
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
हिंदू पंचांग में चंद्रमा की कलाओं के आधार पर तिथियों और पक्षों की गणना की जाती है। पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष शुरू होता है, जिसमें चंद्रमा का प्रकाश धीरे-धीरे कम होता दिखाई देता है। 26 अक्टूबर को सुबह पूर्णिमा समाप्त होकर प्रतिपदा आरंभ होगी। यह बदलाव चंद्र कैलेंडर को समझने का एक अच्छा अवसर है।
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26 अक्टूबर 2026, सोमवार को पूर्णिमा तिथि सुबह 9:42 AM तक रहेगी। आज चंद्रमा शाम 5:17 PM पर उदित होगा और अश्विनी नक्षत्र शाम 5:42 PM तक रहेगा। पूर्णिमा के दिन पूजा, व्रत और चंद्र दर्शन से जुड़ी योजनाएं बनाने वालों के लिए तिथि समाप्त होने का समय खास तौर पर ध्यान देने योग्य है। दिन के बाकी पंचांग विवरण भी यह समझने में मदद करेंगे कि अलग-अलग धार्मिक गतिविधियों के लिए कौन-से समय महत्वपूर्ण हैं।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष पूर्णिमा (9:42 AM तक) |
वार | सोमवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 06:03 |
सूर्यास्त | 17:22 |
चंद्रोदय | 17:17 |
चंद्रास्त | 05:59 |
नक्षत्र | अश्विनी (5:42 PM तक) |
योग | वज्र (2:17 PM तक) |
करण | बव (9:39 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:21 AM से 12:05 PM |
राहुकाल | 7:28 AM से 8:53 AM |
गुलिक काल | 1:08 PM से 2:33 PM |
यमघण्टकाल | 10:18 AM से 11:43 AM |
दिशाशूल | पूर्व |
सूर्य राशि | तुला |
चंद्र राशि | मेष |
चंद्र निवास | पूर्व |
आज शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सुबह 9:42 AM तक रहेगी। पूर्णिमा को हिंदू परंपरा में चंद्रमा के पूर्ण रूप से दिखाई देने वाली तिथि के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन कई लोग पूजा-पाठ, दान और व्रत जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। किसी खास व्रत या अनुष्ठान का पालन करना हो, तो उसकी विधि और मान्य समय की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करना उचित रहेगा।
आज सोमवार है, जिसे भगवान शिव की उपासना से जोड़ा जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार शिव पूजन, मंत्र-जप या प्रार्थना के लिए समय निकाल सकते हैं। पूर्णिमा और सोमवार के दिन धार्मिक गतिविधियों की योजना बनाते समय तिथि समाप्त होने के समय को भी ध्यान में रखें।
आज अमांत और पूर्णिमांत, दोनों पद्धतियों में अश्विन मास है। हिंदू पंचांग में मास की गणना के लिए इन दोनों प्रणालियों का उपयोग किया जाता है। पर्व और व्रत की तिथि समझने के लिए मास के साथ तिथि और संबंधित धार्मिक नियमों को देखना भी जरूरी होता है।
वर्ष गणना के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) है। ये दोनों पारंपरिक संवत पंचांग में वर्ष की पहचान बताते हैं और धार्मिक कैलेंडर में तिथियों को व्यवस्थित रूप से समझने में मदद करते हैं।
आज शरद ऋतु चल रही है और पंचांग के अनुसार दक्षिणायन है। ऋतु साल के मौसमी चरण की जानकारी देती है, जबकि अयन सूर्य की वार्षिक गति से संबंधित पारंपरिक गणना का हिस्सा है। सुबह और शाम के समय बाहर निकलने या यात्रा की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखना व्यावहारिक रहेगा।
आज सूर्योदय 6:03 AM पर और सूर्यास्त 5:22 PM पर होगा। दिन की शुरुआत, सुबह की पूजा और शाम की गतिविधियों के लिए इन समयों को ध्यान में रखा जा सकता है।
पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की स्थिति भी खास ध्यान आकर्षित करती है। आज चंद्रोदय 5:17 PM पर होगा और चन्द्रास्त अगले दिन 5:59 AM पर होगा। यानी चंद्रमा सूर्यास्त के आसपास उदित होगा और रात भर आकाश में रहने के बाद अगली सुबह अस्त होगा। पंचांग के अनुसार चंद्रमा मेष राशि में रहेगा और चंद्र निवास पूर्व दिशा में बताया गया है।
आज अश्विनी नक्षत्र 5:42 PM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र परिवर्तन होगा। दिन के अधिकांश हिस्से में अश्विनी नक्षत्र प्रभावी रहेगा, इसलिए किसी विशेष समय के लिए मुहूर्त देखते समय नक्षत्र की अवधि पर ध्यान देना उपयोगी है।
वज्र योग 2:17 PM तक रहेगा। योग की स्थिति पंचांग में तिथि और नक्षत्र के साथ दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय गणना का हिस्सा है। आज दोपहर के बाद योग बदल जाएगा, जबकि अश्विनी नक्षत्र शाम तक बना रहेगा।
आज बव करण 9:39 AM तक है, जबकि पूर्णिमा तिथि 9:42 AM तक रहेगी। यानी करण तिथि समाप्त होने से तीन मिनट पहले बदल जाएगा। सुबह के इस छोटे समयांतर को ध्यान में रखना उन लोगों के लिए उपयोगी है जो किसी धार्मिक कार्य का समय तिथि और करण के आधार पर निर्धारित करते हैं।
आज का शुभ मुहूर्त 11:21 AM से 12:05 PM तक है। पंचांग के अनुसार इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए देखा जा सकता है। यदि किसी पूजा, संस्कार या विशेष आयोजन के लिए मुहूर्त चाहिए, तो उससे जुड़े नियमों और स्थानीय पंचांग के समय का मिलान करना बेहतर होगा।
आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 7:28 AM से 8:53 AM
गुलिक काल: 1:08 PM से 2:33 PM
यमघण्टकाल: 10:18 AM से 11:43 AM
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए अपनी सुविधा और परिस्थिति के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। पारंपरिक पंचांग में यात्रा की दिशा पर विचार करते समय इसका उल्लेख किया जाता है। यात्रा की योजना बनाते हुए दूरी, यातायात और मौसम जैसी व्यावहारिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखें।
आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा मेष राशि में रहेगा। पंचांग में चंद्र निवास भी पूर्व दिशा बताया गया है। सूर्य और चंद्रमा की राशियों के साथ तिथि, नक्षत्र और योग को देखकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति समझी जाती है।
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