
जानें इसे पढ़ने के चमत्कारिक लाभ और सही जाप का तरीका। जीवन में लक्ष्य साधने और इच्छाओं की पूर्ति का सरल उपाय।
संकल्प मंत्र पूजा या अनुष्ठान की शुरुआत में लिया जाने वाला पवित्र निश्चय होता है। इसके माध्यम से कार्य का उद्देश्य, समय और स्थान स्पष्ट किया जाता है, जिससे मन में एकाग्रता आती है और भक्ति भाव मजबूत होता है। संकल्प लेने से पूजा सार्थक मानी जाती है और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
संकल्प मंत्र पूजा, अनुष्ठान या किसी धार्मिक कार्य की शुरुआत में लिया जाने वाला एक महत्वपूर्ण प्रतिज्ञा है, जिसमें व्यक्ति अपने नाम, परिवार, स्थान और समय सहित कार्य का उद्देश्य स्पष्ट करता है। इसका मुख्य उद्देश्य भगवान या देवता को सूचित करना होता है कि यह कार्य कब, कहाँ और किसलिए किया जा रहा है, ताकि वे उसे स्वीकार कर आशीर्वाद प्रदान करें।
संकल्प मंत्र के माध्यम से साधक अपने किए जाने वाले कार्य के प्रति एक गंभीर प्रतिबद्धता जताता है, जिससे उसमें दृढ़ता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो कार्य की सफलता की संभावना बढ़ाता है। इसके साथ ही, संकल्प लेने से साधक को अपने कर्तव्य और जवाबदेही का एहसास होता है, जिससे वह कार्य को पूर्णता के साथ पूरा करने के लिए प्रेरित होता है।
संकल्प मंत्र में वर्तमान समय, तिथि, वार, नक्षत्र, मास, वर्ष और अयन का उल्लेख होता है, साथ ही व्यक्ति की पहचान जैसे नाम, गोत्र और परिवार का विवरण भी शामिल होता है। इसके अलावा, पूजा या अनुष्ठान के पीछे का उद्देश्य जैसे कल्याण, प्रीति या किसी विशेष लाभ की कामना और भगवान का सम्मान तथा आशीर्वाद की याचना भी संकल्प मंत्र का अभिन्न हिस्सा होती है। इस प्रकार, संकल्प मंत्र न केवल धार्मिक विधि का एक अनिवार्य अंग है, बल्कि यह कार्य की सफलता और उसके शुभ फल के लिए एक आध्यात्मिक आधार भी प्रदान करता है।
ऊँ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः, श्रीमद् भगवतो महापुरुषस्य विष्णोः आज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य, ब्रह्मणः द्वितीय परार्धे, श्रीश्वेतवराहकल्पे, वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलि प्रथम चरणे, जम्बूद्वीपे, भारतवर्षे, भरतखंडे, (अपने स्थान का नाम), मासे (अपने मास का नाम), शुक्ल/कृष्ण पक्षे, (तिथि) तिथौ, (वार) वासरे, (नक्षत्र) नक्षत्रे, (योग) योगे, (करण) करणे, एवं गुण विशेषण विशिष्टायां अस्यां (तिथि) तिथौ, (अपना नाम), (अपना गोत्र) गोत्रोत्पन्नः, अहं गृहे, (देवता का नाम) प्रीत्यर्थं, (पूजा/अनुष्ठान का उद्देश्य) करिष्ये।
अर्थ: इस मंत्र में सबसे पहले “ऊँ” ब्रह्मांड की मूल ध्वनि है, जो ईश्वर का प्रतीक है। “विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः” तीन बार भगवान विष्णु का उल्लेख कर उनकी महानता और शक्ति को दर्शाता है। “श्रीमद् भगवतो महापुरुषस्य” से भगवान विष्णु की महिमा का उल्लेख होता है और “विष्णोः आज्ञया प्रवर्तमानस्य” बताता है कि यह संकल्प भगवान विष्णु के आदेश से लिया जा रहा है।
इसके बाद वर्तमान समय का संदर्भ देते हुए ब्रह्मा के दूसरे परार्ध, श्रीश्वेतवराह कल्प, वैवस्वत मनु का अंतराल, 28वें कलियुग का प्रथम चरण, और भौगोलिक स्थान जैसे जम्बूद्वीप, भारतवर्ष और भरतखंड का उल्लेख किया जाता है। फिर व्यक्ति अपने स्थान, मास, तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का उल्लेख करता है, जिससे संकल्प का सही समय और स्थान स्पष्ट होता है। इसके बाद व्यक्ति अपना नाम और गोत्र बताकर यह प्रकट करता है कि वह अपने घर में, किसी देवता की प्रसन्नता के लिए, किसी विशेष पूजा या अनुष्ठान का उद्देश्य लेकर यह कार्य कर रहा है। इस प्रकार यह मंत्र भगवान के समक्ष व्यक्ति की स्पष्ट प्रतिज्ञा होती है, जो कार्य की सफलता और आशीर्वाद की प्राप्ति का आधार बनती है।
पूजा को विशेष और व्यक्तिगत बनानाः संकल्प मंत्र के माध्यम से साधक अपनी पूजा या अनुष्ठान को व्यक्तिगत और विशिष्ट बनाता है, जिससे उसका आध्यात्मिक महत्व बढ़ जाता है और पूजा का प्रभाव और गहरा हो जाता है।
कार्य की शुभता और सफलताः यह मंत्र कार्य की शुभता सुनिश्चित करता है और भगवान या देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम होता है, जिससे पूजा या अनुष्ठान सफल और फलदायी होता है।
मन की एकाग्रता और समर्पणः संकल्प मंत्र का उच्चारण मन को एकाग्र करता है और साधक में अपने लक्ष्य और उद्देश्य के प्रति दृढ़ समर्पण की भावना उत्पन्न करता है, जिससे कार्य में ध्यान और लगन बनी रहती है।
पापों का नाश और पुण्य की वृद्धिः इस मंत्र के जाप से साधख अपने पिछले पापों का नाश करता है और पुण्य कर्मों के प्रति प्रतिबद्ध होता है, जिससे उसकी आत्मा शुद्ध होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
देवताओं का आह्वान और सहायताः संकल्प मंत्र में देवताओं का सम्मान और आह्वान होता है, जिससे वे साधक के कार्य में सहायता प्रदान करते हैं और उसकी रक्षा करते हैं।
धार्मिक अनुशासन का पालनः इस मंत्र के द्वारा साधक अपने धार्मिक कर्तव्यों और नियमों का पालन करता है, जिससे उसकी आध्यात्मिक प्रगति सुनिश्चित होती है।
आत्मिक विश्वास और दृढ़ता का विकासः संकल्प मंत्र व्यक्ति में आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता उत्पन्न करता है, जो उसे हर कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। इस प्रकार, संकल्प मंत्र न केवल धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत का आवश्यक अंग है, बल्कि यह साधक के जीवन में आध्यात्मिक और मानसिक स्थिरता भी लाता है।
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