बुध प्रदोष व्रत कब है 2026?
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बुध प्रदोष व्रत कब है 2026?

क्या आप जानना चाहते हैं कि 2026 में बुध प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और इसका क्या महत्व है? इस लेख में जानिए बुध प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा विधि, धार्मिक मान्यताएं और इस दिन किए जाने वाले विशेष अनुष्ठानों की पूरी जानकारी।

बुध प्रदोष व्रत के बारे में

हिंदू धर्म में भगवान शिव को बहुत दयालु और जल्दी प्रसन्न होने वाला देवता माना जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई उनकी पूजा से वे अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। शिव पूजा के लिए सोमवार और महाशिवरात्रि विशेष माने जाते हैं, लेकिन हर महीने आने वाला प्रदोष व्रत भी बेहद शुभ और फलदायी होता है। जब प्रदोष व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, तो उसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। आइए जानते हैं बुध प्रदोष व्रत की पूजा विधि, नियम, उपाय, मंत्र और शुभ मुहूर्त के बारे में।

बुध प्रदोष व्रत कब है?

वर्ष 2026 में बुध प्रदोष व्रत 15 अप्रैल, बुधवार को रखा जाएगा। यह व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ रहा है, जो भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

  • प्रदोष काल में पूजा का समय:- शाम 06:29 बजे से रात 08:48 बजे तक
  • कुल अवधि:- 2 घंटे 19 मिनट
  • त्रयोदशी तिथि की शुरुआत:- 15 अप्रैल को रात 12:12 बजे
  • त्रयोदशी तिथि का समापन:- उसी रात 10:31 बजे

इस समय में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।

बुध प्रदोष व्रत के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त - 04:33 ए एम से 05:19 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या - 04:56 ए एम से 06:06 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त - कोई नहीं
  • विजय मुहूर्त - 02:21 पी एम से 03:11 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त - 06:28 पी एम से 06:51 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या - 06:29 पी एम से 07:38 पी एम
  • अमृत काल - 07:37 ए एम से 09:10 ए एम
  • निशिता मुहूर्त - 11:54 पी एम से 12:40 ए एम, अप्रैल 16

बुध प्रदोष व्रत क्या है?

बुध प्रदोष व्रत एक विशेष व्रत है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। जब प्रदोष व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, तो उसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण या शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है। इस दिन भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस समय पूजा करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

बुध प्रदोष व्रत का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन के कई दोष दूर होते हैं और व्यक्ति को सुख, सौभाग्य और शांति की प्राप्ति होती है। धार्मिक दृष्टि से यह व्रत भगवान शिव के साथ-साथ चंद्र देव से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे करने से दोनों का आशीर्वाद मिलता है।

सांस्कृतिक रूप से भी प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। हर महीने भक्त इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं। यह व्रत लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ता है और जीवन में सकारात्मकता लाने का माध्यम बनता है।

बुध प्रदोष व्रत से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं

  • इस व्रत में शाम के समय, यानी प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस समय शिव जी की कृपा जल्दी प्राप्त होती है।
  • भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और पूरे दिन संयम का पालन करते हैं। सात्विक भोजन, शांत मन और सकारात्मक सोच रखना जरूरी माना जाता है।
  • इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा भी की जाती है, जिससे दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
  • प्रदोष व्रत का संबंध चंद्र देव से भी माना जाता है, इसलिए इस दिन चंद्रमा की पूजा या दर्शन करना शुभ होता है।
  • शाम के समय घर और मंदिर में दीपक जलाए जाते हैं, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मकता आती है।
  • मान्यता है कि लगातार 11 या 21 प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के जीवन की समस्याएं दूर होती हैं और उसे सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

बुध प्रदोष व्रत कैसे मनाया जाता है?

  • बुध प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक खास व्रत है, जिसे पूरी श्रद्धा और नियम के साथ किया जाता है। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान शिव का स्मरण करें और व्रत का संकल्प लें। दिनभर संयम रखें और मन को शांत रखें।
  • शाम के समय, यानी प्रदोष काल में फिर से स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा की तैयारी करें। पूजा के लिए घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक साफ और शांत स्थान चुनें। वहां भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • इसके बाद दीपक जलाएं और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हुए भगवान शिव का पूजन करें। शिवलिंग का जल या पंचामृत से अभिषेक करें और बेलपत्र, धतूरा, फूल आदि अर्पित करें। पूजा के दौरान प्रदोष व्रत कथा सुनना या पढ़ना जरूरी माना जाता है। अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और प्रसाद अर्पित करें।

बुध प्रदोष व्रत की तैयारी कैसे की जाती है?

  • व्रत को सही तरीके से करने के लिए पहले से तैयारी करना जरूरी होता है।
  • घर की साफ-सफाई करें और पूजा स्थान को गंगाजल या साफ पानी से शुद्ध करें।
  • पूजा के लिए चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर प्रतिमाएं स्थापित करें।
  • व्रत से पहले सभी जरूरी पूजा सामग्री एकत्रित कर लें।
  • दिनभर सात्विकता बनाए रखें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • शाम को पूजा से पहले दोबारा स्नान करके मन और तन को शुद्ध करें।

बुध प्रदोष व्रत में की जाने वाली पूजा सामग्री

पूजा को पूर्ण विधि से करने के लिए इन चीजों का होना जरूरी है:-

पूजन सामग्री:-

  • भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी की प्रतिमा या चित्र
  • शिवलिंग
  • गंगाजल, जल पात्र
  • चंदन, हल्दी, कुमकुम, अक्षत
  • धूप, घी का दीपक, कपूर
  • फूल, पुष्प माला, फल, मिठाई
  • मौली, इत्र, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, घंटी, दक्षिणा

पंचामृत के लिए सामग्री:-

  • दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, मिश्री
  • भगवान शिव को अर्पित करने की सामग्री:-
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, सफेद पुष्प

भगवान गणेश के लिए:-

  • दूर्वा, लाल-पीले फूल, जनेऊ

माता पार्वती के लिए:-

  • 16 श्रृंगार की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी आदि)

इन सभी विधियों और सामग्री के साथ श्रद्धा से व्रत करने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

बुध प्रदोष व्रत के दिन किए जाने वाले शुभ कार्य

  • बुध प्रदोष व्रत के दिन कुछ खास कार्य करना बहुत शुभ माना जाता है। इनसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति आती है।
  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान शिव का ध्यान करें। इससे दिन की शुभ शुरुआत होती है।
  • पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखने का संकल्प लें और दिनभर संयम बनाए रखें।
  • शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें। यही समय सबसे शुभ माना जाता है।
  • जल, दूध या पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें और बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। इससे मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
  • प्रदोष व्रत की कथा पढ़ना या सुनना शुभ माना जाता है। इससे व्रत का पूर्ण फल मिलता है।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • पूजा के अंत में दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद अर्पित करें।

बुध प्रदोष व्रत का ज्योतिषीय महत्व

  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रदोष व्रत ग्रहों से जुड़े दोषों को शांत करने का एक प्रभावी उपाय माना जाता है। सप्ताह के अलग-अलग दिनों में पड़ने वाला प्रदोष व्रत संबंधित ग्रहों पर विशेष प्रभाव डालता है, जैसे—रवि प्रदोष से सूर्य मजबूत होता है, सोम प्रदोष से चंद्रमा के शुभ फल बढ़ते हैं, मंगल प्रदोष से मंगल दोष शांत होता है और शनि प्रदोष से शनि से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं।
  • इसी तरह जब प्रदोष व्रत बुधवार को आता है, तो उसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से बुध ग्रह को मजबूत करने में सहायक माना जाता है। बुध ग्रह बुद्धि, वाणी और निर्णय लेने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है।
  • इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत रखने से बुध ग्रह के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति, बोलने का तरीका और निर्णय क्षमता बेहतर होती है। साथ ही जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बढ़ता है।

भगवान शिव की पूजा में प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक श्रेष्ठ उपाय माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई शिव पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है। इस समय भगवान शिव अपने भक्तों की प्रार्थना जल्दी सुनते हैं और उन्हें सुख-शांति, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद देते हैं। इसलिए हर माह श्रद्धा से यह व्रत करना बहुत शुभ माना जाता है।

बुध प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व

आध्यात्मिक दृष्टि से बुध प्रदोष व्रत आत्मशुद्धि और आंतरिक शांति प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। यह व्रत व्यक्ति को संयम, अनुशासन और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस दिन ध्यान, जप और भगवान शिव की उपासना करने से मन की अशांति दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि प्रदोष काल, जो दिन और रात के बीच का समय होता है, अत्यंत पवित्र होता है। इस प्रकार बुध प्रदोष व्रत व्यक्ति को मोक्ष की ओर बढ़ने और ईश्वर से गहरा संबंध स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है।

तो दोस्तों, ये थे कुछ सरल उपाय, जिन्हें अपनाकर आप अपने जीवन में शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं। इन उपायों को सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से भगवान शिव की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। बुध प्रदोष व्रत को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक आसान और प्रभावी तरीका है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

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Published by Sri Mandir·April 9, 2026

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