नकारात्मक ऊर्जाओं एवं बाधाओं से सुरक्षा के लिए उज्जैन एवं कामाख्या तीर्थक्षेत्र विशेष माँ कामाख्या तंत्र युक्त यज्ञ एवं काल भैरव अष्टकम स्तोत्र पाठ
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उज्जैन एवं कामाख्या तीर्थक्षेत्र विशेष

माँ कामाख्या तंत्र युक्त यज्ञ एवं काल भैरव अष्टकम स्तोत्र पाठ

नकारात्मक ऊर्जाओं एवं बाधाओं से सुरक्षा के लिए
temple venue
शक्तिपीठ मां कामाख्या मंदिर एवं विक्रांत भैरव मंदिर, गुवाहाटी, उज्जैन
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नकारात्मक ऊर्जाओं एवं बाधाओं से सुरक्षा के लिए उज्जैन एवं कामाख्या तीर्थक्षेत्र विशेष माँ कामाख्या तंत्र युक्त यज्ञ एवं काल भैरव अष्टकम स्तोत्र पाठ

हिंदू धर्म में अष्टमी तिथि का बेहद महत्व है, यह तिथि देवी मां को समर्पित है। कहते हैं इस दिन बाबा भैरव और देवियों की तंत्र पूजा करवाना अत्यंत प्रभावशाली होता है। इस दिन विशेष पूजा कराने से भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा मिलती है। तांत्रिक परंपराओं में भैरव पूजा को अत्यधिक शक्तिशाली एवं महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि देवी की अद्भुत कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे पहले भैरव की पूजा करनी चाहिए। यही कारण है कि अष्टमी तिथि भगवान विक्रांत भैरव के साथ सर्वशक्ति मां कामाख्या की पूजा एक साथ कराई जा रही है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान शिव देवी के 51 शक्तिपीठों की स्थापना कर रहे थे तब असुरों को इस बात का भय सताने लगा कि यदि पृथ्वी पर इन शक्तिपीठों की स्थापना हो गयी तो असुरों का विनाश हो जायेगा। जिस कारण सभी असुर इन शक्तिपीठों को खंडित करने के लिए आगे बढ़ने लगे, इस बात को जानकार भगवान शिव ने अपने भैरव अवतार को उन शक्तिपीठों की रक्षा करने के लिए छोड़ दिया। यही कारण है कि देवी के दर्शन एवं उनकी कृपा पाने के लिए पहले बाबा भैरव की आज्ञा लेनी पड़ती है उसके बाद ही देवी की कृपा पाना संभव होता है। देवी के प्रमुख शक्तिपीठों में से गुवाहाटी में स्थित कामाख्या शक्तिपीठ की विशेष मान्यता है, वहीं महाकाल की नगरी उज्जैन में विक्रांत भैरव प्रमुख रूप से विराजमान हैं। इसलिए इन पवित्र स्थलों पर कराई जाने वाली पूजा का विशेष फल प्राप्त करने के लिए माँ कामाख्या तंत्र युक्त यज्ञ एवं काल भैरव अष्टकम स्तोत्र पाठ में श्री मंदिर के माध्यम से भाग लें और देवी मां के साथ विक्रांत भैरव का आशीष पाएं।

शक्तिपीठ मां कामाख्या मंदिर एवं विक्रांत भैरव मंदिर, गुवाहाटी, उज्जैन

शक्तिपीठ मां कामाख्या मंदिर एवं विक्रांत भैरव मंदिर, गुवाहाटी, उज्जैन
पौराणिक कथा के अनुसार महादेव जब माता सती के देह को लेकर इधर उधर घुम रहे थें तब उनको इस प्रकार व्यथित देख ब्रह्माजी के सुझाव पर भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के खंडन कर दिए। वे अंग जहाँ-जहाँ भी गिरे वो स्थान शक्तिपीठ कहलाया और उन शक्तिपीठ की रक्षा के लिए महादेव ने अपना ही एक रूप, नियुक्त किया जो भैरव कहलाया। यानि प्रत्येक शक्तिपीठ मंदिर में भैरव देव का एक मंदिर समर्पित होता है। यही कारण है कि भैरव की पूजा मां कामाख्या के साथ करने से अत्यंत प्रभावशाली फल प्राप्त होते हैं।

महाकाल की नगरी कहे जाने वाले उज्जैन में अष्ट भैरव का वास है, उन्हीं अष्ट भैरव में से दूसरे नम्बर पर हैं विक्रांत भैरव। यहां भगवान भैरव, भय और विनाश के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। यह मंदिर तांत्रिकों और मंत्र साधकों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो यहां अपनी साधना और अनुष्ठान करते हैं। यहां दर्शन और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ति एवं नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। गुवाहाटी में विराजित शक्तिपीठ कामाख्या तीर्थ क्षेत्र, 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी सती की 'योनि' पृथ्वी पर गिरी थी तब से माता यहीं कामाख्या के रूप में वास करती हैं। इन दो शक्तिशाली मंदिरों में आयोजित होने वाली इस पूजा में भाग लें और मां कामाख्या के साथ भगवान भैरव का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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