
क्या आप जानना चाहते हैं कि 21 अगस्त 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से कैसा रहेगा? यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
आज का पंचांग दिन की शुरुआत और आगे के महत्वपूर्ण समय की ज्योतिषीय स्थिति बताता है। आज की तिथि, नक्षत्र और योग के अनुसार पूजा-पाठ, यात्रा, शुभ शुरुआत या अन्य जरूरी कार्यों के लिए दिन कैसा रहेगा, यह जानना चाहते हैं तो आगे पढ़ें आज का पूरा पंचांग।
21 अगस्त 2026 को पंचांग में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि रहेगी और शुक्रवार का दिन है। आज चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा, जबकि अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव दोपहर से पहले तक रहेगा। दिन की शुरुआत से लेकर रात तक तिथि, नक्षत्र और शुभ-अशुभ समय में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखकर जरूरी कार्यों की योजना बनाई जा सकती है।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष नवमी (11:37 PM तक) |
वार | शुक्रवार |
पूर्णिमांत मास | श्रावण |
अमांत मास | श्रावण |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | वर्षा |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:35 |
सूर्यास्त | 18:29 |
चंद्रोदय | 13:35 |
चंद्रास्त | 00:01 |
नक्षत्र | अनुराधा (11:54 AM तक) |
योग | वैधृ (5:19 AM तक) |
करण | बालव (10:26 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:37 AM से 12:27 PM |
राहुकाल | 10:25 AM से 12:02 PM |
गुलिक काल | 7:12 AM से 8:48 AM |
यमघण्टकाल | 3:15 PM से 4:52 PM |
दिशाशूल | पश्चिम |
सूर्य राशि | सिंह |
चंद्र राशि | वृश्चिक |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि रात 11:37 PM तक रहेगी। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा के बढ़ते चरण के कारण नवमी तिथि को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। आज के दिन पूजा-पाठ, साधना और नियमित धार्मिक कार्यों के साथ अपने अधूरे कामों को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
वहीं शुक्रवार होने के कारण दिन का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में शुक्रवार को सुख-सुविधा, सौंदर्य, कला, संबंधों और भौतिक जीवन से जुड़े विषयों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए आज व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों में संतुलन बनाए रखना उपयोगी हो सकता है।
आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों गणनाओं में श्रावण मास चल रहा है। सावन का महीना धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है और इस दौरान शिव आराधना, व्रत तथा धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व बढ़ जाता है।
कालगणना के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। पंचांग में इन संवतों का उल्लेख भारतीय समय-गणना की परंपरा को दर्शाता है।
अगस्त के इस समय में वर्षा ऋतु का प्रभाव बना हुआ है। बारिश और बादलों के बीच दिनचर्या प्रभावित हो सकती है, इसलिए यात्रा या बाहरी गतिविधियों के लिए समय का ध्यान रखना बेहतर रहेगा।
सूर्य की स्थिति के अनुसार अभी दक्षिणायन चल रहा है। पंचांग में अयन सूर्य की वार्षिक गति से जुड़े कालखंड को दर्शाता है और धार्मिक गणना में इसका अपना महत्व है।
आज सूर्योदय 5:35 AM पर होगा और सूर्यास्त 6:29 PM पर होगा। दिन के इन समयों को ध्यान में रखकर पूजा, यात्रा और अन्य जरूरी गतिविधियों की योजना बनाई जा सकती है।
आज चंद्रोदय 1:35 PM पर और चंद्रास्त 12:01 AM पर होगा। चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा तथा पंचांग के अनुसार उसका निवास उत्तर दिशा में माना गया है। चंद्रमा की यह स्थिति दिन के ज्योतिषीय विवरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आज अनुराधा नक्षत्र सुबह 11:54 AM तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा में अनुराधा नक्षत्र को अनुशासन, मित्रता, समर्पण और लक्ष्य के प्रति निरंतरता से जोड़ा जाता है। इसके बाद अगले नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा।
वैधृ योग सुबह 5:19 AM तक रहेगा। इसके बाद दिन में अगला योग प्रभावी होगा। वहीं बालव करण सुबह 10:26 AM तक रहेगा। पंचांग में तिथि के साथ योग और करण का समय भी किसी दिन की शुभता-अशुभता को समझने में उपयोग किया जाता है।
आज का शुभ मुहूर्त 11:37 AM से 12:27 PM तक रहेगा। महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए इस समय को ध्यान में रखा जा सकता है।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 10:25 AM से 12:02 PM
गुलिक काल: 7:12 AM से 8:48 AM
यमघण्टकाल: 3:15 PM से 4:52 PM
इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से पारंपरिक रूप से बचने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से किसी जरूरी काम के लिए समय तय करते समय शुभ मुहूर्त और राहुकाल के बीच के अंतर को देखना उपयोगी रहेगा।
आज दिशाशूल पश्चिम दिशा में माना गया है। यदि पश्चिम दिशा की यात्रा करनी हो तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल का विचार किया जा सकता है।
आज सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित हैं। सूर्य की राशि जहां आत्मविश्वास और नेतृत्व से जुड़े ज्योतिषीय संकेतों को दर्शाती है, वहीं चंद्रमा की राशि मन और भावनात्मक स्थिति से जुड़े संकेतों को समझने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
21 अगस्त का पंचांग धार्मिक कार्यों के साथ-साथ दिन की व्यावहारिक योजना बनाने में भी उपयोगी हो सकता है। खासकर आज तिथि रात तक बनी रहने वाली है, इसलिए पूरे दिन के कामों को केवल सुबह के समय तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। शुभ समय, चंद्रमा की स्थिति और राहुकाल को साथ देखकर दिन का कार्यक्रम तय करना अधिक सुविधाजनक रहेगा।
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