
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
बुधवार को परंपरागत रूप से बुध ग्रह और गणेश जी से जोड़ा जाता है। इस दिन कई लोग गणेश पूजन करके अपने कामों में स्पष्टता और विवेक बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। 28 अक्टूबर को कृष्ण पक्ष की तृतीया और कृत्तिका नक्षत्र का संयोग है। यदि आप दिन की शुरुआत पूजा या किसी धार्मिक संकल्प से करना चाहते हैं, तो पहले तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त का समय जान लें।
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28 अक्टूबर 2026, बुधवार को कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रात 1:08 AM तक रहेगी। आज कृतिका नक्षत्र दोपहर 1:27 PM तक और व्यतिपात योग सुबह 7:19 AM तक रहेगा। दिन के पंचांग में एक खास बात यह है कि सुबह योग समाप्त होने के बाद भी नक्षत्र और करण की स्थिति अलग-अलग समय पर बदलती रहेगी। शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक है, जबकि शाम 6:57 PM पर चंद्रोदय होगा। दिन की धार्मिक गतिविधियों या किसी जरूरी काम का समय तय करने से पहले इन समयों को एक साथ देखना उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष तृतीया (1:08 AM तक) |
वार | बुधवार |
पूर्णिमांत मास | कार्तिक |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 06:04 |
सूर्यास्त | 17:21 |
चंद्रोदय | 18:57 |
चंद्रास्त | 08:15 |
नक्षत्र | कृतिका (1:27 PM तक) |
योग | व्यतिपात (7:19 AM तक) |
करण | वणिज (2:37 PM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:20 AM से 12:04 PM |
राहुकाल | 11:42 AM से 1:07 PM |
गुलिक काल | 10:18 AM से 11:42 AM |
यमघण्टकाल | 7:29 AM से 8:53 AM |
दिशाशूल | उत्तर |
सूर्य राशि | तुला |
चंद्र राशि | वृष |
चंद्र निवास | दक्षिण |
आज कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रात 1:08 AM तक रहेगी। इस समय के बाद चतुर्थी तिथि आरंभ होगी। इसलिए यदि किसी धार्मिक आयोजन या तिथि-विशेष से जुड़ी पूजा की योजना बना रहे हैं, तो केवल दिन का नाम देखने के बजाय तिथि की समाप्ति का समय भी ध्यान में रखें।
आज बुधवार है, जिसे पारंपरिक रूप से बुध ग्रह से जोड़ा जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में बुध का संबंध बुद्धि, संवाद, गणना और व्यापार से माना जाता है। इस दृष्टि से दिन की शुरुआत अपने जरूरी कामों की सूची बनाने, बातचीत से जुड़े कार्य व्यवस्थित करने और अधूरे कामों की समीक्षा करने के साथ की जा सकती है।
आज पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार कार्तिक मास और अमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास है। दोनों प्रणालियों में चंद्र मास की गणना अलग तरीके से की जाती है, इसलिए एक ही दिन के लिए मास के दो नाम मिल सकते हैं। व्रत और त्योहारों की तिथि देखते समय यह अंतर समझना उपयोगी रहता है।
वर्तमान में विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) चल रहे हैं। ये संवत पारंपरिक भारतीय काल गणना का हिस्सा हैं। पंचांग में इनका उल्लेख तिथि, मास और वार के साथ समय की पहचान को स्पष्ट करता है।
आज शरद ऋतु और दक्षिणायन है। शरद ऋतु वर्षा के बाद आने वाला मौसम है, जिसमें दिन और रात के तापमान में अंतर महसूस हो सकता है। सुबह और शाम के समय बाहर निकलते हुए स्थानीय मौसम के अनुसार तैयारी रखना व्यावहारिक रहेगा।
दक्षिणायन सूर्य की वार्षिक गति से संबंधित पारंपरिक कालखंड है। पंचांग में ऋतु और अयन का उल्लेख केवल मौसम की जानकारी के लिए नहीं, बल्कि भारतीय समय-गणना की व्यापक व्यवस्था को समझने के लिए भी किया जाता है।
आज सूर्योदय 6:04 AM पर और सूर्यास्त 5:21 PM पर होगा। दिन के उजाले से जुड़े कामों, बाहर जाने की योजना और शाम की दिनचर्या को इन समयों के आधार पर व्यवस्थित किया जा सकता है।
चंद्रोदय 6:57 PM पर होगा, जबकि चंद्रास्त 8:15 AM पर दर्ज है। यानी चंद्रमा शाम को उदित होगा और अगले दिन सुबह अस्त होगा। आज चंद्रमा वृष राशि में रहेगा और पंचांग के अनुसार उसका निवास दक्षिण दिशा में माना गया है। चंद्रमा की स्थिति को तिथि और नक्षत्र के साथ देखकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय गणना समझी जाती है।
आज कृतिका नक्षत्र दोपहर 1:27 PM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र परिवर्तन होगा। इस कारण दिन के पहले हिस्से और दोपहर के बाद की पंचांग स्थिति में अंतर रहेगा। किसी नक्षत्र-आधारित धार्मिक कार्य के लिए समय चुनते समय इसकी समाप्ति का ध्यान रखना चाहिए।
व्यतिपात योग सुबह 7:19 AM तक रहेगा। इसके बाद योग बदल जाएगा। यह परिवर्तन दिन के शुरुआती समय में ही हो जाता है, इसलिए सुबह की गतिविधियों के लिए पंचांग देखते समय योग की अवधि विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है।
आज वणिज करण 2:37 PM तक रहेगा। तिथि रात 1:08 AM पर समाप्त हो चुकी होगी, जबकि करण दोपहर बाद तक प्रभावी रहेगा। तिथि, नक्षत्र, योग और करण की अवधि अलग-अलग होने के कारण पंचांग में हर समय का महत्व एक जैसा नहीं होता। किसी विशेष धार्मिक कार्य के लिए केवल एक विवरण पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित समयों को साथ देखना बेहतर है।
आज का शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक है। पारंपरिक पंचांग के अनुसार इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए देखा जा सकता है। हालांकि किसी विशेष पूजा, संस्कार या आयोजन के लिए स्थानीय परंपरा और उस कार्य से जुड़े अलग नियम भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 11:42 AM से 1:07 PM
गुलिक काल: 10:18 AM से 11:42 AM
यमघण्टकाल: 7:29 AM से 8:53 AM
शुभ मुहूर्त और राहुकाल के समय में कुछ अवधि का अंतराल कम है, इसलिए किसी काम का समय तय करते हुए दोनों को ध्यान से देखना उपयोगी होगा। ये समय पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं; जरूरी कामों में व्यावहारिक परिस्थितियों और उपलब्ध समय को भी महत्व दें।
आज दिशाशूल उत्तर दिशा में है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यात्रा की योजना बनाते समय दिशाशूल पर ध्यान दिया जाता है। यदि उत्तर दिशा में जाना हो, तो अपनी परंपरा के अनुसार आवश्यक उपायों पर विचार कर सकते हैं। यात्रा का निर्णय लेते समय सुरक्षा, सुविधा और वास्तविक परिस्थितियों को प्राथमिकता देना भी जरूरी है।
राशिगत स्थिति के अनुसार आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा वृष राशि में रहेगा। चंद्र निवास दक्षिण दिशा बताया गया है। सूर्य और चंद्रमा की राशियों के साथ तिथि, नक्षत्र तथा योग को मिलाकर पंचांग की ज्योतिषीय स्थिति देखी जाती है।
आज के पंचांग में सुबह योग का परिवर्तन, दोपहर में नक्षत्र का बदलाव और दोपहर बाद करण की समाप्ति अलग-अलग समय पर होगी। इसलिए किसी धार्मिक अनुष्ठान या तिथि-आधारित कार्य की योजना बनाते समय केवल शुभ मुहूर्त याद रखना पर्याप्त नहीं है; कार्य के प्रकार के अनुसार संबंधित पंचांग विवरण देखना भी जरूरी है। दिन के समय का सही आकलन करने के लिए तिथि, नक्षत्र और शुभ-अशुभ अवधि को एक साथ समझें। इससे 28 अक्टूबर की दिनचर्या को अधिक व्यवस्थित तरीके से तय किया जा सकता है।
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