
इस लेख में जानिए 2026 में गुरु प्रदोष व्रत की तिथियां, इसका धार्मिक महत्व, भगवान शिव की पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले खास उपायों की पूरी जानकारी।
गुरु प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ व्रत माना जाता है। यह व्रत प्रदोष काल में गुरुवार के दिन पड़ने पर विशेष फलदायी होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, व्रत और आराधना की जाती है। मान्यता है कि गुरु प्रदोष व्रत रखने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत हर महीने त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जब यह व्रत गुरुवार (बृहस्पतिवार) को पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है।
प्रदोष काल: 17:35 से 20:19 तिथि: पौष, शुक्ल त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 31 दिसम्बर को 25:47+ बजे तिथि समाप्त: 1 जनवरी को 22:22 बजे
प्रदोष काल: 19:04 से 21:09 तिथि: ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 14 मई को 11:20 बजे तिथि समाप्त: 15 मई को 08:31 बजे
प्रदोष काल: 19:12 से 21:15 तिथि: ज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 28 मई को 07:56 बजे तिथि समाप्त: 29 मई को 09:50 बजे
प्रदोष काल: 18:16 से 20:39 तिथि: भाद्रपद, शुक्ल त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 23 सितम्बर को 22:50 बजे तिथि समाप्त: 24 सितम्बर को 23:18 बजे
प्रदोष काल: 17:59 से 20:27 तिथि: आश्विन, कृष्ण त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 7 अक्टूबर को 23:16 बजे तिथि समाप्त: 8 अक्टूबर को 22:15 बजे
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। “प्रदोष” का अर्थ होता है संध्या का समय (शाम), जब भगवान शिव की पूजा विशेष फल देती है। जब यह व्रत गुरुवार को आता है, तो इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ बृहस्पति देव (गुरु) की कृपा भी प्राप्त होती है।
इस दिन शिव जी की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं।
गुरुवार होने के कारण बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है, जिससे ज्ञान और भाग्य में वृद्धि होती है।
यह व्रत विवाह और संतान सुख के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है।
इस व्रत से धन और समृद्धि में वृद्धि होती है।
व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें।
शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित करें धूप और दीप जलाएं
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
शाम के समय (प्रदोष काल) में विशेष पूजा करें।
पूजा के बाद फलाहार या भोजन करें।
प्रदोष काल (शाम का समय) भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इसी समय भगवान शिव तांडव करते हैं इस समय की पूजा सबसे अधिक फलदायक होती है
क्या करें:
इस व्रत को करने से:
यह व्रत सभी के लिए लाभकारी है:
गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव और बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत शुभ अवसर है। वर्ष 2026 में यह व्रत 1 जनवरी, 14 मई, 28 मई, 24 सितम्बर और 8 अक्टूबर को पड़ रहा है। यदि आप इस व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ करते हैं, तो जीवन में सुख, शांति और सफलता अवश्य प्राप्त होती है।
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