
क्या आप जानते हैं चंद्रघंटा माता का प्रिय रंग कौन सा है और नवरात्रि पूजा में इसका प्रयोग क्यों किया जाता है? यहाँ पढ़ें पूरी जानकारी सरल शब्दों में।
माँ चंद्रघंटा की पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है। हमारे शास्त्रों और हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार माता का प्रिय रंग सुनहरा और सफेद है। इस दिन भक्त पीले या सुनहरे वस्त्र पहनते हैं और माता को सफेद या सुनहरे फूल अर्पित करते हैं।
माँ चंद्रघंटा, माँ दुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं। उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सजे हुए होते हैं। जो व्यक्ति उनकी भक्ति और पूजा करता है, वह साहसी और पराक्रमी बन जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ चंद्रघंटा की पूजा से भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। पौराणिक कथा के अनुसार, दानवों के आतंक को समाप्त करने के लिए माँ दुर्गा ने चंद्रघंटा का स्वरूप धारण किया।
माँ चंद्रघंटा नवरात्रि के तीसरे दिन पूजी जाती हैं। उनके प्रिय रंगों में मुख्य रूप से सुनहरा और सफेद शामिल हैं। ये रंग केवल सजावट के लिए नहीं, बल्कि उनके आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व को दर्शाते हैं।
माँ चंद्रघंटा नवरात्रि के तीसरे दिन पूजी जाती हैं। नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक पूजा की जाती है, और तीसरे दिन माँ दुर्गा के तीसरे रूप, चंद्रघंटा, की आराधना की जाती है। उनका स्वरूप अत्यंत सुंदर और भव्य है, जिसमें उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र हैं और कंधे पर घंटी जैसी आभूषण की सजावट होती है।
माँ चंद्रघंटा नवरात्रि के तीसरे दिन पूजी जाती हैं। उनके पूजन से भक्त साहस, शक्ति और मानसिक स्थिरता प्राप्त करते हैं।
माँ चंद्रघंटा की पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है। वे माँ दुर्गा का तीसरा रूप हैं और उनका रूप अत्यंत भव्य, शक्तिशाली और दिव्य माना जाता है। उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र होते हैं और उनके कंधे पर घंटी जैसी आभूषण सजावट देखी जाती है।
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