
क्या आप जानना चाहते हैं कि करडैयान नोम्बू 2026 में कब मनाया जाएगा और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए इस व्रत की सही तिथि, इसकी पूजा परंपरा, सुहागिन महिलाओं द्वारा किए जाने वाले व्रत का महत्व और इससे जुड़ी खास मान्यताएँ।
Karadaiyan Nombu एक महत्वपूर्ण दक्षिण भारतीय व्रत है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। यह व्रत प्रायः तमिल माह पांगुनी के आरंभ में रखा जाता है। महिलाएं विशेष पूजा करती हैं और चावल व गुड़ से बने “करडैयान अडई” का नैवेद्य अर्पित करती हैं। यह व्रत पवित्रता, समर्पण और दांपत्य सुख का प्रतीक माना जाता है।
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दक्षिण भारत, खासकर तमिल संस्कृति में करडैयन नोम्बु को स्त्रियों की श्रद्धा, विश्वास और वैवाहिक निष्ठा से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इसे सावित्री नोम्बु व्रतम भी कहा जाता है, क्योंकि इस व्रत का संबंध देवी सावित्री और उनके पति सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ उपवास रखती हैं। यह व्रत देवी सावित्री की निष्ठा, त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
करडैयन नोम्बु 2026 में शनिवार, 14 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। तमिल पंचांग के अनुसार यह व्रत उस विशेष संधिकाल में किया जाता है, जब मासी माह समाप्त होकर पंगुनी माह का आरंभ होता है। इसी समय करडई नैवेद्य अर्पित किया जाता है और करडैयन नोम्बु का पवित्र सरडु गले में धारण किया जाता है। यह पर्व न केवल तमिलनाडु में बल्कि भारत के बाहर भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
करडैयन नोम्बु तिथि 14 मार्च 2026 , शनिवार
करडैयन नोम्बु मुहूर्त 06:25 AM से 01:08 AM
अवधि 18 घण्टे 43 मिनट्स
मंजल सरदु मुहूर्त मार्च 15, 2026 को 01:08 AM
करडैयन नोम्बु दक्षिण भारत के कई राज्यों जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक में आस्था के साथ मनाया जाने वाला एक प्रमुख धार्मिक व्रत है। यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसमें ‘करडई’ नामक विशेष नैवेद्य अर्पित किया जाता है और ‘नोम्बु’ का अर्थ उपवास या व्रत से होता है।
इस व्रत का धार्मिक महत्व सत्यवान–सावित्री की पौराणिक कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि देवी सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, भक्ति और बुद्धिमत्ता से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण यह व्रत पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक माना जाता है।
विवाहित महिलाएं इस दिन अपने पति की रक्षा और समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। यह व्रत नारी शक्ति, प्रेम और समर्पण की श्रेष्ठ मिसाल माना जाता है।
करडैयन नोम्बु का संबंध महाभारत में वर्णित सावित्री और सत्यवान की प्रेरक कथा से जुड़ा है। राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने अपने लिए स्वयं वर चुना। उन्होंने वन में रहने वाले सत्यवान से विवाह किया, जो अपने नेत्रहीन माता-पिता की सेवा करता था। महर्षि नारद ने सावित्री को पहले ही चेतावनी दी थी कि सत्यवान का जीवन विवाह के एक वर्ष बाद समाप्त हो जाएगा, फिर भी सावित्री अपने निर्णय पर अडिग रहीं।
निर्धारित दिन पर सावित्री अपने पति के साथ वन गईं। वहीं सत्यवान अचानक मूर्छित होकर उनके गोद में प्राण त्याग देते हैं। उसी समय यमराज सत्यवान का प्राण लेने आते हैं। सावित्री हार नहीं मानतीं और यमराज के पीछे-पीछे चल पड़ती हैं। उनके धर्मपूर्ण वचन और धैर्य से प्रसन्न होकर यमराज उन्हें वरदान मांगने का अवसर देते हैं।
सावित्री बुद्धिमानी से पहले ससुर की दृष्टि और राज्य की कामना करती हैं और अंत में सौ पुत्रों का वर मांगती हैं। तब यमराज को स्मरण होता है कि यह तभी संभव है जब सत्यवान जीवित हों। सावित्री की भक्ति से प्रभावित होकर यमराज सत्यवान को जीवनदान दे देते हैं।
कृतज्ञता स्वरूप सावित्री ने देवताओं को वनफल और करडई अडई अर्पित किया। इसी कारण आज भी करडैयन नोम्बु पर महिलाएं करडई बनाती हैं और पीला धागा पहनकर पति की दीर्घायु और सुखी जीवन की कामना करती हैं।
यही थी करडैयन नोम्बु 2026 से जुड़ी संपूर्ण जानकारी। हमारी मंगलकामना है कि इस पावन व्रत के प्रभाव से देवी सावित्री की कृपा आपके जीवन में बनी रहे और आपके परिवार में सुख, स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि का वास हो। आपकी श्रद्धा, व्रत और पूजा सफल हों तथा वैवाहिक जीवन में प्रेम, स्थिरता और सौहार्द बना रहे। ऐसे ही व्रत-पर्व और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी उपयोगी आध्यात्मिक जानकारियों के लिए ‘श्री मंदिर’ के इस आध्यात्मिक मंच से जुड़े रहिए।
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