
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
नवरात्रि के दूसरे दिन तक कई घरों में पूजा की व्यवस्था नियमित होने लगती है। सुबह देवी को भोग लगाने, आरती करने और दिनभर व्रत के नियम निभाने की तैयारियां चलती रहती हैं। 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है। सोमवार के इस दिन अपने घर की परंपरा के अनुसार पूजा का समय तय करने से पहले जानिए तिथि, नक्षत्र और दिन के प्रमुख मुहूर्त।
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12 अक्टूबर 2026 को शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी और सोमवार का दिन है। शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन चंद्रमा तुला राशि में रहेगा और स्वाति नक्षत्र रात तक प्रभावी रहेगा। सुबह बालव करण समाप्त होने के बाद पंचांग की स्थिति में बदलाव आएगा, जबकि दिन में शुभ मुहूर्त के साथ राहुकाल और अन्य समय भी अलग-अलग पड़ेंगे। आज की दिनचर्या या किसी जरूरी कार्य की योजना बनाते समय इन समय-खंडों को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष द्वितीय (10:14 PM तक) |
वार | सोमवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:56 |
सूर्यास्त | 17:35 |
चंद्रोदय | 07:18 |
चंद्रास्त | 18:24 |
नक्षत्र | स्वाति (11:54 PM तक) |
योग | विष्कुम्भ (8:32 PM तक) |
करण | बालव (9:50 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:22 AM से 12:08 PM |
राहुकाल | 7:23 AM से 8:50 AM |
गुलिक काल | 1:13 PM से 2:40 PM |
यमघण्टकाल | 10:18 AM से 11:45 AM |
दिशाशूल | पूर्व |
सूर्य राशि | कन्या |
चंद्र राशि | तुला |
चंद्र निवास | पश्चिम |
आज शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रात 10:14 PM तक रहेगी। प्रतिपदा के बाद आने वाली द्वितीया शुक्ल पक्ष के शुरुआती चरण का हिस्सा है। इस समय चंद्रमा बढ़ते क्रम में आगे बढ़ रहा होता है, इसलिए आज के दिन को नियमित कामों को गति देने और आने वाले दिनों की प्राथमिकताएं तय करने के संदर्भ में देखा जा सकता है।
आज सोमवार है और पारंपरिक ज्योतिष में इसका संबंध चंद्रमा से माना जाता है। चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति से जुड़ा माना जाता है। इसलिए दिन की शुरुआत जल्दबाजी के बजाय अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करके करना और जरूरी कामों को क्रम से आगे बढ़ाना उपयोगी रहेगा।
आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों गणनाओं के अनुसार अश्विन मास चल रहा है। दोनों पंचांग पद्धतियों में आज मास का नाम समान है, इसलिए मास संबंधी जानकारी में अलग-अलग नाम दिखाई नहीं देंगे।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। पंचांग में इन संवतों का उल्लेख तिथि को पारंपरिक काल गणना के संदर्भ में समझने के लिए किया जाता है।
आज शरद ऋतु का समय है। मौसम के बदलते दौर में सुबह और शाम के तापमान में अंतर हो सकता है। बाहर के काम या यात्रा की योजना बनाते समय दिन के समय और स्थानीय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखना व्यावहारिक रहेगा।
अयन की दृष्टि से आज दक्षिणायन चल रहा है। पंचांग में अयन सूर्य की वार्षिक गति से जुड़ी गणना को दर्शाता है। दक्षिणायन को सूर्य की दक्षिण दिशा की ओर गति वाली अवधि के रूप में पारंपरिक रूप से समझा जाता है।
आज सूर्योदय 5:56 AM पर होगा और सूर्यास्त 5:35 PM पर होगा। दिन की गतिविधियों को तय करते समय सुबह से शाम तक उपलब्ध समय को इन दोनों गणनाओं के आधार पर व्यवस्थित किया जा सकता है।
आज चंद्रोदय 7:18 AM पर और चन्द्रास्त 6:24 PM पर होगा। चंद्रमा आज तुला राशि में रहेगा और पंचांग के अनुसार चंद्र निवास पश्चिम दिशा में माना गया है। शुक्ल पक्ष की शुरुआत में चंद्रमा की बढ़ती स्थिति आज के पंचांग की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
आज स्वाति नक्षत्र रात 11:54 PM तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा में स्वाति को स्वतंत्रता, संतुलन और अपनी दिशा में आगे बढ़ने से जोड़ा जाता है। इसलिए आज अपने कामों को व्यवस्थित रखते हुए जरूरी निर्णयों में स्पष्टता बनाए रखना उपयोगी हो सकता है।
विष्कुम्भ योग रात 8:32 PM तक रहेगा। दिन की पंचांग गणना में योग का अपना महत्व होता है और इसके समाप्त होने के बाद योग में परिवर्तन होगा। किसी खास समय पर कार्य की योजना बनाते हुए तिथि और अन्य पंचांग अंगों को भी साथ में देखना उचित रहेगा।
आज बालव करण सुबह 9:50 AM तक रहेगा। इसके बाद करण में बदलाव होगा। यानी सुबह के समय पंचांग की स्थिति में परिवर्तन देखने को मिलेगा, जिसके बाद दिन के आगे के समय के लिए नई करण गणना प्रभावी रहेगी।
आज शुभ मुहूर्त 11:22 AM से 12:08 PM तक रहेगा। किसी महत्वपूर्ण काम के लिए समय चुनते समय पंचांग में दी गई इस अवधि को शुभ समय के रूप में देखा जा सकता है।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 7:23 AM से 8:50 AM
गुलिक काल: 1:13 PM से 2:40 PM
यमघण्टकाल: 10:18 AM से 11:45 AM
पारंपरिक पंचांग मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि रोजमर्रा के जरूरी कार्य परिस्थितियों के अनुसार किए जा सकते हैं। किसी विशेष काम के लिए समय तय करते समय उपलब्ध शुभ समय के साथ अन्य पंचांग गणनाओं को भी देखना बेहतर रहेगा।
आज दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। यदि पूर्व दिशा की यात्रा करनी हो तो पंचांग की इस गणना को ध्यान में रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। यात्रा जरूरी होने पर व्यावहारिक परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
आज सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा तुला राशि में स्थित रहेगा। सूर्य और चंद्रमा अलग-अलग राशियों में होने के साथ चंद्रमा का निवास पश्चिम दिशा में माना गया है। तिथि, राशि और दिशा की इन जानकारियों को साथ में देखने से आज की दैनिक पंचांग गणना को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
12 अक्टूबर की खास बात यह है कि दिन की पंचांग स्थिति सुबह से रात तक कई चरणों में आगे बढ़ती है। सुबह 9:50 AM पर बालव करण समाप्त होगा। इसके बाद 11:22 AM से 12:08 PM तक शुभ मुहूर्त रहेगा, जबकि 10:18 AM से 11:45 AM के बीच यमघण्टकाल भी रहेगा। इसलिए किसी जरूरी कार्य के लिए समय तय करते हुए इन अवधियों के आपसी अंतर को ध्यान में रखना उपयोगी होगा।
दोपहर के बाद 1:13 PM से 2:40 PM तक गुलिक काल रहेगा और शाम 6:24 PM पर चन्द्रास्त होगा। वहीं रात तक द्वितीया तिथि, स्वाति नक्षत्र और विष्कुम्भ योग की अलग-अलग समाप्ति के समय बने रहेंगे। इस तरह आज के पंचांग को केवल एक समय या एक तिथि से नहीं, बल्कि पूरे दिन के बदलते समय-क्रम के साथ देखना अधिक उपयोगी रहेगा।
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