✨🙏 इच्छापूर्ति के आशीष हेतु और माघ मेले के तीसरे शाही स्नान के अवसर पर त्रिवेणी संगम की पुण्य धरा पर शिव रुद्राभिषेक एवं रुद्र हवन करवाएं 🚩🌊🕉️
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त्रिवेणी संगम शाही स्नान विशेष

शिव रुद्राभिषेक और रुद्र हवन

सभी इच्छाओं की पूर्ति और वित्तीय स्थिरता के लिए
temple venue
त्रिवेणी संगम, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश
pooja date
18 January, Sunday, माघ कृष्ण अमावस्या
పూజ బుకింగ్ ముగుస్తుంది
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आज के समय में बहुत से लोग अपनी अधूरी इच्छाओं, आर्थिक अस्थिरता और मानसिक उलझनों से जूझते हुए भीतर ही भीतर थक चुके हैं। प्रयास करने के बाद भी जब स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब मन शांति और संतुलन की तलाश करने लगता है। ऐसे समय में व्यक्ति किसी ऐसे मार्ग की ओर देखता है, जहाँ वह अपने भाव, चिंताएं और इच्छाएं श्रद्धा के साथ समर्पित कर सके। वेदों के अनुसार त्रिवेणी संगम इस प्रकार के आत्मिक जुड़ाव के लिए विशेष स्थान है, क्योंकि माँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम केवल नदियों का मिलन नहीं, बल्कि मन, कर्म और भाव को संतुलित करने का प्रतीक माना जाता है। युगों से साधक यहां आकर जप, तप और शिव आराधना के माध्यम से अपने भीतर की अशांति को शांत करने का प्रयास करते आए हैं।

इसी त्रिवेणी संगम की पावन धरा पर माघ मेला आयोजित होता है। यह समय आत्मचिंतन और साधना के लिए विशेष माना जाता है। इस पूरे आयोजन में माघ मेले का तीसरा शाही स्नान विशेष रूप से उल्लेखनीय होता है, जब साधु-संत और श्रद्धालु संगम में एक साथ स्नान करते हैं। इस समय वातावरण में स्वाभाविक रूप से शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है। इसी क्रम में मौनी अमावस्या आती है, जिसे मौन, आत्मनिरीक्षण और आंतरिक ऊर्जा को बढ़ाने का समय माना जाता है। यह काल भीतर जमी उलझनों और मानसिक अशांति को छोड़कर आगे बढ़ने का प्रतीक होता है।

जब त्रिवेणी संगम, तीसरा शाही स्नान और मौनी अमावस्या एक साथ आते हैं, तो इसे एक विशेष आध्यात्मिक संयोग के रूप में देखा जाता है। ऐसे समय में भगवान शिव से जुड़ा अनुष्ठान अधिक भावनात्मक और आत्मिक जुड़ाव का माध्यम बनता है। शिव रुद्राभिषेक और रुद्र हवन को भगवान शिव के चरणों में अपनी इच्छाएं, चिंताएं और आर्थिक स्थिरता से जुड़े भाव समर्पित करने का माध्यम माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस अनुष्ठान के माध्यम से साधक अपने प्रयासों को समझने, वित्तीय विषयों को संतुलित दृष्टि से देखने और भीतर स्थिरता विकसित करने का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। रुद्राभिषेक मन को शांत करने और रुद्र हवन नकारात्मकता को छोड़ने का प्रतीक माना जाता है, जिससे व्यक्ति अपने प्रयासों और निर्णयों को स्पष्टता के साथ देख पाता है।

🙏✨ यह शिव अनुष्ठान त्रिवेणी संगम की पावन धरा पर आयोजित किया जा रहा है। आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष अवसर पर आयोजित शिव रुद्राभिषेक और रुद्र हवन में भाग लेकर भगवान शिव से जुड़ने का यह पावन अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। 🚩🌊🕉️

त्रिवेणी संगम,प्रयागराज, उत्तरप्रदेश

 त्रिवेणी संगम,प्रयागराज, उत्तरप्रदेश
प्रयागराज का त्रिवेणी संगम हिंदू धर्म का सर्वोच्च तीर्थस्थल माना जाता है, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदी का पवित्र मिलन होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि की शुरुआत में भगवान ब्रह्मा ने यहीं विश्व का प्रथम यज्ञ किया था। उन्होंने इस त्रिवेणी को सृष्टि रचना के लिए आदर्श स्थल माना, क्योंकि यहाँ तीनों नदियों की शुद्ध ऊर्जा संयुक्त रूप से कार्य करती है। ब्रह्माजी ने यज्ञ की शुरुआत भगवान शिव को इष्ट मानकर की, और इसकी रक्षा भगवान विष्णु के माधव रूप ने की। इस यज्ञ के परिणामस्वरूप इस पावन स्थल को 'प्रयागराज' कहा जाने लगा, जिसका अर्थ है राजाओं का राजा।
यह स्थल पाप नाशक और मोक्षदायक माना जाता है। पद्म पुराण में उल्लेख है कि सरस्वती नदी भूमिगत होकर संगम में मिलती है, जो ज्ञान और तपस्या का प्रतीक है। ऋषि भारद्वाज और महर्षि वाल्मीकि ने यहीं तपस्या की। हर 12 वर्ष में कुंभ मेला इसी स्थान पर आयोजित होता है, जहाँ लाखों श्रद्धालु स्नान कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं। गंगा आरती का भव्य दृश्य भक्ति और प्रकृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। त्रिवेणी संगम भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जो एकता, शुद्धि और दिव्य ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। यह स्थल भक्तों और पर्यटकों के लिए शांति और आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र बना रहता है।

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