
Makar Sankranti Puja Vidhi में क्या-क्या करें? यहां जानिए मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा, आवश्यक सामग्री और पारंपरिक विधि।
मकर संक्रांति के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान सूर्य और विष्णु जी का ध्यान करें। सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। तिल, गुड़, चावल और फूल अर्पण कर दीपक जलाएं। “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जप करें। अंत में तिल-गुड़ का दान कर पूजा पूर्ण करें।
हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है, जो प्रतिवर्ष 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे मकर संक्रांति कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 14 जनवरी, बुधवार के दिन मनाया जाएगा। इस अवसर पर जगत के पालनहार और ऊर्जा के अधिपति भगवान सूर्य नारायण की विधि-विधान से उपासना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से सूर्य देव के साथ-साथ शनि देव की कृपा भी प्राप्त होती है, जिससे जीवन में आ रही सभी बाधाएं और दोष समाप्त हो जाते हैं।
मकर संक्रांति की पूजा को पूर्ण करने के लिए निम्नलिखित सामग्री का संचय पहले ही कर लेना चाहिए:
विशेष निर्देश: पूजा के लिए चौकी को हमेशा पूर्व दिशा की ओर स्थापित करना चाहिए, ताकि पूजन के समय आपका मुख भी पूर्व दिशा की तरफ ही रहे।
श्रद्धालुओं, आप इस पावन अवसर पर श्री मंदिर की विशेष चढ़ावा सेवा का लाभ भी उठा सकते हैं। आप प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में आप अपनी ओर से पुष्प, अन्न और लड्डुओं का भोग अर्पित करवा कर भगवान सूर्य नारायण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इस सरल और सात्विक विधि से की गई पूजा आपके जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आएगी।
स्नान और तिलक: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद गौ माता को जल अर्पित कर उनके माथे पर कुमकुम और हल्दी का तिलक लगाएं। माला और आरती: गाय को फूलों की माला पहनाएं। धूप और घी का दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक गौ माता की आरती उतारें। गौ ग्रास (भोजन): गाय को इस दिन विशेष रूप से तिल, गुड़ और खिचड़ी खिलाएं। इसके साथ ही ताजा हरा चारा या घास खिलाना बहुत शुभ होता है। परिक्रमा और प्रणाम: गौ माता की तीन बार परिक्रमा करें और उनके चरणों को स्पर्श कर आशीर्वाद लें। दान: पूजा के बाद गौशाला में चारा या धन का गुप्त दान अवश्य करें। महत्व: मकर संक्रांति पर गाय की सेवा करने से सूर्य और शनि देव प्रसन्न होते हैं। माना जाता है कि इस दिन गाय को ग्रास खिलाने से पितृ दोष दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
ज्योतिष शास्त्र में मकर संक्रांति का दिन सूर्य उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस पावन अवसर पर पवित्र नदी में स्नान और दान करने के पश्चात सूर्य देव के दिव्य मंत्रों तथा उनके 12 नामों का स्मरण करने से जीवन के समस्त कष्टों का निवारण होता है। सूर्य देव की कृपा से जातक को आरोग्य, तेज और सफलता की प्राप्ति होती है। यहाँ सूर्य देव की विशेष आरती, शक्तिशाली मंत्र और उनके 12 नाम दिए गए हैं, जिनका पाठ संक्रांति के दिन अवश्य करना चाहिए:
इन मंत्रों का जाप करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है:
अर्ध्य देते समय या पूजा के दौरान सूर्य देव के इन 12 नामों का उच्चारण करना अत्यंत शुभ फलदायक माना जाता है:
भगवान भास्कर की इस आरती के गायन से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता का वास होता है:
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन – तिमिर – निकंदन, भक्त-हृदय-चन्दन॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन ॥
सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन ॥
सुर – मुनि – भूसुर – वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन ॥
सकल – सुकर्म – प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन ॥
कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन ॥
नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन ॥
सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन ॥
मकर संक्रांति के इस महापर्व पर पूरी श्रद्धा के साथ सूर्य देव की स्तुति करें। इन मंत्रों और आरती का जाप आपके आत्मविश्वास में वृद्धि करेगा और आपके जीवन को सूर्य की भांति प्रकाशमान बनाएगा।
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