
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
पंचांग की दृष्टि से 10 सितंबर 2026 का दिन सामान्य होते हुए भी कई शुभ अवसरों के लिए महत्वपूर्ण रह सकता है। आज की तिथि और नक्षत्र के अनुसार धार्मिक कार्यों, यात्रा या नई शुरुआत के लिए उचित समय देखा जा सकता है। दिनभर की पंचांग स्थिति पर नजर डालें तो आज की खासियत स्पष्ट होती है।
17 सितंबर 2026 को शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी और गुरुवार का दिन है। आज के पंचांग में सुबह के समय तिथि और करण में बदलाव देखने को मिलेगा, जबकि दोपहर के बाद योग की स्थिति बदलेगी और शाम तक अनुराधा नक्षत्र प्रभावी रहेगा। पूजा-पाठ, यात्रा, दैनिक कार्यों या किसी महत्वपूर्ण काम की योजना बनाने से पहले शुभ-अशुभ समय और दिन की अन्य पंचांग गणनाओं पर नजर रखना उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष षष्ठी (10:49 AM तक) |
वार | गुरुवार |
पूर्णिमांत मास | भाद्रपद |
अमांत मास | भाद्रपद |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | वर्षा |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:45 |
सूर्यास्त | 18:01 |
चंद्रोदय | 11:24 |
चंद्रास्त | 21:54 |
नक्षत्र | अनुराधा (7:55 PM तक) |
योग | विष्कुम्भ (12:49 PM तक) |
करण | तैतिल (10:49 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:29 AM से 12:17 PM |
राहुकाल | 1:25 PM से 2:57 PM |
गुलिक काल | 8:49 AM से 10:21 AM |
यमघण्टकाल | 5:45 AM से 7:17 AM |
दिशाशूल | दक्षिण |
सूर्य राशि | सिंह |
चंद्र राशि | वृश्चिक |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 10:49 AM तक रहेगी। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा के बढ़ते क्रम के कारण इस समय को आगे बढ़ने और कार्यों में निरंतरता रखने की दृष्टि से देखा जाता है। षष्ठी तिथि के दौरान नियमित जिम्मेदारियों को व्यवस्थित तरीके से पूरा करना और जरूरी कामों को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।
आज गुरुवार है, जिसका संबंध परंपरागत रूप से गुरु ग्रह और देवगुरु बृहस्पति से माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन ज्ञान, अध्ययन, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए दिन की शुरुआत किसी अच्छे विचार, अध्ययन या धार्मिक कार्य से करना सकारात्मक माना जा सकता है।
आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों गणनाओं के अनुसार भाद्रपद मास चल रहा है। दोनों पंचांग पद्धतियों में आज मास का नाम समान है, इसलिए मास निर्धारण में अलग-अलग नाम देखने की स्थिति नहीं बनेगी।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। पंचांग में संवत की जानकारी तिथि और काल की पारंपरिक गणना को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। धार्मिक अनुष्ठानों और व्रत संबंधी तिथियों को देखते समय इन गणनाओं का उल्लेख किया जाता है।
सितंबर के इस समय वर्षा ऋतु का प्रभाव पंचांग में दर्ज है। मौसम में बदलाव के बीच दिन की गतिविधियों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम और यात्रा की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना व्यावहारिक रहेगा।
अयन की दृष्टि से दक्षिणायन चल रहा है। भारतीय परंपरा में दक्षिणायन को सूर्य की दक्षिण दिशा की ओर गति से जुड़ी अवधि के रूप में देखा जाता है। धार्मिक दृष्टि से इस समय संयम, साधना और आत्मचिंतन जैसी गतिविधियों को महत्व दिया जाता है।
आज सूर्योदय 5:45 AM पर होगा और सूर्यास्त 6:01 PM पर होगा। इस समय के आधार पर दिन की शुरुआत और शाम की गतिविधियों को व्यवस्थित किया जा सकता है। पूजा-पाठ या दैनिक दिनचर्या तय करते समय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय को ध्यान में रखना उपयोगी रहता है।
आज चंद्रोदय 11:24 AM पर तथा चन्द्रास्त 9:54 PM पर होगा। चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा और पंचांग के अनुसार चंद्र निवास उत्तर दिशा में माना गया है। चंद्रमा की यह स्थिति आज की पंचांग गणना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आज अनुराधा नक्षत्र शाम 7:55 PM तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में अनुराधा नक्षत्र को अनुशासन, समर्पण, मित्रता और संबंधों से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए सहयोग से जुड़े कार्यों और जिम्मेदारियों को संतुलित तरीके से संभालने पर ध्यान दिया जा सकता है।
विष्कुम्भ योग 12:49 PM तक रहेगा। पंचांग में योग को दिन की समयगत स्थिति को समझने वाले महत्वपूर्ण अंगों में शामिल किया जाता है। दोपहर के बाद योग बदलने के कारण महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनाते समय समय का ध्यान रखना उपयोगी रहेगा।
आज तैतिल करण 10:49 AM तक रहेगा। इसके बाद करण में परिवर्तन होगा। चूंकि तिथि और करण दोनों लगभग एक ही समय पर बदल रहे हैं, इसलिए सुबह के बाद पंचांग की स्थिति में एक स्पष्ट बदलाव देखने को मिलेगा।
आज शुभ मुहूर्त 11:29 AM से 12:17 PM तक रहेगा। किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए समय निर्धारित करते समय इस अवधि को पंचांग के अनुसार शुभ समय के रूप में देखा जा सकता है।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 1:25 PM से 2:57 PM
गुलिक काल: 8:49 AM से 10:21 AM
यमघण्टकाल: 5:45 AM से 7:17 AM
पारंपरिक पंचांग मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमघण्टकाल में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। आवश्यक कार्य होने पर अपनी परिस्थिति के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। यदि दक्षिण दिशा की यात्रा करनी हो, तो यात्रा से पहले पंचांग की इस गणना को ध्यान में रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है।
आज सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा। चंद्रमा का निवास उत्तर दिशा में माना गया है। सूर्य और चंद्रमा की राशिगत स्थिति पंचांग के दैनिक ज्योतिषीय विवरण का हिस्सा होती है और दिन की अन्य गणनाओं के साथ इसे देखा जाता है।
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