
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जिनका स्वरूप साहस और शांति के संतुलन से जुड़ा है। 13 अक्टूबर को मंगलवार के दिन देवी आराधना का यह क्रम आगे बढ़ेगा। भक्त पूजा, मंत्र-जप या व्रत के जरिए अपनी आस्था व्यक्त कर सकते हैं। दिन की शुरुआत से पहले जान लेते हैं कि आज की तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त पूजा की योजना बनाने में कैसे मदद कर सकते हैं।
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13 अक्टूबर 2026 को शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रहेगी और मंगलवार का दिन है। आज चंद्रमा तुला राशि में रहेगा और विशाखा नक्षत्र देर रात तक प्रभावी रहेगा। सुबह तैतिल करण की अवधि समाप्त होगी, जबकि प्रीति योग रात तक बना रहेगा। दिन की शुरुआत से लेकर शाम तक राहुकाल, गुलिक काल और यमघण्टकाल अलग-अलग समय पर रहेंगे। किसी महत्वपूर्ण काम, यात्रा या धार्मिक गतिविधि की योजना बनाते समय इन समयों के साथ आज की तिथि और नक्षत्र की स्थिति देखना उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष तृतीया (11:29 PM तक) |
वार | मंगलवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:56 |
सूर्यास्त | 17:34 |
चंद्रोदय | 08:15 |
चंद्रास्त | 19:04 |
नक्षत्र | विशाखा (1:44 AM तक) |
योग | प्रीति (8:23 PM तक) |
करण | तैतिल (10:49 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:22 AM से 12:08 PM |
राहुकाल | 2:39 PM से 4:07 PM |
गुलिक काल | 11:45 AM से 1:12 PM |
यमघण्टकाल | 8:50 AM से 10:18 AM |
दिशाशूल | उत्तर |
सूर्य राशि | कन्या |
चंद्र राशि | तुला |
चंद्र निवास | पश्चिम |
आज शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 11:29 PM तक रहेगी। शुक्ल पक्ष की शुरुआती तिथियों में आने वाली तृतीया के दौरान चंद्रमा बढ़ते क्रम में आगे बढ़ रहा होता है। दिन की शुरुआत में जरूरी कामों को क्रम से तय करना और अगले कुछ दिनों की प्राथमिकताओं पर ध्यान देना आज की तिथि के संदर्भ में उपयोगी हो सकता है।
आज मंगलवार है। परंपरागत ज्योतिष में मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है। मंगल को ऊर्जा, साहस और सक्रियता से जोड़ा जाता है। इसलिए आज के दिन अधूरे कामों को पूरा करने और जरूरी जिम्मेदारियों पर सक्रिय रूप से ध्यान देने की दिशा में प्रयास किया जा सकता है।
आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों गणनाओं के अनुसार अश्विन मास चल रहा है। दोनों पद्धतियों में मास का नाम समान होने के कारण आज मास की गणना को एक ही नाम से समझा जा सकता है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। पंचांग में संवत की जानकारी वर्तमान तिथि को पारंपरिक काल गणना के साथ जोड़ने में मदद करती है।
आज शरद ऋतु है। मौसम में बदलाव के इस दौर में सुबह और शाम का वातावरण दिन के अन्य समय से अलग हो सकता है। बाहर निकलने या यात्रा की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम और दिन के समय को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा।
आज दक्षिणायन चल रहा है। अयन पंचांग की काल गणना का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सूर्य की वार्षिक गति से संबंधित अवधि को दर्शाता है। दक्षिणायन को सूर्य की दक्षिण दिशा की ओर गति से जुड़ा काल माना जाता है।
आज सूर्योदय 5:56 AM पर होगा और सूर्यास्त 5:34 PM पर होगा। दिन के उजाले के समय को ध्यान में रखते हुए बाहरी काम और यात्रा से जुड़ी गतिविधियों की योजना पहले से बनाई जा सकती है।
आज चंद्रोदय 8:15 AM पर और चन्द्रास्त 7:04 PM पर होगा। चंद्रमा तुला राशि में स्थित रहेगा और पंचांग के अनुसार चंद्र निवास पश्चिम दिशा में माना गया है। शुक्ल पक्ष की तृतीया के साथ चंद्रमा की यह स्थिति आज की पंचांग गणना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आज विशाखा नक्षत्र देर रात 1:44 AM तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में विशाखा नक्षत्र को लक्ष्य, प्रयास और किसी उद्देश्य की ओर आगे बढ़ने से जोड़ा जाता है। इसलिए आज काम करते समय लक्ष्य को स्पष्ट रखना और जरूरी कार्यों को प्राथमिकता के अनुसार आगे बढ़ाना उपयोगी हो सकता है।
प्रीति योग रात 8:23 PM तक रहेगा। पंचांग में योग दिन की स्थिति को समझने वाले प्रमुख अंगों में शामिल है। इसके बाद योग में परिवर्तन होगा, इसलिए रात के समय पंचांग की गणना अलग हो जाएगी।
आज तैतिल करण सुबह 10:49 AM तक रहेगा। इसके बाद करण बदल जाएगा। सुबह के इस परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए दिन के शुरुआती कामों की समय-सारणी बनाई जा सकती है।
आज का शुभ मुहूर्त 11:22 AM से 12:08 PM तक रहेगा। किसी जरूरी कार्य के लिए समय चुनते समय पंचांग में दी गई इस अवधि को शुभ समय के रूप में देखा जा सकता है।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 2:39 PM से 4:07 PM
गुलिक काल: 11:45 AM से 1:12 PM
यमघण्टकाल: 8:50 AM से 10:18 AM
पारंपरिक पंचांग मान्यताओं में राहुकाल, गुलिक काल और यमघण्टकाल को नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। रोजमर्रा के जरूरी कार्य परिस्थितियों के अनुसार किए जा सकते हैं। किसी खास काम के लिए समय तय करते हुए शुभ मुहूर्त और अन्य समय गणनाओं को साथ में देखना उचित रहेगा।
आज दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। यदि उत्तर दिशा की यात्रा करनी हो तो पंचांग में दी गई इस गणना को ध्यान में रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। यात्रा आवश्यक होने पर व्यावहारिक परिस्थितियों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
आज सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा तुला राशि में रहेगा। सूर्य और चंद्रमा की राशियां अलग हैं, जबकि चंद्र निवास पश्चिम दिशा में माना गया है। तिथि, नक्षत्र और राशिगत स्थिति को साथ में देखने से आज के पंचांग की दैनिक गणना को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
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