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रोहिणी व्रत

इस व्रत से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करें और पूजा की तैयारी करें

रोहिणी व्रत के बारे में

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रोहिणी 27 नक्षत्रों में से एक नक्षत्र है। इस नक्षत्र में किया जाने वाला व्रत रोहिणी व्रत कहलाता है। जैन धर्म के अनुयायी, विशेषकर महिलाएं रोहिणी व्रत का पालन करती हैं।

रोहिणी व्रत 2025

  • रोहिणी व्रत 2025
  • 2025 में कब है रोहिणी व्रत?
  • रोहिणी व्रत का शुभ मुहूर्त व तिथि
  • क्यों रखते हैं रोहिणी व्रत?
  • रोहिणी व्रत का महत्व
  • रोहिणी व्रत पर किसकी पूजा करें?
  • रोहिणी व्रत पूजा की पूजन सामग्री
  • रोहिणी व्रत की पूजा कैसे करें?
  • रोहिणी व्रत रखने के क्या लाभ
  • इन बातों का रखें ध्यान, सफल होगा व्रत

क्या है और कब है रोहिणी व्रत

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रोहिणी 27 नक्षत्रों में से एक नक्षत्र है। इस नक्षत्र में किया जाने वाला व्रत रोहिणी व्रत कहलाता है। जैन धर्म के अनुयायी, विशेषकर महिलाएं रोहिणी व्रत का पालन करती हैं। हर माह रोहिणी नक्षत्र की निश्चित अवधि होती है। इस हिसाब से प्रत्येक वर्ष में बारह रोहिणी व्रत होते हैं। जैन समुदाय द्वारा इसे एक त्योहार के रूप में मनाया जाता है।

इस माह में रोहिणी व्रत 05 दिसम्बर 2025, शुक्रवार के दिन किया जाएगा

रोहिणी व्रत का शुभ मुहूर्त व तिथि

पञ्चाङ्ग

  • तिथि : प्रतिपदा - 12:55 ए एम, दिसम्बर 06 तक
  • नक्षत्र : रोहिणी - 11:46 ए एम तक

इस दिन के अन्य शुभ मुहूर्त

मुहूर्त

समय

ब्रह्म मुहूर्त  

04:43 ए एम से 05:36 ए एम

प्रातः सन्ध्या 

05:09 ए एम से 06:29 ए एम
 

अभिजित मुहूर्त 

11:27 ए एम से 12:10 पी एम

विजय मुहूर्त 

01:35 पी एम से 02:18 पी एम

गोधूलि मुहूर्त 

05:05 पी एम से 05:32 पी एम

सायाह्न सन्ध्या 

05:08 पी एम से 06:28 पी एम

अमृत काल 

08:59 ए एम से 10:23 ए एम

निशिता मुहूर्त 

11:22 पी एम से 12:16 ए एम, दिसम्बर 06

जब उदियातिथि अर्थात सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र प्रबल होता है, उस दिन रोहिणी व्रत किया जाता है। इस दिन जैन समुदाय के लोग भगवान वासुपूज्य की पूजा करते हैं। सामान्यतः इस व्रत को 3, 5 या 7 वर्षों तक करने के बाद ही उद्यापन किया जा सकता है, लेकिन रोहिणी व्रत की उचित अवधि पाँच वर्ष, पाँच महीने है।

क्यों रखते हैं रोहिणी व्रत?

रोहिणी व्रत जैन धर्म और हिंदू परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है। विशेष रूप से जैन समुदाय के लोग इसे श्रद्धा से करते हैं। यह व्रत चंद्रमा की रोहिणी नक्षत्र में आता है और इसे धार्मिक अनुशासन, आत्म-शुद्धि और कर्म-निर्मूलन के उद्देश्य से रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से आत्मा को शुद्धि, कष्टों से मुक्ति, और मोक्ष मार्ग की प्राप्ति होती है।

रोहिणी व्रत पर किसकी पूजा करें?

  • इस व्रत में मुख्य रूप से भगवान वासुपूज्य (जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर) की पूजा की जाती है।
  • हिंदू परंपरा में, कुछ स्थानों पर इस दिन भगवान विष्णु और चंद्रमा की भी पूजा की जाती है, क्योंकि यह व्रत रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा से जुड़ा होता है।

रोहिणी व्रत पूजा की पूजन सामग्री

  • स्वच्छ आसन व पूजा स्थल
  • भगवान वासुपूज्य की मूर्ति या चित्र
  • धूप, दीप, कपूर
  • पुष्प (विशेषकर सफेद फूल)
  • फल और सूखा मेवा
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • चावल, रोली, अक्षत
  • जल से भरा कलश
  • व्रत कथा की पुस्तक (रोहिणी व्रत कथा)

रोहिणी व्रत की पूजा विधि

  • इस दिन महिलाएं प्रात: जल्दी उठकर स्नान करके पवित्र होती हैं।
  • इसके बाद सूर्य भगवान को जल चढ़ाकर पूजा का संकल्प लिया जाता है।
  • पूजा के लिए वासुपूज्य भगवान की पंचरत्न, ताम्र या स्वर्ण प्रतिमा की स्थापना की जाती है।
  • उनकी आराधना करके वस्त्र, धूप-दीप, फूल, फल और नैवेद्य का भोग लगाया जाता है।
  • इसके बाद मंदिरों में जाकर या किसी भी जरूरतमंद को दान देने का भी बहुत महत्व माना जाता है।
  • इस दिन व्रत नहीं करने वाले व्‍यक्ति भी तामसिक भोजन को त्‍यागकर सात्विक भोजन करते हैं।
  • रोहिणी व्रत पर पूरे दिन व्रत के नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की जाती है।
  • सूर्यास्‍त से पहले फलाहार करके रोहिणी व्रत का पारण किया जाता है।

रोहिणी व्रत का महत्व

  • यह व्रत महिलाओं के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। जैन परिवारों की महिलाओं के लिए तो इस व्रत का पालन करना अति आवश्यक होता है, लेकिन पुरुष भी अपनी इच्छानुसार ये व्रत कर सकते हैं।
  • इस दिन महिलाएं पूरे विधि-विधान से पूजा करती हैं और अपने पति की लम्बी आयु एवं स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करती हैं।
  • जैन मान्यताओं के अनुसार इस दिन जो भी महिला या पुरुष पूरी श्रद्धा से इस व्रत का पालन करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • जैन धर्म में ह्रदय और आत्मा की स्वच्छता को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।

इसी तरह इस व्रत का पालन करने वाले स्त्री और पुरुष अपनी आत्मा के विकारों को दूर करते हैं, और इस संसार की मोह माया से दूर रहते हैं। ऐसे ही व्रत, त्यौहार व अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए 'श्री मंदिर' के साथ। आपका दिन मंगलमय हो।

रोहिणी व्रत रखने के क्या लाभ

  • मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति
  • पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति
  • जीवन के संकटों, रोगों और कष्टों का नाश
  • पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का संचार
  • पुण्य अर्जन व मोक्ष मार्ग की प्राप्ति
  • स्त्रियों द्वारा यह व्रत करने से संतान सुख और वैवाहिक सुख में वृद्धि होती है

इन बातों का रखें ध्यान, सफल होगा व्रत

  • व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • मन, वचन और कर्म से पवित्र रहें; क्रोध, छल और आलस्य से बचें।
  • व्रत कथा का श्रवण या पाठ अवश्य करें।
  • संभव हो तो उपवास करें, अन्यथा फलाहार लें।
  • पूजा के उपरांत आरती करें और दिनभर भगवान के नाम का जप करें।
  • व्रत का पारण अगले दिन उचित समय पर करें।

जैन धर्म में यह व्रत 5 वर्ष और 5 महीने तक प्रति रोहिणी नक्षत्र पर किया जाता है। व्रत का समापन "उद्यापन" विधि से किया जाता है, जिसमें विशेष पूजा और दान होता है

हम आशा करते हैं आपको यह जानकारी पसंद आई होगी, इसी तरह की अन्य जानकारियों के लिए जुड़े रहिए श्री मंदिर के साथ।

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Published by Sri Mandir·December 2, 2025

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