
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
शरद पूर्णिमा की रात को भारतीय परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृतमयी होती हैं और इसी भाव से लोग खीर बनाकर चांदनी में रखते हैं। 25 अक्टूबर को पूर्णिमा तिथि दिन में शुरू होगी, इसलिए पूजा और चंद्र दर्शन की तैयारी करने वाले श्रद्धालु तिथि का समय जरूर देखें। आज के पंचांग के साथ शरद पूर्णिमा की परंपराओं को जानकर इस रात को खास बनाएं।
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रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 11:57 AM तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू होगी। आज का दिन इसलिए भी ध्यान देने योग्य है कि तिथि बदलने के बाद भी रेवती नक्षत्र शाम तक बना रहेगा। पूजा-पाठ, व्रत या पूर्णिमा से जुड़े धार्मिक कार्यों की तैयारी कर रहे हैं, तो तिथि परिवर्तन के समय को समझना दिन की योजना बनाने में मदद कर सकता है।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष चतुर्दशी (11:57 AM तक) |
वार | रविवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 06:02 |
सूर्यास्त | 17:23 |
चंद्रोदय | 16:37 |
चंद्रास्त | 04:55 |
नक्षत्र | रेवती (7:18 PM तक) |
योग | हर्षण (5:22 PM तक) |
करण | वणिज (11:52 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:21 AM से 12:05 PM |
राहुकाल | 3:58 PM से 5:23 PM |
गुलिक काल | 2:33 PM से 3:58 PM |
यमघण्टकाल | 11:43 AM से 1:08 PM |
दिशाशूल | पश्चिम |
सूर्य राशि | तुला |
चंद्र राशि | मीन |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11:57 AM तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि आरंभ होगी। चतुर्दशी शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि है, जिसके बाद पूर्णिमा आती है। इसलिए आज व्रत या पूजा की तिथि निर्धारित करते समय यह देखना जरूरी है कि संबंधित धार्मिक परंपरा में किस तिथि और किस समय को मान्यता दी जाती है।
आज रविवार है, जिसे परंपरागत रूप से सूर्यदेव की उपासना से जोड़ा जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार सूर्य को अर्घ्य दे सकते हैं या प्रार्थना के लिए समय निकाल सकते हैं। किसी विशेष व्रत या अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग के निर्देश देखना उचित रहेगा।
आज अमांत और पूर्णिमांत, दोनों पद्धतियों में अश्विन मास चल रहा है। हिंदू पंचांग में इन दोनों प्रणालियों के जरिए चंद्र मास की गणना की जाती है। आज दोनों में मास का नाम समान है, जबकि तिथि सुबह के समय बदलने वाली है।
वर्ष गणना के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) है। ये संवत पंचांग में पारंपरिक वर्ष की पहचान बताते हैं। पर्वों और व्रतों की जानकारी पढ़ते समय संवत के साथ तिथि और मास का उल्लेख भी उपयोगी होता है।
आज शरद ऋतु है और पंचांग के अनुसार दक्षिणायन चल रहा है। ऋतु की जानकारी साल के मौसमी चरण को बताती है, जबकि अयन सूर्य की वार्षिक गति से संबंधित पारंपरिक गणना का हिस्सा है। दैनिक कामकाज या यात्रा की योजना बनाते समय मौसम और स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखना भी जरूरी है।
आज सूर्योदय 6:02 AM पर और सूर्यास्त 5:23 PM पर होगा। सुबह के समय पूजा-पाठ या दिन की शुरुआत से जुड़े कामों की योजना सूर्योदय को ध्यान में रखकर बनाई जा सकती है। शाम की धार्मिक गतिविधियों के लिए सूर्यास्त का समय देखना उपयोगी रहेगा।
आज चंद्रोदय 4:37 PM पर होगा और चन्द्रास्त अगले दिन 4:55 AM पर होगा। चंद्रमा शाम को उदित होकर रात के बाद अस्त होगा। पंचांग में चंद्रमा की राशि मीन बताई गई है और चंद्र निवास उत्तर दिशा में है।
आज रेवती नक्षत्र 7:18 PM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र में बदलाव होगा। रेवती दिन के अधिकांश हिस्से में प्रभावी रहेगा, इसलिए किसी खास समय के लिए मुहूर्त देखते समय नक्षत्र की समाप्ति का समय भी ध्यान में रखा जा सकता है।
हर्षण योग 5:22 PM तक रहेगा। पंचांग में योग की स्थिति तिथि और नक्षत्र के साथ दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय गणना का हिस्सा है। आज शाम से पहले योग बदल जाएगा, जबकि रेवती नक्षत्र कुछ समय और बना रहेगा।
आज वणिज करण 11:52 AM तक है और चतुर्दशी तिथि 11:57 AM तक रहेगी। यानी करण तिथि समाप्त होने से पांच मिनट पहले बदल जाएगा। सुबह के अंतिम हिस्से में होने वाला यह परिवर्तन उन लोगों के लिए ध्यान देने योग्य है, जो धार्मिक कार्यों का समय करण और तिथि दोनों के अनुसार तय करते हैं।
आज शुभ मुहूर्त 11:21 AM से 12:05 PM तक है। इस अवधि पर पारंपरिक पंचांग के अनुसार शुभ कार्यों के समय निर्धारण में विचार किया जा सकता है। हालांकि, यदि किसी विशेष पूजा, संस्कार या व्रत के लिए मुहूर्त चाहिए, तो उससे संबंधित नियमों की पुष्टि करना बेहतर होगा।
आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 3:58 PM से 5:23 PM
गुलिक काल: 2:33 PM से 3:58 PM
यमघण्टकाल: 11:43 AM से 1:08 PM
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। दैनिक जिम्मेदारियों या जरूरी कामों के लिए अपनी परिस्थिति के अनुसार निर्णय लें और मुहूर्त संबंधी जरूरत होने पर स्थानीय पंचांग देखें।
आज दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। परंपरागत पंचांग में यात्रा की दिशा पर विचार करते समय इसे देखा जाता है। यात्रा की वास्तविक योजना बनाते हुए दूरी, यातायात और मौसम जैसी व्यावहारिक बातों को भी ध्यान में रखें।
आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा मीन राशि में रहेगा। चंद्र निवास उत्तर दिशा में बताया गया है। सूर्य और चंद्रमा की राशियों के साथ तिथि, नक्षत्र और योग को देखकर पंचांग की ज्योतिषीय जानकारी समझी जाती है।
आज सुबह चतुर्दशी समाप्त होने के बाद पूर्णिमा शुरू होगी। इसलिए दिन के धार्मिक महत्व को समझने के लिए केवल रविवार या अश्विन मास की जानकारी पर्याप्त नहीं है; संबंधित पूजा या व्रत के लिए मान्य तिथि और समय भी देखना चाहिए। खासकर पूर्णिमा से जुड़े अनुष्ठानों की तैयारी कर रहे हों, तो स्थानीय पंचांग में दिए गए पूर्णिमा तिथि और पूजा के समय की पुष्टि करके ही योजना बनाएं।
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