रक्षाबंधन कब है?
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रक्षाबंधन कब है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि रक्षाबंधन कब है और इसका क्या महत्व है? इस लेख में जानिए भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक इस पर्व की तिथि, पूजा विधि, पौराणिक कथा और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों की पूरी जानकारी।

रक्षाबंधन के बारे में

रक्षाबंधन हिंदू धर्म का एक पवित्र और लोकप्रिय त्योहार है, जो भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर उसकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती है। भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है। यह पर्व पारिवारिक एकता, प्रेम और रिश्तों की मजबूती का संदेश देता है तथा पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

रक्षा बंधन 2026

भक्तों नमस्कार, श्री मंदिर पर आपका स्वागत है। भारतवर्ष में मनाए जाने वाले प्रमुख पर्वों में से एक रक्षा बंधन प्रेम, विश्वास, कर्तव्य और सुरक्षा के भावों से जुड़ा हुआ अत्यंत पावन त्योहार है। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भावनाओं का ऐसा बंधन है जो रिश्तों को मजबूत करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। आइए, इस लेख में रक्षा बंधन 2026 से जुड़ी संपूर्ण जानकारी को विस्तार से समझते हैं।

रक्षा बंधन का पर्व हर वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधती है और उसकी दीर्घायु, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती है। भाई भी अपनी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है और उसे उपहार देकर अपने स्नेह को व्यक्त करता है। यह पर्व केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि एक ऐसी परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है और समाज में प्रेम, सहयोग और सुरक्षा की भावना को मजबूत करती है।

रक्षा बंधन 2026 कब है?

  • साल 2026 में श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर रक्षा बन्धन 28 अगस्त, 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
  • रक्षा बन्धन अनुष्ठान का शुभ समय प्रातः 05 बजकर 37 मिनट से सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
  • जिसकी कुल अवधि 04 घण्टे 11 मिनट्स तक रहेगी।
  • रक्षा बन्धन के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो रही है।
  • इस दिन पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ 27 अगस्त 2026 गुरुवार को सुबह 09 बजकर 08 मिनट से शुरू होगी।
  • और पूर्णिमा तिथि का समापन 28 अगस्त 2026 को सुबह 09 बजकर 48 मिनट पर होगा।

रक्षा बंधन के दिन के अन्य शुभ मुहूर्त

  • इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 07 मिनट से प्रातः 04 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
  • प्रातः सन्ध्या मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 29 मिनट से सुबह 05 बजकर 37 मिनट तक होगा।
  • इस दिन अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 34 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
  • विजय मुहूर्त दिन में 02 बजकर 06 मिनट से 02 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 21 मिनट से 06 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।
  • सायाह्न सन्ध्या काल शाम 06 बजकर 21 मिनट से 07 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन अमृत काल रात्रि 07 बजकर 44 मिनट से 09 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।
  • निशिता मुहूर्त रात्रि 11 बजकर 37 मिनट से 12 बजकर 22 मिनट (अगले दिन 29 अगस्त) तक रहेगा।

रक्षा बंधन क्या है?

रक्षा बंधन हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और भावनात्मक पर्व है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और संरक्षण के वचन का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र अर्थात राखी बांधती है और उसकी लंबी आयु, सुख-समृद्धि तथा जीवन में सफलता की कामना करती है। बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है और उसे उपहार देकर अपने स्नेह को व्यक्त करता है।

‘रक्षा बंधन’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है - ‘रक्षा’ यानी सुरक्षा और ‘बंधन’ यानी बंधन या डोर। यह डोर केवल एक साधारण धागा नहीं होती, बल्कि यह भाई-बहन के रिश्ते की गहराई, स्नेह और जिम्मेदारी का प्रतीक होती है। समय के साथ यह पर्व केवल पारिवारिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी विश्वास का भी प्रतीक बन गया है।

क्यों मनाते हैं रक्षा बंधन?

रक्षा बंधन मनाने के पीछे कई धार्मिक, पौराणिक और सामाजिक कारण हैं। इसका मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को सुदृढ़ करना और उसमें प्रेम, विश्वास तथा कर्तव्य की भावना को बनाए रखना है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पर्व से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया था और बदले में भगवान विष्णु को वापस पाने का वरदान प्राप्त किया था। इसी प्रकार महाभारत में द्रौपदी द्वारा श्रीकृष्ण की उंगली से बहते रक्त को रोकने के लिए अपने वस्त्र का टुकड़ा बांधने की कथा भी इस पर्व से जुड़ी मानी जाती है, जिसके प्रतिफल स्वरूप श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का वचन निभाया।

इसके अलावा ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह पर्व महत्वपूर्ण है। प्राचीन काल में युद्ध पर जाते समय स्त्रियां वीरों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती थीं, जिससे वे सुरक्षित लौटें और विजय प्राप्त करें। इस प्रकार रक्षा बंधन केवल पारिवारिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की भावना को भी दर्शाता है।

रक्षा बंधन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

रक्षा बंधन का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा और व्यापक है। हिंदू धर्म में रक्षासूत्र को एक पवित्र धागा माना जाता है, जिसे शुभ मुहूर्त में बांधने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा होती है, जिससे व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति और सुरक्षा प्राप्त होती है।

सांस्कृतिक दृष्टि से यह पर्व भारतीय समाज की पारिवारिक संरचना और मूल्यों को सुदृढ़ करता है। यह भाई-बहन के रिश्ते को सम्मान देने के साथ-साथ परिवार में प्रेम, सहयोग और एकता को बढ़ावा देता है। यह पर्व नई पीढ़ी को संस्कारों, परंपराओं और रिश्तों के महत्व से परिचित कराता है।

इसके अलावा, रक्षा बंधन सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। कई स्थानों पर लोग अपने मित्रों, गुरुओं, सैनिकों और समाज के रक्षकों को भी राखी बांधते हैं, जिससे यह संदेश मिलता है कि सुरक्षा और सम्मान का यह बंधन किसी एक रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज को जोड़ने का कार्य करता है।

रक्षा बंधन से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं

रक्षा बंधन से जुड़ी अनेक परंपराएं और मान्यताएं हैं, जो इस पर्व को और अधिक विशेष बनाती हैं। सबसे प्रमुख परंपरा है राखी बांधने की, जिसमें बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर, आरती उतारकर और मिठाई खिलाकर राखी बांधती है। इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसकी रक्षा करने का वचन लेता है।

एक महत्वपूर्ण मान्यता यह है कि राखी हमेशा शुभ मुहूर्त में ही बांधनी चाहिए। विशेष रूप से भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है, इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद ही यह अनुष्ठान किया जाता है।

कई स्थानों पर राखी केवल भाई को ही नहीं, बल्कि भगवान, गुरु, मित्र या किसी सम्माननीय व्यक्ति को भी बांधी जाती है। इससे यह संदेश मिलता है कि यह पर्व केवल रक्त संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक संबंधों को भी मजबूत करता है।

इसके अतिरिक्त, कुछ परिवारों में इस दिन व्रत रखने की परंपरा भी होती है। बहनें राखी बांधने से पहले व्रत रखती हैं और पूजा के बाद ही भोजन ग्रहण करती हैं। साथ ही इस दिन सात्विक भोजन करने और घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की मान्यता भी प्रचलित है। इस प्रकार, रक्षा बंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, कर्तव्य और संस्कारों का अद्भुत संगम है, जो हर वर्ष परिवार और समाज को एक मजबूत बंधन में जोड़ने का कार्य करता है।

रक्षा बंधन कैसे मनाया जाता है?

इस दिन बहनें सुबह स्नान कर पूजा की तैयारी करती हैं। फिर शुभ मुहूर्त में भाई को तिलक लगाकर, आरती उतारकर राखी बांधती हैं। इसके बाद मिठाई खिलाकर भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा का वचन देता है।

रक्षा बंधन की तैयारी कैसे की जाती है?

रक्षा बंधन की तैयारी कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती है, क्योंकि यह केवल एक दिन का पर्व नहीं बल्कि भावनाओं और उत्साह का प्रतीक है। सबसे पहले बहनें अपने भाइयों के लिए सुंदर राखियां चुनती हैं। आजकल बाजार में विभिन्न प्रकार की राखियां उपलब्ध होती हैं, जैसे पारंपरिक, डिजाइनर, रुद्राक्ष या कस्टमाइज्ड राखियां, जिन्हें बहनें अपने भाई की पसंद के अनुसार खरीदती हैं।

इसके साथ ही भाई के लिए उपहारों का चयन भी किया जाता है। परिवार के सदस्य घर की साफ-सफाई और सजावट में जुट जाते हैं, ताकि पर्व के दिन घर का वातावरण शुभ और उत्सवमय बना रहे। कई घरों में रंगोली बनाई जाती है और फूलों से सजावट की जाती है। मिठाइयों और विशेष पकवानों की तैयारी भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। घर में तरह-तरह की मिठाइयां, जैसे लड्डू, बर्फी, पेड़ा आदि बनाए जाते हैं या बाजार से लाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त पूजा की थाली को विशेष रूप से सजाया जाता है, जिसमें राखी, रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और फूल आदि शामिल होते हैं।

इस प्रकार रक्षा बंधन की तैयारी केवल बाहरी व्यवस्था तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें भावनात्मक तैयारी भी शामिल होती है, जहां भाई-बहन एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम और स्नेह को व्यक्त करने के लिए उत्सुक रहते हैं।

रक्षा बंधन की पूजा कैसे करें?

रक्षा बंधन की पूजा विधि अत्यंत सरल होते हुए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन की पूजा को श्रद्धा और विधिपूर्वक करने से इसका शुभ फल कई गुना बढ़ जाता है।

सबसे पहले प्रातः काल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थान को साफ करके भगवान की पूजा करें। कई लोग इस दिन भगवान श्रीगणेश, श्रीकृष्ण या अपने इष्ट देव का पूजन करते हैं।

पूजा की थाली तैयार करें, जिसमें निम्नलिखित वस्तुएं अवश्य रखें:

  • रक्षा सूत्र (राखी)
  • कुमकुम या रोली
  • अक्षत (चावल)
  • दीपक (घी का)
  • मिठाई
  • पुष्प

(कुछ स्थानों पर नारियल भी रखा जाता है)

  • अब शुभ मुहूर्त में भाई को उचित स्थान पर बैठाएं। इसके बाद निम्न विधि से पूजा करें:
  • सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम से तिलक लगाएं और उस पर अक्षत चढ़ाएं।
  • फिर दीपक जलाकर भाई की आरती उतारें।
  • इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें।
  • राखी बांधते समय इस पवित्र मंत्र का उच्चारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है:

“ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

इस मंत्र का अर्थ है कि जिस प्रकार यह रक्षा सूत्र महान और शक्तिशाली राजा बलि को बांधने में समर्थ था, उसी प्रकार मैं इसे तुम्हारी रक्षा के लिए बांधती हूं। हे रक्षासूत्र, तुम अडिग रहो और अपने कर्तव्य से कभी विचलित न हो।

रक्षाबंधन पर भाई से पहले बांधे इन 5 देवताओं को राखी

हमारे सनातन धर्म में हर शुभ कार्य की शुरुआत भगवान के स्मरण से की जाती है। रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व पर भी देवी-देवताओं की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि यदि भाई को राखी बांधने से पहले भगवान को राखी अर्पित की जाए, तो जीवन में सुरक्षा, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं उन 5 प्रमुख देवताओं के बारे में, जिन्हें रक्षाबंधन के दिन राखी बांधना अत्यंत शुभ माना जाता है।

1. गणपति जी

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभारंभ के देवता कहा जाता है। हर मांगलिक कार्य में सबसे पहले उनका पूजन किया जाता है। रक्षाबंधन के दिन गणपति जी को लाल रंग की राखी अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। इससे जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

2. भगवान शिव

भगवान भोलेनाथ को देवों के देव कहा जाता है। उनकी कृपा से जीवन के सभी कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं। रक्षाबंधन के दिन शिव जी को राखी बांधकर उनसे सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। यह आस्था व्यक्ति के जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता लाती है।

3. भगवान हनुमान

हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों के सभी संकटों का नाश करते हैं। रक्षाबंधन के दिन उन्हें राखी बांधने से भय, नकारात्मकता और बाधाओं से रक्षा होती है। साथ ही बुद्धि, बल और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।

4. भगवान श्रीकृष्ण (कान्हा जी)

रक्षाबंधन का पर्व भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा से भी जुड़ा हुआ है। जब श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त बह रहा था, तब द्रौपदी ने अपने वस्त्र का टुकड़ा बांधकर उनकी सहायता की थी। इसके बदले श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया। इसी कारण रक्षाबंधन पर श्रीकृष्ण को राखी बांधने की परंपरा प्रचलित है।

5. भगवान विष्णु

भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनकर्ता माना जाता है। वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें हर संकट से बचाते हैं। रक्षाबंधन के दिन विष्णु जी को राखी अर्पित करने से जीवन में स्थिरता, समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस प्रकार, इन देवताओं को राखी बांधकर हम अपने जीवन में दिव्य संरक्षण और आशीर्वाद की कामना करते हैं।

रक्षा बंधन के दिन किए जाने वाले पवित्र कार्य

  • स्नान और पूजा
  • भगवान का स्मरण
  • दान और सेवा
  • परिवार के साथ समय बिताना

रक्षा बंधन पर किए जाने वाले शुभ कार्य

  • राखी बांधना
  • व्रत रखना
  • मंदिर जाना
  • जरूरतमंदों की सहायता करना

रक्षा बंधन का ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष के अनुसार, रक्षा बंधन के दिन रक्षा सूत्र बांधने से ग्रह दोष शांत होते हैं और व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा मिलती है। शुभ मुहूर्त में राखी बांधना अत्यंत लाभकारी माना गया है।

हिंदू धर्म में रक्षा बंधन का महत्व

  • हिंदू धर्म में यह पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य और प्रेम का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि रिश्तों की रक्षा करना भी एक धार्मिक कर्तव्य है।
  • रक्षा बंधन का पर्व केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिश्तों को सहेजने, उन्हें मजबूत बनाने और जीवन में प्रेम और सुरक्षा की भावना को स्थापित करने का पर्व है। इस पावन अवसर पर आप भी अपने प्रियजनों के साथ इस त्योहार को हर्षोल्लास के साथ मनाएं और अपने रिश्तों को और भी मजबूत बनाएं। रक्षाबंधन से जुड़ी ऐसी ही महत्वपूर्ण और विस्तृत जानकारी के लिए श्री मंदिर पर उपलब्ध अन्य लेख अवश्य पढ़ें।
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Published by Sri Mandir·June 11, 2026

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