लोहड़ी पूजा विधि और सामग्री
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लोहड़ी पूजा विधि और सामग्री | Lohri Puja Vidhi aur Samagri

जानें लोहड़ी पूजा विधि, आवश्यक सामग्री और इस पावन पर्व से जुड़ी मान्यताएँ, ताकि आपकी लोहड़ी पूजा हो शुभ और फलदायी।

लोहड़ी पूज विधी के बारे में

उत्तर भारत में मनाया जाने वाला लोहड़ी का पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और मेहनत की खुशी का प्रतीक है। बदलते मौसम और फसल के इस शुभ अवसर पर लोग एक साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं। इस लेख में हम जानेंगे लोहड़ी पर्व का महत्व एवं पूजी वीधी के बारे में।

लोहड़ी पर्व का महत्व और परंपरा

लोहड़ी का पर्व उत्तर भारत, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा, में अत्यंत उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। यह पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व आता है और नई फसल के स्वागत तथा पुरानी फसल की कटाई की खुशी का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी को किसानों का प्रमुख पर्व कहा जाता है, क्योंकि इस समय रबी की फसल तैयार होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन सूर्यदेव और अग्निदेव को समर्पित होता है। लोहड़ी के दिन अग्नि पूजन कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। यह पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, धन और सौभाग्य का संदेश देता है।

लोहड़ी पूजा आवश्यक सामग्री

लोहड़ी पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली हर सामग्री का अपना अलग महत्व होता है। ये चीजें प्रकृति, अग्नि देव और नई फसल के लिए धन्यवाद प्रकट करती हैं और सुख-समृद्धि की कामना का संदेश देती हैं।

  • लकड़ी, उपले और सूखे पत्ते- इनसे अग्नि प्रज्वलित की जाती है। अग्नि को पवित्रता और नकारात्मक ऊर्जा के नाश का प्रतीक माना जाता है।

  • तिल (तिल के दाने)- तिल पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है। इसे अग्नि में अर्पित करने से पापों का नाश और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

  • गुड़- गुड़ जीवन में मिठास, प्रेम और आपसी सौहार्द का प्रतीक है। यह नई फसल की खुशी को दर्शाता है।

  • रेवड़ी और गजक- ये तिल और गुड़ से बनी मिठाइयाँ हैं, जो स्वास्थ्य, ऊर्जा और खुशहाली का प्रतीक मानी जाती हैं।

  • मूंगफली- मूंगफली परिश्रम और किसान की मेहनत का प्रतीक है। यह अच्छी फसल और उन्नति की कामना को दर्शाती है।

  • मकई के दाने या भुट्टा- मकई नई फसल के आगमन का प्रतीक है और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करती है।

  • धूप और दीपक- पूजा के समय वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा के लिए उपयोग किए जाते हैं।

  • पूजा की थाली- इसमें सभी पूजन सामग्री रखी जाती है और अग्नि को अर्पित की जाती है।

लोहड़ी पूजा विधि

  • सूर्यास्त के बाद शुभ समय में खुले में लोहड़ी का अलाव बनाएं।

  • पूजा की थाली में तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, घी और अन्य सामग्री सजाएं।

  • धूप और अगरबत्ती जलाकर अग्नि और सूर्यदेव को स्मरण करें।

  • अलाव में घी डालकर उसे प्रज्वलित करें।

  • परिवार के सभी सदस्य आग के चारों ओर घूमें और लोहड़ी के गीत गाएं।

  • आग में तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, गजक और मकई के दाने अर्पित करें और समृद्धि की कामना करें।

  • सूर्य और अग्नि देव से प्रार्थना करें कि घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।

  • पूजा के बाद सभी को प्रसाद बांटें।

  • लोहड़ी के गीतों पर भांगड़ा और गिद्दा करें।

  • परिवार और मित्रों के साथ सरसों का साग, मक्की की रोटी और खीर जैसे पारंपरिक व्यंजन खाएं।

लोहड़ी पूजा मंत्र

लोहड़ी पूजा के समय मंत्र जाप का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि लोहड़ी की अग्नि में तिल, रेवड़ी आदि अर्पित करते समय इन मंत्रों का जप करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इस दिन प्रातःकाल सूर्यदेव की पूजा करने से धन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं, वहीं रात्रि में लोहड़ी जलाकर अग्निदेव की आराधना करने से परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

लोहड़ी पूजा में जप किए जाने वाले प्रमुख मंत्र

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**ॐ सूर्याय नमः**

इस मंत्र के जाप से सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में ऊर्जा व उत्साह बना रहता है।

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**ॐ भास्कराय नमः**

भास्कर सूर्य का ही एक नाम है, इस मंत्र से सूर्यदेव की विशेष अनुकंपा मिलती है।

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**ॐ ह्रीं ग्रीं सूर्याय नमः**

यह मंत्र धन, समृद्धि और आत्मिक प्रकाश प्रदान करने वाला माना जाता है।

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**ॐ आदित्याय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्**

यह वैदिक मंत्र सूर्य भक्ति को बढ़ाता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

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**ॐ सूर्य देवाय नमः**

इस मंत्र से सूर्यदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में उजास बना रहता है।

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**ॐ अर्काय नमः**

इस मंत्र का जाप सूर्य की दिव्य ज्योति में समर्पण का प्रतीक है।

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**ॐ सवित्रे नमः**

यह मंत्र सूर्य को त्रिदेव स्वरूप में नमन करने का भाव दर्शाता है।

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**ॐ ताराय नमः**

इस मंत्र से ज्ञान, विवेक और जीवन में प्रकाश की प्राप्ति मानी जाती है।

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**ॐ आरुणाय नमः**

यह मंत्र सूर्य की ऊषाकालीन शक्ति की आराधना करता है और नई शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है।

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**ॐ आदित्याय नमः**

इस मंत्र के जाप से जीवन में तेज, प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

लोहड़ी पर क्या करें और क्या न करें?

क्या करें

  • लोहड़ी के दिन पश्चिम दिशा में दीपक जलाकर मां पार्वती की पूजा करें।

  • दीपक की जोड़े या परिवार के साथ परिक्रमा करें।

  • जरूरतमंदों और गरीबों को दान अवश्य करें।

  • गाय को उड़द दाल और चावल खिलाएं।

  • तिल का दान करें और कन्याओं को प्रसाद के रूप में बांटें।

  • लोहड़ी के अलाव को अर्घ्य दें।

  • अलाव में रेवड़ी, मूंगफली, मक्का के फूले, गजक, नारियल, गन्ना और मेवे अर्पित करें।

क्या न करें

  • लोहड़ी के दिन दान-पुण्य की अनदेखी न करें।

  • किसी से झगड़ा, क्रोध या अपशब्दों का प्रयोग न करें।

  • पूजा के समय अशुद्धता या लापरवाही न बरतें।

लोहड़ी का पर्व प्रकृति, अग्नि और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पावन अवसर है। सही विधि से पूजा, दान-पुण्य और परंपराओं का पालन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। लोहड़ी हमें आपसी प्रेम, एकता और सकारात्मक ऊर्जा के साथ नए आरंभ का संदेश देती है।

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Published by Sri Mandir·January 10, 2026

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