
इस लेख में जानिए 2026 में निर्जला एकादशी की तिथि, इसका धार्मिक महत्व, व्रत विधि, नियम और इस दिन किए जाने वाले खास उपायों की संपूर्ण जानकारी।
निर्जला एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और जीवन में सुख, समृद्धि तथा पापों से मुक्ति पाने का एक अत्यंत पवित्र अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से बिना जल के व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन माना जाता है, लेकिन इसका फल भी उतना ही महान बताया गया है। इस दिन किया गया जप, तप और भक्ति अत्यंत फलदायी होता है, जिससे जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
निर्जला एकादशी हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण और कठोर एकादशियों में से एक मानी जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे रखने से साल भर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है। इस दिन व्रती बिना जल के उपवास रखते हैं, इसलिए इसे “निर्जला” एकादशी कहा जाता है।
वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत इस प्रकार रखा जाएगा: तिथि: 25 जून 2026, गुरुवार एकादशी तिथि प्रारम्भ: 24 जून 2026 को 18:12 बजे
पारण तिथि: 26 जून 2026 पारण समय: सुबह 05:25 से 08:13 बजे तक द्वादशी समाप्त: 26 जून 2026 को 22:22 बजे उदय तिथि के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026 को रखा जाएगा।
निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत भगवान भगवान विष्णु और माता माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
निर्जला एकादशी से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा महाभारत काल की है। कथा के अनुसार, पांडवों में भीमसेन को भोजन बहुत प्रिय था और वे किसी भी एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे। तब उन्होंने महर्षि व्यास से उपाय पूछा। महर्षि व्यास ने उन्हें वर्ष में एक बार निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि भीम इस दिन बिना जल के उपवास रखेंगे, तो उन्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त होगा। भीमसेन ने इस व्रत को रखा और उन्हें महान पुण्य प्राप्त हुआ। तभी से इस एकादशी को “भीम एकादशी” भी कहा जाता है।
निर्जला एकादशी का व्रत बहुत कठिन होता है, इसलिए इसे नियम और श्रद्धा के साथ करना चाहिए।
इस दिन दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से:
निर्जला एकादशी का व्रत करते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है:
भारत के विभिन्न हिस्सों में इस दिन विशेष पूजा और आयोजन किए जाते हैं:
इस व्रत को करने से अनेक लाभ मिलते हैं:
निर्जला एकादशी हमें यह सिखाती है कि:
निर्जला एकादशी एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली व्रत है, जो व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक और भौतिक दोनों प्रकार की उन्नति लाता है। यह व्रत हमें संयम, श्रद्धा और भक्ति का महत्व सिखाता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। यदि आप जीवन में सुख, शांति और समृद्धि चाहते हैं, तो निर्जला एकादशी का व्रत अवश्य करें।
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