सिंह संक्रांति क्या है?
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सिंह संक्रांति क्या है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि सिंह संक्रांति क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है? इस लेख में जानिए सिंह संक्रांति का धार्मिक महत्व, पूजा विधि, शुभ दान, पौराणिक मान्यताएँ और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों की पूरी जानकारी।

सिंह संक्रांति के बारे में

हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि यह वह समय होता है जब भगवान सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। इसी क्रम में जब सूर्य देव कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब उस पवित्र समय को सिंह संक्रांति कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह संक्रांति अत्यंत शुभ संयोगों के साथ मनाई जाएगी, जिसका धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है।

1.सिंह संक्रांति कब है?2.सिंह संक्रान्ति मुहूर्त3.सिंह संक्रांति 2026 के अन्य शुभ मुहूर्त4.सिंह संक्रांति क्या है?5.क्यों मनाते हैं सिंह संक्रांति?6.सिंह संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व7.सिंह संक्रांति से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं8.सिंह संक्रांति कैसे मनाई जाती है?9.सिंह संक्रांति की पूजा कैसे करें?10.पूजा की तैयारी कैसे करें?11.पूजा विधि12.ध्यान रखने योग्य बातें 13.सिंह संक्रांति के लाभ14.सिंह संक्रांति में किए जाने वाले पवित्र कार्य15.सिंह संक्रांति के दिन किए जाने वाले शुभ कार्य16.सिंह संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व17.हिंदू धर्म में सिंह संक्रांति का महत्व18.सिंह संक्रांति का आध्यात्मिक महत्व19.सिंह संक्रांति पर क्या करें?20.सिंह संक्रांति पर क्या न करें?

सिंह संक्रांति कब है?

  • वर्ष 2026 में सिंह संक्रांति 17 अगस्त 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।
  • यह संक्रांति श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में पड़ रही है।
  • सिंह संक्रांति का पुण्य काल प्रातः 05 बजकर 32 मिनट से 08 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।
  • जिसकी कुल अवधि 02 घंटे 31 मिनट होगी।
  • सिंह संक्रांति का महा पुण्य काल प्रातः 05 बजकर 54 मिनट से 08 बजकर 04 मिनट तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 02 घंटे 10 मिनट रहेगी। सिंह संक्रांति का सटीक क्षण प्रातः 08 बजकर 04 मिनट पर होगा।
  • इस दिन पंचमी तिथि का प्रारम्भ 16 अगस्त 2026 को सायं 04 बजकर 52 मिनट पर होगा।
  • पंचमी तिथि का समापन 17 अगस्त 2026 को सायं 05 बजकर 00 मिनट पर होगा।
  • इस संपूर्ण अवधि के दौरान स्नान, दान और पूजा करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायक माना गया है।

सिंह संक्रान्ति मुहूर्त

  • संक्रान्ति करण: बालव
  • संक्रान्ति दिन: सोमवार
  • संक्रान्ति अवलोकन दिनाँक: 17 अगस्त, 2026, सोमवार
  • संक्रान्ति गोचर दिनाँक: 17 अगस्त, 2026, सोमवार
  • संक्रान्ति का समय: 08:04 ए एम, 17 अगस्त
  • संक्रान्ति घटी: 6 (दिनमान)
  • संक्रान्ति चन्द्रराशि: कन्या
  • संक्रान्ति नक्षत्र: चित्रा (मैत्र संज्ञक)

सिंह संक्रांति 2026 के अन्य शुभ मुहूर्त

  • इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन प्रातः सन्ध्या प्रातः 04 बजकर 26 मिनट से 05 बजकर 32 मिनट तक होगी।
  • इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 12 मिनट से 03 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 31 मिनट से 06 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन सायाह्न सन्ध्या शाम 06 बजकर 31 मिनट से 07 बजकर 38 मिनट तक होगी।
  • इस दिन अमृत काल रात्रि 10 बजकर 16 मिनट से 11 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन निशिता मुहूर्त रात्रि 11 बजकर 40 मिनट से 18 अगस्त को 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
  • इस दिन विशेष योग - रवि योग प्रातः 05 बजकर 32 मिनट से 08 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।

इन सभी शुभ मुहूर्तों में पूजा, जप, ध्यान और दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

सिंह संक्रांति क्या है?

सिंह संक्रांति वह पवित्र दिन है जब सूर्य देव अपनी स्वयं की राशि सिंह में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में सिंह राशि को सूर्य की स्वामित्व राशि माना गया है, इसलिए इस समय सूर्य अपनी पूर्ण शक्ति और प्रभाव में होते हैं। इस कारण यह संक्रांति अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। दक्षिण भारत में इसे “सिंह संक्रमण” के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन भगवान विष्णु, भगवान नरसिंह और सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

क्यों मनाते हैं सिंह संक्रांति?

सिंह संक्रांति को मनाने का मुख्य कारण सूर्य देव के इस महत्वपूर्ण गोचर का स्वागत करना है। यह समय प्रकृति में परिवर्तन का संकेत देता है और जीवन में नई ऊर्जा, आत्मबल और सकारात्मकता का संचार करता है। इस दिन स्नान, दान और सूर्य उपासना करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

सिंह संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

धार्मिक दृष्टि से यह दिन अत्यंत पवित्र माना गया है। इस दिन किए गए पुण्य कार्य कई गुना फल प्रदान करते हैं। सांस्कृतिक रूप से भी यह पर्व लोगों को दान, सेवा और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है। विभिन्न क्षेत्रों में इसे अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है।

सिंह संक्रांति से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं

इस दिन से जुड़ी कई प्राचीन मान्यताएं हैं:

  • पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है।
  • तिल, गुड़, अन्न और वस्त्र का दान करने से पापों का नाश होता है।
  • सूर्य देव को अर्घ्य देने से जीवन में मान-सम्मान बढ़ता है।
  • गाय के घी का सेवन स्वास्थ्य और ऊर्जा के लिए लाभकारी माना जाता है।

सिंह संक्रांति कैसे मनाई जाती है?

  • सिंह संक्रांति के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान किया जाता है और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इसके बाद घर या मंदिर में विधि-विधान से पूजा की जाती है।
  • भक्तजन व्रत रखते हैं, दान करते हैं और पूरे दिन सात्विक जीवनशैली का पालन करते हैं। कई स्थानों पर विशेष अनुष्ठान और भजन-कीर्तन भी आयोजित किए जाते हैं।

सिंह संक्रांति की पूजा कैसे करें?

हिंदू धर्म में सिंह संक्रांति का दिन भगवान सूर्य की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है। आइए जानते हैं कि सिंह संक्रांति की पूजा कैसे की जाती है

पूजा की तैयारी कैसे करें?

  • इस दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
  • नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें। यदि संभव हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं।
  • स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें।
  • पूजा के लिए तांबे का पात्र, लाल पुष्प, चंदन, अक्षत, दीपक आदि सामग्री पहले से एकत्रित कर लें।
  • पूजा स्थान को साफ करके पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन लगाएं।

पूजा विधि

सूर्य अर्घ्य से करें शुरुआत

  • सूर्योदय के समय तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें लाल फूल और रोली डालें। अब “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।

संकल्प लें

  • अर्घ्य देने के बाद हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें कि आप श्रद्धा और नियमपूर्वक इस संक्रांति का पालन करेंगे।

पूजन स्थल की स्थापना

  • घर के मंदिर या पूजा स्थान में चौकी स्थापित करें और उस पर साफ वस्त्र बिछाएं। भगवान सूर्य, भगवान विष्णु और भगवान नरसिंह का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।

देवताओं का पूजन करें

  • गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें
  • चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें
  • धूप और घी का दीपक प्रज्वलित करें

मंत्र जाप और स्तुति

  • सूर्य देव के मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें। इससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

भूदेवी पूजन (विशेष परंपरा)

  • इस दिन भूदेवी के रूप में सिलबट्टे की भी पूजा की जाती है। इसे जल और दूध से स्नान कराकर चंदन, हल्दी और पुष्प अर्पित करें।

भोग अर्पित करें

  • देवताओं को फल, गुड़, तिल और सात्विक भोजन का भोग लगाएं।

दान-पुण्य करें

  • पूजा के बाद अपनी श्रद्धा अनुसार तिल, गुड़, वस्त्र या अन्न का दान करें।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • पूरे दिन सात्विक आचरण और विचार बनाए रखें।
  • क्रोध, अहंकार और नकारात्मकता से दूर रहें।

इस प्रकार विधि-विधान से की गई सिंह संक्रांति की पूजा से भगवान सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पूजा न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलती है, बल्कि आपके जीवन में सुख, समृद्धि एवं सफलता भी प्रदान करती है।

सिंह संक्रांति के लाभ

सिंह संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा, स्नान और दान करने से कई शुभ फल प्राप्त होते हैं। संक्षेप में इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

मान-सम्मान में वृद्धि - सूर्य देव की कृपा से यश, प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास बढ़ता है। सूर्य दोष से मुक्ति - इस दिन पूजा और दान करने से कुंडली के सूर्य दोष शांत होते हैं। स्वास्थ्य और ऊर्जा लाभ - शरीर में ऊर्जा बढ़ती है और रोगों से रक्षा होती है। धन-समृद्धि की प्राप्ति - दान-पुण्य से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। पापों का नाश - स्नान, जप और दान से पापों का क्षय होता है और पुण्य मिलता है। आत्मबल में वृद्धि - व्यक्ति के अंदर साहस और सकारात्मकता बढ़ती है। पारिवारिक सुख-शांति - घर में शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

इन सभी लाभों के लिए इस दिन श्रद्धा और नियम से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

सिंह संक्रांति में किए जाने वाले पवित्र कार्य

  • इस दिन विशेष रूप से स्नान, दान, जप और तप का महत्व होता है।
  • गंगा स्नान या पवित्र जल से स्नान
  • तिल, गुड़, घी और अन्न का दान
  • सूर्य मंत्रों का जाप
  • जरूरतमंदों की सहायता

सिंह संक्रांति के दिन किए जाने वाले शुभ कार्य

  • सूर्य देव को अर्घ्य देना
  • ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देना
  • गौ सेवा करना
  • खिचड़ी या सात्विक भोजन बनाना और बांटना

सिंह संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष के अनुसार, सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश अत्यंत प्रभावशाली होता है। इस समय सूर्य मजबूत स्थिति में होते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में नेतृत्व क्षमता, आत्मबल और सफलता की संभावनाएं बढ़ती हैं।

हिंदू धर्म में सिंह संक्रांति का महत्व

हिंदू धर्म में यह पर्व दान, तप और सेवा का प्रतीक है। यह व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर चलने और पुण्य अर्जित करने के लिए प्रेरित करता है।

सिंह संक्रांति का आध्यात्मिक महत्व

आध्यात्मिक रूप से यह दिन आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करता है। सूर्य देव को आत्मा का कारक माना गया है, इसलिए उनकी उपासना से आत्मिक उन्नति होती है।

सिंह संक्रांति पर क्या करें?

  • प्रातः स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दें
  • दान-पुण्य करें
  • मंत्र जाप और ध्यान करें
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें

सिंह संक्रांति पर क्या न करें?

  • सूर्योदय के बाद देर तक न सोएं
  • किसी का अपमान न करें
  • आप तामसिक भोजन से एवं नकारात्मक विचारों से दूर रहें
  • दान करने से न चूकें

सिंह संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक पर्व है जो हमें धर्म, सेवा और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। ऐसे ही व्रत, त्यौहार और धार्मिक जानकारी के लिए जुड़े रहें श्री मंदिर के साथ।

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Published by Sri Mandir·June 3, 2026

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