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श्री हनुमान जी की आरती

श्री हनुमान जी की आरती

पढ़ें श्री हनुमान आरती


हनुमान जी की आरती का महत्व

हनुमान जी को देवों के देव महादेव का 11वां रुद्रावतार कहा जाता है। हनुमान जी को कलयुग के सभी संतापों को हरने वाला बताया जाता है। हनुमान जी यानी बजरंगबली को मंगलवार और शनिवार को पूजा जाता है। कहते हैं, कलयुग में एकमात्र हनुमान जी ही हैं जो सभी देवताओं में जीवित हैं। भगवान बजरंगबली की पूजा के दौरान आरती का विशेष महत्व है। हनुमान जी की पूजा के दौरान आरती करने से बहुत प्रसन्न होते हैं और साधक को मनचाहा वरदान देते हैं।

श्री हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर नर मुनि आरती उतारे। जय जय जय हनुमान उचारे॥

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमान जी की आरती गावे। बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

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