
यहां पढ़ें प्रसिद्ध लोहड़ी बोलियां लिरिक्स, उनके भावार्थ और जानें कि ये बोलियां लोहड़ी के उत्सव को क्यों बनाती हैं खास।
लोहड़ी की बोलियां इस पर्व की खुशी और परंपरा को शब्दों में पिरोती हैं। इन्हें गाते हुए लोग अलाव के चारों ओर जुटते हैं और उत्सव का आनंद लेते हैं। इस लेख में जानिए लोहड़ी की प्रसिद्ध बोलियां के बारे में।
लोहड़ी बोलियां दरअसल पंजाबी लोकगीत की छोटी-छोटी पंक्तियां होती हैं, जिन्हें लोहड़ी के त्योहार पर गाया या बोला जाता है। ये बोलियां खुशी, उत्सव, आशीर्वाद और लोककथाओं को व्यक्त करती हैं। लोहड़ी के दिन अलाव (आग) के चारों ओर लोग इकट्ठा होते हैं। आग में तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली डालते हुए ताल में गाई जाने वाली पंक्तियां ही लोहड़ी बोलियां कहलाती हैं। ये बोलियां अक्सर प्रश्न–उत्तर शैली में होती हैं।
सुंदर मुंदरिए, हो,
तेरा कौन विचारा, हो,
दुल्ला भट्टी वाला, हो,
दुल्ले ने धी ब्याही, हो,
सेर शक्कर पाई, हो,
कुड़ी दा लाल पटाका, हो,
कुड़ी दा शालू पाटा, हो,
तेरा जीवे चाचा,
सानूं दे लोहड़ी,
तेरी जीवे जोड़ी।
हुल्ले नी माइ हुल्ले
दो बेरी पत्ता झुल्ले
दो झुल्ल पयीं खजूरां
खजूरां सुट्ट्या मेवा
एस मुंडे कर मगेवा
मुंडे दी वोटी निक्कदी
ओ खान्दी चूरी कुटदी
कुट कुट भरया थाल
वोटी बावे नंदना नाल
निनान ते वड्डी परजाई
सो कुड़मा दे घर आए !
अस्सी लोहरी लैन आए !
दे माई लोहड़ी, तेरी जीवे जोड़ी’ ,
‘दे माई पाथी तेरा पुत्त चढ़ेगा हाथी
हुल्ले नी माइ हुल्ले
दो बेरी पत्ता झुल्ले
दो झुल्ल पयीं खजूरां
खजूरां सुट्ट्या मेवा
एस मुंडे कर मगेवा
मुंडे दी वोटी निक्कदी
ओ खान्दी चूरी कुटदी
कुट कुट भरया थाल
वोटी बावे नंदना नाल
निनान ते वड्डी परजाई
सो कुड़मा दे घर आए !
अस्सी लोहरी लैन आए !
आया लोहड़ी दा त्यौहार
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