
यहां तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त का विवरण सरल तरीके से दिया गया है।
गोवर्धन पूजा में मंदिरों की सजावट, अन्नकूट का भोग, गौसेवा और सामूहिक आराधना जैसे कई रूप एक साथ दिखाई देते हैं। इन परंपराओं के पीछे केवल उत्सव नहीं, बल्कि मिल-जुलकर रहने और प्रकृति के संसाधनों का सम्मान करने का भाव भी है। 10 नवंबर को प्रतिपदा तिथि और मंगलवार का संयोग इसी सांस्कृतिक विरासत को समझने और निभाने का अवसर देता है।
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10 नवंबर 2026, मंगलवार का दिन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू हो रहा है। आज सुबह नक्षत्र में बदलाव होगा, जबकि दोपहर के समय तिथि और करण दोनों समाप्त होंगे। दिन की शुरुआत में विशाखा नक्षत्र रहेगा और इसके बाद अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। आज के पंचांग में सुबह से दोपहर तक होने वाले इन परिवर्तनों के साथ शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय भी ध्यान देने योग्य है। धार्मिक कार्यों या दिन की जरूरी योजनाओं के लिए इन समयों को समझना उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष प्रतिपदा (2:01 PM तक) |
वार | मंगलवार |
पूर्णिमांत मास | कार्तिक |
अमांत मास | कार्तिक |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 06:12 |
सूर्यास्त | 17:13 |
चंद्रोदय | 07:03 |
चंद्रास्त | 17:42 |
नक्षत्र | विशाखा (9:20 AM तक) |
योग | शोभन (3:09 AM तक) |
करण | बव (2:02 PM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:21 AM से 12:05 PM |
राहुकाल | 2:28 PM से 3:50 PM |
गुलिक काल | 11:43 AM से 1:05 PM |
यमघण्टकाल | 8:57 AM से 10:20 AM |
दिशाशूल | उत्तर |
सूर्य राशि | तुला |
चंद्र राशि | वृश्चिक |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि दोपहर 2:01 PM तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि आरंभ होगी। शुक्ल पक्ष की शुरुआत चंद्रमा की बढ़ती कलाओं के साथ होती है, इसलिए प्रतिपदा को नए चंद्र पक्ष की पहली तिथि के रूप में देखा जाता है। इस दिन कई लोग अपनी धार्मिक दिनचर्या और आगामी व्रत-पूजा की तैयारी करते हैं।
मंगलवार का दिन परंपरागत रूप से हनुमान जी और मंगल देव की उपासना से जुड़ा है। श्रद्धालु अपनी मान्यता के अनुसार हनुमान चालीसा का पाठ, पूजा या प्रार्थना कर सकते हैं। तिथि परिवर्तन दोपहर में होने के कारण तिथि आधारित धार्मिक कार्यों के लिए समय का ध्यान रखना उपयोगी रहेगा।
आज अमांत और पूर्णिमांत, दोनों पंचांग पद्धतियों के अनुसार कार्तिक मास है। अमांत पद्धति में मास की गणना अमावस्या के आधार पर होती है, जबकि पूर्णिमांत पद्धति में पूर्णिमा को मास का अंतिम दिन माना जाता है। इस तारीख पर दोनों प्रणालियों में कार्तिक मास होने से मास के नाम को लेकर अंतर नहीं है।
वर्तमान में विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) चल रहे हैं। ये पारंपरिक भारतीय काल गणना की दो प्रमुख प्रणालियां हैं। पंचांग में इनका उल्लेख तिथि और मास के साथ वर्ष की पहचान स्पष्ट करता है।
आज पंचांग के अनुसार शरद ऋतु और दक्षिणायन चल रहा है। शरद ऋतु वर्षा के बाद आने वाला मौसम है, जिसमें मौसम और वातावरण में धीरे-धीरे बदलाव महसूस होने लगता है। दक्षिणायन सूर्य की वार्षिक गति से जुड़ी पारंपरिक गणना को दर्शाता है।
नवंबर के इस समय में सुबह और शाम का मौसम दिन की तुलना में ठंडा हो सकता है। दैनिक कामकाज, यात्रा या बाहर की गतिविधियों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा।
आज सूर्योदय 6:12 AM पर और सूर्यास्त 5:13 PM पर होगा। इन समयों से दिन की अवधि और सुबह-शाम की दिनचर्या का अनुमान लगाया जा सकता है। सूर्यास्त के बाद शाम की पूजा या अन्य धार्मिक गतिविधियों की योजना बनाने वालों के लिए यह समय उपयोगी है।
आज चंद्रोदय 7:03 AM पर और चंद्रास्त 5:42 PM पर होगा। पंचांग के अनुसार चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा और उसका निवास उत्तर दिशा में बताया गया है। चंद्रमा की राशि और उसकी स्थिति को तिथि तथा नक्षत्र के साथ देखकर पारंपरिक ज्योतिषीय गणना की जाती है।
आज विशाखा नक्षत्र सुबह 9:20 AM तक रहेगा। इसके बाद अनुराधा नक्षत्र आरंभ होगा। विशाखा नक्षत्र का संबंध पारंपरिक ज्योतिष में लक्ष्य, प्रयास और उपलब्धि से जोड़ा जाता है। सुबह नक्षत्र परिवर्तन होने के कारण किसी नक्षत्र विशेष के आधार पर पूजा या कार्य तय करने वालों को इस समय का ध्यान रखना चाहिए।
शोभन योग रात 3:09 AM तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद अगला योग शुरू होगा। चूंकि यह समय सूर्योदय से पहले का है, इसलिए दिन के अधिकांश समय में शोभन योग प्रभावी नहीं रहेगा।
आज बव करण दोपहर 2:02 PM तक रहेगा। इसके ठीक एक मिनट पहले प्रतिपदा तिथि समाप्त होने वाली है। इसके बाद करण में भी परिवर्तन होगा। तिथि और करण के समय में यह निकटता बताती है कि दोपहर के आसपास पंचांग की दो महत्वपूर्ण स्थितियां लगभग साथ बदलेंगी।
आज का शुभ मुहूर्त सुबह 11:21 AM से दोपहर 12:05 PM तक है। पारंपरिक पंचांग में इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए देखा जाता है। पूजा-पाठ, धार्मिक संकल्प या किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए समय चुनते हुए संबंधित कार्य की परंपरा का भी ध्यान रखना चाहिए।
आज के अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 2:28 PM से 3:50 PM
गुलिक काल: 11:43 AM से 1:05 PM
यमघण्टकाल: 8:57 AM से 10:20 AM
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। आज गुलिक काल शुभ मुहूर्त के समाप्त होने से पहले ही शुरू हो जाएगा और दोपहर बाद राहुकाल रहेगा। इसलिए किसी कार्य का समय तय करते हुए इन अवधियों को अलग-अलग देखना उपयोगी होगा।
आज दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। पारंपरिक मान्यता में मंगलवार के दिन उत्तर दिशा का दिशाशूल माना जाता है। यदि आज उत्तर दिशा की ओर यात्रा करनी हो, तो अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपरा के अनुसार उपाय किए जा सकते हैं। हालांकि यात्रा के दौरान सुरक्षा, सुविधा और जरूरी परिस्थितियों को प्राथमिकता देना चाहिए।
राशिगत स्थिति के अनुसार आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा। चंद्र निवास भी उत्तर दिशा में बताया गया है। सूर्य और चंद्रमा की राशियों के साथ नक्षत्र तथा तिथि को मिलाकर पंचांग की ज्योतिषीय स्थिति समझी जाती है।
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