया!

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Published by Sri Mandir·September 13, 2026

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