फाल्गुन अमावस्या कब है
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फाल्गुन अमावस्या कब है

क्या आप जानते हैं कि फाल्गुन अमावस्या 2026 कब है और इस दिन का धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए फाल्गुन अमावस्या की सही तिथि, पूजा विधि, पितृ तर्पण का महत्व और शुभ फल प्राप्त करने के उपाय – सब कुछ सरल भाषा में।

फाल्गुन अमावस्या के बारे में

इस साल फाल्गुन महीने की अमावस्या 17 फरवरी 2026, मंगलवार को पड़ेगी। मंगलवार होने के कारण इसे भौमवती अमावस्या कहा जाएगा। इसी दिन सूर्य ग्रहण भी रहेगा। अमावस्या के दिन बताए गए नियमों और उपायों को करने से ग्रहों से जुड़ी परेशानियाँ कम होती हैं और दोषों से राहत मिल सकती है।

फाल्गुन अमावस्या

सनातन परंपरा में फाल्गुन महीने को बहुत खास माना गया है। इस समय पूजा-पाठ और दान करना शुभ माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी 2026 को पड़ेगी। इसी दिन साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण भी होगा। सूर्य ग्रहण के समय पूजा करना और भोजन करना वर्जित माना गया है।

2026 में फाल्गुन अमावस्या कब है

  • फाल्गुन अमावस्या की तिथि 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 34 मिनट से शुरू होगी और 17 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी।
  • स्नान के लिए शुभ समय सुबह 5 बजकर 16 मिनट से सुबह 6 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल मुहूर्त सुबह 10 बजकर 39 मिनट से दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक माना गया है।

फाल्गुन अमावस्या का महत्व

सनातन परंपरा में फाल्गुन अमावस्या को एक पवित्र और शुभ तिथि माना जाता है। यह दिन ईश्वर की आराधना और आत्मशुद्धि के लिए खास होता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्य जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

पितरों के लिए विशेष दिन: फाल्गुन अमावस्या पितरों को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। इस दिन तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को संतोष मिलता है। स्नान और दान का महत्व: अमावस्या के दिन प्रातःकाल स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। दोष निवारण के लिए उपयोगी: फाल्गुन अमावस्या पर किए गए धार्मिक उपायों से कई प्रकार के दोषों से राहत मिलने की मान्यता है। पितृ दोष, शनि दोष और अन्य नकारात्मक ग्रह प्रभावों को शांत करने के लिए यह दिन बहुत प्रभावी माना जाता है। व्रत और पूजा का फल: इस दिन व्रत रखकर भगवान की पूजा करने से मन और शरीर दोनों शुद्ध होते हैं। सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा: फाल्गुन अमावस्या पर श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए कर्म जीवन में खुशहाली लाते हैं।

फाल्गुन अमावस्या का धार्मिक और पौराणिक कारण

फाल्गुन अमावस्या के धार्मिक कारण

  • सनातन परंपरा में अमावस्या को साधना, ध्यान और आत्मचिंतन का विशेष दिन माना गया है।
  • फाल्गुन अमावस्या पर ईश्वर की आराधना करने से मन की शुद्धि और जीवन में संतुलन आता है।
  • इस दिन पितरों के नाम से तर्पण और दान करना पुण्यदायक माना गया है।
  • मान्यता है कि इस तिथि पर किए गए शुभ कर्मों का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है।
  • फाल्गुन माह को आध्यात्मिक जागरूकता का समय माना जाता है, इसलिए इसकी अमावस्या का महत्व बढ़ जाता है।

फाल्गुन अमावस्या के पौराणिक कारण

  • पौराणिक कथाओं के अनुसार अमावस्या के दिन पितृगण अपने वंशजों द्वारा किए गए कर्मों से संतुष्ट होते हैं।
  • ऐसा माना जाता है कि फाल्गुन अमावस्या पर किया गया तर्पण पितृ दोष को शांत करने में सहायक होता है।
  • शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इस दिन दान और पूजा से देवताओं के साथ पितरों की भी कृपा प्राप्त होती है।
  • फाल्गुन मास को भगवान शिव से जुड़ा हुआ माना गया है, इसलिए इस अमावस्या को विशेष फलदायी कहा गया है।

फाल्गुन अमावस्या के दौरान सूतक काल

पंचांग के अनुसार, सूर्य ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा और शाम 7 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा। सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल लगता है, जो लगभग 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। इस हिसाब से भारतीय समय अनुसार सूतक काल रात 3 बजकर 26 मिनट से शुरू माना जाएगा।

फाल्गुन अमावस्या के दिन क्या करें और क्या न करें

इन बातों से बचें

  • पूजा-पाठ से बचें: सूर्य ग्रहण के दौरान मंदिरों में पूजा-पाठ नहीं किया जाता। घर के मंदिर के कपाट भी बंद कर देना चाहिए।
  • मांगलिक कार्य न करें: ग्रहण के समय कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी, हवन, मुंडन या अन्य धार्मिक अनुष्ठान नहीं करना चाहिए।
  • भोजन पर रोक: सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन करना वर्जित माना गया है। ग्रहण समाप्त होने के बाद ही स्नान करके भोजन करें। यदि पहले से भोजन तैयार हो, तो उसमें तुलसी के पत्ते या दूर्वा डाल दें.
  • विशेष ध्यान: बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग ग्रहण के दौरान भोजन कर सकते हैं, लेकिन उसमें तुलसी का पत्ता जरूर डालें।

सूर्य ग्रहण के बाद करने योग्य कार्य

  • स्नान और गंगाजल का छिड़काव: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान अवश्य करें और अपने घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
  • मूर्तियों की पुनर्स्थापना और पूजा: स्नान के बाद भगवान की मूर्तियों को फिर से स्थापित करें और घर के मंदिर में पूजा करें।
  • दान-पुण्य करना: सूर्य ग्रहण के बाद दान और पुण्य कार्य करना शुभ माना जाता है।

फाल्गुन अमावस्या का प्रभाव और लाभ

फाल्गुन अमावस्या का प्रभाव

  • ग्रहों पर सकारात्मक असर: अमावस्या के दिन किए गए धार्मिक उपाय और पूजा ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम करते हैं, विशेषकर शनि और पितृ दोष।
  • आध्यात्मिक शांति: व्रत, ध्यान और मंत्र जाप से मानसिक तनाव घटता है और आत्मिक संतुलन बढ़ता है।
  • पितरों का आशीर्वाद: पितरों के तर्पण और पिंडदान से उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति और खुशहाली आती है।
  • मन और हृदय की शुद्धि: दान, पूजा और साधना से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन शुद्ध होता है।

फाल्गुन अमावस्या के लाभ

  • सुख और समृद्धि: श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए कार्य जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाते हैं।
  • दोष निवारण: पितृ दोष, कालसर्प दोष और अन्य ग्रह दोषों से राहत मिलती है।
  • पुण्य की प्राप्ति: दान, अन्नदान और वस्त्रदान से पुण्य की प्राप्ति होती है और पाप कम होते हैं।
  • नई शुरुआत के लिए शुभ: अमावस्या पुराने नकारात्मक प्रभावों को खत्म करने और नए शुभ कार्य शुरू करने के लिए उत्तम समय मानी जाती है।
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Published by Sri Mandir·February 16, 2026

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