
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
आज का पंचांग की दृष्टि से कई महत्वपूर्ण जानकारियां लेकर आया है। दिन की तिथि और नक्षत्र के साथ बनने वाले योग आज के समय और शुभ कार्यों को प्रभावित करते हैं। यदि आज कोई खास धार्मिक या मांगलिक कार्य है, तो आइए जानते हैं दिन का पंचांग आपके लिए कैसा रहेगा।
20 अगस्त 2026 का पंचांग दिन की शुरुआत से लेकर रात तक बदलती ज्योतिषीय स्थितियों की जानकारी देता है। आज शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है और गुरुवार का दिन है। तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति के साथ आज के शुभ-अशुभ समय भी अलग-अलग कार्यों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। आइए जानते हैं आज के पंचांग में कौन-कौन से विशेष समय और ज्योतिषीय संकेत मौजूद हैं।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष अष्टमी (9:20 PM तक) |
वार | गुरुवार |
पूर्णिमांत मास | श्रावण |
अमांत मास | श्रावण |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | वर्षा |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:34 |
सूर्यास्त | 18:30 |
चंद्रोदय | 12:39 |
चंद्रास्त | 23:15 |
नक्षत्र | विशाखा (9:09 AM तक) |
योग | इंद्र (4:26 AM तक) |
करण | विष्टि (8:17 AM तक) |
अभिजीत मुहूर्त | 11:37 AM से 12:27 PM |
राहुकाल | 1:39 PM से 3:16 PM |
गुलिक काल | 8:48 AM से 10:25 AM |
यमघण्टकाल | 5:34 AM से 7:11 AM |
दिशाशूल | दक्षिण |
सूर्य राशि | सिंह |
चंद्र राशि | वृश्चिक |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि रात 9:20 PM तक रहेगी। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा के बढ़ते चरण के कारण अष्टमी तिथि को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। आज के दिन पूजा-पाठ, आध्यात्मिक चिंतन और नियमित धार्मिक कार्यों के लिए समय निकाला जा सकता है।
आज गुरुवार है, जिसे गुरु ग्रह से संबंधित माना जाता है। परंपरागत रूप से यह दिन ज्ञान, शिक्षा, धर्म, गुरुजनों के सम्मान और आध्यात्मिक गतिविधियों से जोड़ा जाता है। इसलिए आज किसी महत्वपूर्ण सीख, अध्ययन या धार्मिक कार्य पर ध्यान देना उपयोगी माना जा सकता है।
आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों गणनाओं के अनुसार श्रावण मास चल रहा है। श्रावण हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व वाला महीना माना जाता है और इस दौरान भगवान शिव की पूजा तथा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहता है।
कालगणना के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। ये संवत भारतीय पंचांग और धार्मिक तिथियों की गणना में महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं।
अगस्त के इस समय वर्षा ऋतु का प्रभाव बना हुआ है। बारिश और बादलों के कारण दिनचर्या में बदलाव हो सकता है, इसलिए यात्रा या बाहरी गतिविधियों की योजना बनाते समय मौसम को भी ध्यान में रखना उचित रहेगा।
सूर्य की स्थिति के अनुसार वर्तमान में दक्षिणायन चल रहा है। पंचांग की दृष्टि से अयन सूर्य की वार्षिक गति से संबंधित महत्वपूर्ण कालखंड होता है और धार्मिक गणना में इसका विशेष स्थान है।
आज सूर्योदय 5:34 AM पर होगा और सूर्यास्त 6:30 PM पर। दिन के महत्वपूर्ण कार्यों का समय तय करते समय इन दोनों समयों के साथ शुभ मुहूर्त को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
आज चंद्रोदय 12:39 PM पर होगा और चंद्रास्त 11:15 PM पर। चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा और उसका चंद्र निवास उत्तर बताया गया है। दिन के आगे बढ़ने के साथ चंद्रमा की स्थिति धार्मिक और ज्योतिषीय गणना में महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
आज विशाखा नक्षत्र सुबह 9:09 AM तक रहेगा। विशाखा नक्षत्र को लक्ष्य, प्रयास और किसी उद्देश्य की ओर आगे बढ़ने से संबंधित माना जाता है। इसके बाद नक्षत्र परिवर्तन होगा, इसलिए दिन के अलग-अलग समय की पंचांग स्थिति में अंतर दिखाई देगा।
इंद्र योग सुबह 4:26 AM तक रहेगा। इसके बाद अगले योग का प्रभाव शुरू होगा। वहीं विष्टि करण सुबह 8:17 AM तक रहेगा। पंचांग में करण को तिथि के आधे भाग के रूप में देखा जाता है और दैनिक कार्यों के मुहूर्त निर्धारण में इसका उपयोग किया जाता है।
आज का अभिजीत मुहूर्त 11:37 AM से 12:27 PM तक रहेगा। महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दिन में इस समय को विशेष रूप से ध्यान में रखा जा सकता है।
आज के प्रमुख अशुभ काल इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 1:39 PM से 3:16 PM
गुलिक काल: 8:48 AM से 10:25 AM
यमघण्टकाल: 5:34 AM से 7:11 AM
मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए और अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना बेहतर माना जाता है। जरूरी कार्यों की योजना बनाते समय शुभ मुहूर्त और इन कालों के बीच अंतर रखना उपयोगी रहेगा।
आज दिशाशूल दक्षिण दिशा में है। दक्षिण दिशा की यात्रा का कार्यक्रम हो तो पारंपरिक पंचांग मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल का ध्यान रखना उचित माना जाता है।
आज सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित हैं। सूर्य की सिंह राशि में स्थिति और चंद्रमा का वृश्चिक में गोचर आज की पंचांग गणना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दिन की योजना बनाते समय केवल शुभ समय देखना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि तिथि, वार, दिशाशूल और राहुकाल जैसी कई बातों को साथ देखकर निर्णय लेना अधिक व्यवस्थित तरीका हो सकता है। आज के पंचांग की यही जानकारी आपको पूजा, यात्रा और जरूरी कार्यों के लिए समय चुनने में मदद कर सकती है।
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