अक्षय तृतीया कब है 2026?
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अक्षय तृतीया कब है 2026?

क्या आप जानना चाहते हैं कि 2026 में अक्षय तृतीया कब मनाई जाएगी और इसका क्या महत्व है? इस लेख में जानिए अक्षय तृतीया की तिथि, पूजा विधि, धार्मिक महत्व, परंपराएँ और इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्यों की पूरी जानकारी।

अक्षय तृतीया के बारे में

अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ पर्व है, जो वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन किए गए दान, जप और पुण्य कार्य अक्षय फल देते हैं। लोग सोना खरीदना, नए कार्य शुरू करना और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ मानते हैं। यह दिन समृद्धि, सौभाग्य और सफलता का प्रतीक है।

अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है। यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है।

‘अक्षय’ का अर्थ होता है जो कभी समाप्त न हो, इसलिए इस दिन किए गए शुभ कार्य, दान और पूजा का फल अक्षय यानी हमेशा बना रहने वाला माना जाता है। इसी पावन अवसर पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं और वृंदावन में भगवान बांके बिहारी जी के चरण दर्शन का विशेष महत्व होता है।

अक्षय तृतीया कब है?

  • वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया का पावन पर्व रविवार, 19 अप्रैल को मनाया जाएगा।
  • अक्षय तृतीया पूजा का समय:- सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक
  • कुल अवधि:- 1 घंटा 28 मिनट
  • अक्षय तृतीया की शुरुआत:- 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:49 बजे
  • अक्षय तृतीया का समापन:- 20 अप्रैल 2026 को सुबह 7:27 बजे

अक्षय तृतीया को “अबूझ मुहूर्त” कहा जाता है, इसलिए इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत खास माना जाता है, क्योंकि इस समय सूर्य और चंद्रमा दोनों मजबूत स्थिति में होते हैं, जिससे इस दिन किए गए कार्यों का फल शुभ और स्थायी माना जाता है।

अक्षय तृतीया क्या है?

अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक बेहद शुभ और पवित्र पर्व है, जिसे कई स्थानों पर आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है जो कभी समाप्त न हो। इसलिए मान्यता है कि इस दिन किए गए जप, तप, दान, यज्ञ और पितरों का तर्पण कभी व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि उसका पुण्य फल हमेशा बना रहता है।

यह दिन सौभाग्य, सफलता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण बहुत से लोग इस अवसर पर सोना या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदते हैं, क्योंकि ऐसा विश्वास है कि इस दिन किया गया निवेश भविष्य में बढ़ता है और घर में धन-वैभव की वृद्धि होती है।

अक्षय तृतीया का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

धार्मिक महत्व

अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और शुभ दिन माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य, जप और पूजा करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया का दिन कई महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि इसी दिन से त्रेता युग की शुरुआत हुई थी और भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म भी इसी तिथि को हुआ था, इसलिए इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है। इसके अलावा, मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने इसी दिन महाभारत की रचना आरंभ की थी और भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा से भी इसी दिन भेंट की थी। कुछ मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन अवसर पर गंगा जी का धरती पर अवतरण हुआ था।

सांस्कृतिक महत्व

सांस्कृतिक रूप से भी यह दिन बहुत खास माना जाता है। लोग इस दिन सोना, जमीन या अन्य मूल्यवान वस्तुएं खरीदते हैं, क्योंकि ऐसा विश्वास है कि इससे भविष्य में धन-वैभव और सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस प्रकार अक्षय तृतीया आस्था, परंपरा और खुशियों का प्रतीक है।

अक्षय तृतीया से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं

अक्षय तृतीया के दिन कई धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं प्रचलित हैं, जिन्हें लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाते हैं। यह पर्व नए आरंभ, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

  • इस दिन लोग सुबह स्नान कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं, साथ ही व्रत रखकर घर की साफ-सफाई और सजावट भी करते हैं।
  • पूजा के बाद अन्न, जल, वस्त्र और धन का दान शुभ माना जाता है, और इस दिन बिना मुहूर्त के भी विवाह या नए कार्य किए जा सकते हैं, इसलिए इसे “अबूझ मुहूर्त” कहा जाता है।
  • इसके अलावा इस दिन सोना, चांदी, भूमि या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदने की परंपरा भी काफी लोकप्रिय है।
  • माना जाता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुओं में वृद्धि होती है और घर में धन-समृद्धि बनी रहती है।
  • कुछ स्थानों पर गंगा स्नान, तीर्थ यात्रा और विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया जाता है। लोग इस दिन नए संकल्प लेते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करते हैं।

अक्षय तृतीया कैसे मनाई जाती है?

अक्षय तृतीया का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं। यदि नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना जाता है। स्नान के बाद व्रत या पूजा का संकल्प लिया जाता है। फिर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है। उन्हें पीले फूल, चंदन, धूप-दीप अर्पित कर सच्चे मन से आराधना की जाती है।

इस दिन भगवान को सत्तू, ककड़ी, चने की दाल और फल का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। साथ ही इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जप और ध्यान करने से मन को शांति मिलती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस पावन अवसर पर दान-पुण्य का भी खास महत्व है। जरूरतमंदों की सहायता करना, भूखे को भोजन कराना और सेवा भाव रखना इस दिन को और अधिक पवित्र बनाता है।

अक्षय तृतीया की तैयारी कैसे की जाती है?

  • घर की अच्छी तरह साफ-सफाई कर उसे सजाया जाता है।
  • पूजा स्थान को साफ करके वहां भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित किए जाते हैं।
  • पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे फूल, चंदन, धूप, दीप, फल आदि पहले से एकत्र कर लिए जाते हैं।
  • व्रत रखने का संकल्प मन में तय किया जाता है और दिनचर्या उसी अनुसार बनाई जाती है।
  • स्नान के लिए गंगाजल या शुद्ध जल की व्यवस्था की जाती है।
  • भोग के लिए सत्तू, ककड़ी, चने की दाल और फल आदि तैयार रखे जाते हैं।
  • दान के लिए अन्न, वस्त्र या अन्य आवश्यक चीजें पहले से अलग रख ली जाती हैं।
  • इस दिन खरीदी जाने वाली वस्तुओं (जैसे सोना, चांदी आदि) की भी पहले से योजना बनाई जाती है।

अक्षय तृतीया पर खरीदी जाने वाली शुभ वस्तुएं

अक्षय तृतीया के दिन खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं जीवन में समृद्धि और शुभ फल लेकर आती हैं। खासतौर पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा काफी प्रचलित है, जिसे धन वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

इसके अलावा इस दिन पीतल और कांसे के बर्तन, नया घर या जमीन, वाहन, फर्नीचर, नए कपड़े, किताबें, इलेक्ट्रॉनिक सामान और खेती से जुड़े उपकरण खरीदना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई चीजें घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता लेकर आती हैं, इसलिए लोग अपनी आवश्यकता और क्षमता के अनुसार खरीदारी करते हैं।

अक्षय तृतीया के दिन किए जाने वाले शुभ कार्य

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की श्रद्धा और भक्ति के साथ विधिपूर्वक आराधना करना।
  • व्रत रखकर जप, तप और ध्यान करना।
  • गरीबों और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना तथा उन्हें भोजन, पानी और आवश्यक वस्तुएं देना पुण्यदायी माना जाता है।
  • गंगाजल से स्नान या तीर्थ स्नान करना।
  • भगवान विष्णु के पवित्र मंत्रों “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का श्रद्धा के साथ जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • सोना, चांदी या अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करना।
  • नया कार्य, व्यवसाय, गृह प्रवेश या विवाह जैसे शुभ काम शुरू करना।
  • पितरों के लिए तर्पण और पूजा करना।
  • मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कर्मों का फल लंबे समय तक बना रहता है और निरंतर बढ़ता है।

अक्षय तृतीया का ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अक्षय तृतीया का दिन अत्यंत शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों मजबूत स्थिति में होते हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का विशेष संचार होता है। यही कारण है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य, निवेश और नए आरंभ लंबे समय तक लाभ देते हैं।

अक्षय तृतीया को “अबूझ मुहूर्त” भी कहा जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय या खरीदारी जैसे कार्य इस दिन बिना किसी संदेह के किए जा सकते हैं।

भारत में अक्षय तृतीया का महत्व

अक्षय तृतीया का पर्व पूरे भारत में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन इसका मुख्य भाव हर जगह एक ही होता है—शुभ शुरुआत और समृद्धि की कामना।

उत्तर भारत:- इस दिन लोग लक्ष्मी-नारायण की पूजा करते हैं और सोना खरीदना शुभ मानते हैं। कई लोग नया व्यापार शुरू करते हैं या महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करते हैं।

दक्षिण भारत:- तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में लोग मंदिर जाकर पूजा करते हैं और सोने के सिक्के या आभूषण खरीदते हैं। घरों में विशेष व्यंजन भी बनाए जाते हैं।

पूर्वी भारत:- ओडिशा और पश्चिम बंगाल में इस दिन को खास महत्व दिया जाता है। किसान इस दिन खेती की शुरुआत करते हैं, जो नए और अच्छे फल का संकेत माना जाता है।

पश्चिम भारत:- गुजरात और महाराष्ट्र में लक्ष्मी पूजा की जाती है और दान-पुण्य किया जाता है। यहां सोने के आभूषण खरीदने की परंपरा भी काफी प्रचलित है।

अक्षय तृतीया का आध्यात्मिक महत्व

आध्यात्मिक दृष्टि से अक्षय तृतीया आत्मशुद्धि और पुण्य प्राप्त करने का विशेष अवसर है। इस दिन किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला माना जाता है। यह पर्व हमें अच्छे कर्म करने, दूसरों की सहायता करने और ईश्वर के प्रति आस्था बढ़ाने की प्रेरणा देता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

अक्षय तृतीया का पावन पर्व हमें धर्म, भक्ति और सेवा का महत्व सिखाता है। यह दिन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे कर्म करने और दूसरों की मदद करने की प्रेरणा भी देता है। इस अवसर पर स्नान, दान, जप और भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही, जरूरतमंदों की सहायता और सरल जीवनशैली अपनाने से मन की शुद्धि होती है और जीवन संतुलित बनता है।

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Published by Sri Mandir·April 9, 2026

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