
जानें इसे पढ़ने के अद्भुत लाभ और सही जाप का तरीका। जीवन में नकारात्मकता से मुक्ति और आशीर्वाद पाने का सरल उपाय।
देवकी सुत गोविंद मंत्र भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक दिव्य और श्रद्धापूर्ण स्तोत्र है। इस मंत्र का नियमित जाप करने से भक्त को श्रीहरि विष्णु तथा उनके अवतार श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। यह मंत्र मन, तन और आत्मा को संतुलित कर शांति, सुख, समृद्धि और शुभ विचारों का संचार करता है।
देवकी सुत गोविंद मंत्र उन दंपतियों के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है जो संतान सुख की इच्छा रखते हैं। यह मंत्र भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आराधना का प्रतीक है। इसके जप से भक्तों को स्वस्थ, सुंदर और बुद्धिमान संतान का आशीर्वाद मिलता है। जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति में बाधा आती है या संतान बार-बार नष्ट होती है, उनके लिए यह मंत्र अत्यंत शुभ फल देने वाला है। यह गर्भ संरक्षण और संतान की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत उपयोगी माना गया है।
देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥
देवकीसुत: देवकी के पुत्र, अर्थात भगवान श्रीकृष्ण। गोविंद: गो (इन्द्रियों और जीवों) के स्वामी; जो सबका पालन करते हैं। वासुदेव: वसुदेव के पुत्र, जो परमात्मा का दिव्य स्वरूप हैं। जगत्पते: संपूर्ण ब्रह्मांड के रक्षक और स्वामी।
देहि मे तनयं: मुझे एक संतान (पुत्र या संतान रूप में आशीर्वाद) प्रदान करें। कृष्ण: हे प्रभु श्रीकृष्ण! त्वामहं शरणं गतः मैं आपकी शरण में पूर्ण समर्पण के साथ आया हूँ।
हे देवकीनंदन गोविंद! आप ही समस्त सृष्टि के पालनकर्ता और दयालु स्वामी हैं। मैं आपके चरणों में श्रद्धा और विश्वास के साथ शरणागत हूँ। कृपया मुझ पर कृपा कर मुझे ऐसी संतान प्रदान करें जो न केवल सुंदर और स्वस्थ हो, बल्कि सद्गुणों और बुद्धि से सम्पन्न भी हो।
यह दिव्य मंत्र भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है और इसे संतान प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इसमें श्रद्धा, भक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना झलकती है। इसका जप जीवन में आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
1. संतान प्राप्ति में सहायक
यह मंत्र उन दंपतियों के लिए विशेष रूप से प्रभावी माना गया है जो संतान की इच्छा रखते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से भक्त को ऐसी संतान प्राप्त होती है जो स्वस्थ, गुणी और बुद्धिमान होती है।
2. गर्भ और संतान की सुरक्षा
इस मंत्र के नियमित जप से गर्भवती महिलाओं को मानसिक शांति और ऊर्जा मिलती है। यह नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करता है और संतान को सुरक्षित व स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है।
3. परिवार में सौहार्द और सुख-शांति
भगवान श्रीकृष्ण का नाम स्मरण करने से घर में प्रेम, सौभाग्य और सुख का वातावरण बनता है। यह मंत्र परिवार के सदस्यों में एकता और सकारात्मकता बनाए रखने में मदद करता है।
4. भक्ति और विश्वास की भावना बढ़ाता है
मंत्र का अंतिम भाग “त्वामहं शरणं गतः” यह दर्शाता है कि व्यक्ति अपने जीवन को प्रभु की इच्छा के अनुसार समर्पित करता है। इससे मन में भक्ति, श्रद्धा और आत्मविश्वास की भावना विकसित होती है।
5. मानसिक शांति और आत्मिक विकास
इस मंत्र का जप मन को शांत करता है, तनाव कम करता है और आत्मा को स्थिरता प्रदान करता है। धीरे-धीरे व्यक्ति के भीतर भक्ति, संतोष और ईश्वरीय ऊर्जा का अनुभव होता है।
1. उपयुक्त समय और स्थान
2. शुद्धता और तैयारी
3. पूजा सामग्री
4. संकल्प और आरंभ
भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए संकल्प लें
“हे प्रभु, मैं आपकी कृपा प्राप्त करने और संतान सुख हेतु यह मंत्र जाप कर रहा/रही हूँ।”
अब दीपक के सामने बैठकर बाल गोपाल का स्मरण करें।
5. मंत्र जाप की विधि
तुलसी की माला से इस मंत्र का 108 बार जाप करें।
जाप के समय मन पूरी तरह श्रीकृष्ण में लगाएं, किसी अन्य विचार में न भटकें।
प्रत्येक बार मंत्र जपने के बाद भगवान से आशीर्वाद की प्रार्थना करें।
6. भोग और प्रार्थना
जाप पूर्ण होने पर भगवान को माखन, मिश्री या दूध से बना भोग अर्पित करें।
अंत में यह प्रार्थना करें: “हे बाल गोपाल, मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखें और मेरे जीवन को संतान सुख से पूर्ण करें।”
7. नियम और सावधानियां
जाप हमेशा शुद्ध मन, पवित्र वाणी और सकारात्मक विचारों के साथ करें।
किसी का अपमान या बुरा विचार न रखें, क्योंकि यह साधना की पवित्रता को प्रभावित करता है।
यदि देवकी सुत गोविंद मंत्र का जाप पूर्ण श्रद्धा, धैर्य और विश्वास के साथ किया जाए, तो भगवान श्रीकृष्ण की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। उनके आशीर्वाद से संतान सुख, पारिवारिक समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। यह दिव्य मंत्र मन, परिवार और जीवन तीनों में शुद्धता, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है।
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