2026 के पहले राहु-शासित स्वाति नक्षत्र पर, जीवन में स्थिरता और सही दिशा में प्रगति के लिए राहु शांति जाप और हवन के माध्यम से संतुलन और स्पष्टता प्राप्त करें।🔥🙏 ✨
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राहु का नक्षत्र विशेष

राहु शांति जाप और हवन

मानसिक स्थिरता और सफलता के आशीर्वाद के लिए
temple venue
राहु पैठाणी मंदिर, पौड़ी, उत्तराखंड
pooja date
12 January, Monday, माघ कृष्ण नवमी
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2026 के पहले राहु-शासित स्वाति नक्षत्र पर, जीवन में स्थिरता और सही दिशा में प्रगति के लिए राहु शांति जाप और हवन के माध्यम से संतुलन और स्पष्टता प्राप्त करें।🔥🙏 ✨

🔱 वैदिक ज्योतिष में स्वाति नक्षत्र का स्वामी राहु माना जाता है। राहु को छाया ग्रह कहा जाता है, जो मन की गतिविधियों, बेचैनी, महत्वाकांक्षा और अचानक होने वाले बदलावों से जुड़ा होता है। जब नए समय या नए वर्ष की शुरुआत में राहु का प्रभाव बढ़ता है, तो उसका असर सबसे अधिक हमारे मन, सोच और फैसलों पर महसूस होता है। नववर्ष का स्वाति नक्षत्र एक ऐसा समय माना जाता है, जब पिछले समय की अधूरी उलझनें सामने आ सकती हैं। यह भ्रम, चिंता, जल्दबाजी में लिए गए निर्णय या कामकाज में बार बार रुकावट के रूप में दिखाई दे सकता है।

🔱 स्वाति नक्षत्र के देवता वायु देव हैं, जो गति और मन के प्रवाह का प्रतीक माने जाते हैं। राहु के प्रभाव में स्वाति नक्षत्र के समय मन जल्दी भटकता है, विचार तेजी से बदलते हैं और भावनाओं में अस्थिरता महसूस हो सकती है। इसी कारण स्वाति नक्षत्र में राहु शांति पूजा को विशेष माना जाता है, क्योंकि इस समय राहु की ऊर्जा को समझकर संतुलित करने की भावना से पूजा की जाती है।

🔱 राहु शांति जाप और हवन में वैदिक मंत्रों और अग्नि आहुतियों के माध्यम से मन को शांत करने और नकारात्मक सोच को कम करने का प्रयास किया जाता है। यह अनुष्ठान आत्मसंयम, स्पष्ट सोच और आंतरिक स्थिरता की भावना को मजबूत करने के लिए किया जाता है, ताकि व्यक्ति अपनी मेहनत और लक्ष्य पर ध्यान बनाए रख सके।

🔱 यदि आप मानसिक अशांति, परिणामों में अस्थिरता, करियर को लेकर अनिश्चितता या एकाग्रता बनाए रखने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, तो स्वाति नक्षत्र में किया गया यह राहु शांति पूजा नववर्ष की ऊर्जा स्थिर होने से पहले आत्मचिंतन और संतुलन का अवसर प्रदान करती है।

🔱 श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष पूजा में भाग लेकर आप इन भावनाओं के साथ राहु देव का स्मरण कर सकते हैं:
• मन की स्थिरता और भावनात्मक संतुलन
• उलझनों और अधिक सोच से राहत की भावना
• स्पष्ट सोच, एकाग्रता और संतुलित आगे बढ़ने की दिशा

🔱 नववर्ष की शुरुआत इस पूजा के साथ करें, ताकि आपका मन अधिक स्थिर रहे, प्रयास सही दिशा में हों और आने वाला समय स्पष्टता के साथ आगे बढ़े।

राहु पैठाणी मंदिर, पौड़ी, उत्तराखंड

राहु पैठाणी मंदिर, पौड़ी, उत्तराखंड
उत्तराखंड में स्थित राहु पैठाणी मंदिर भारत के उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है जहां राहु की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, राहु और केतु असुर स्वरभानु के शरीर के भाग हैं। समुद्र मंथन के दौरान स्वरभानु ने देवताओं की पंक्ति में बैठकर छल से अमृत पी लिया, जिसे भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया था, ताकि वह अमर न हो सके। हालांकि, अमृत का स्वाद चखने के कारण स्वरभानु अमर हो गया। स्वरभानु के शरीर का निचला हिस्सा केतु और ऊपरी हिस्सा सिर वाला भाग राहु बन गया। यह सिर वाला हिस्सा सुदर्शन चक्र से कटने के बाद पौड़ी जिले में गिरा, जहां यह मंदिर स्थित है और यही राहु मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।

यहां की मान्यता के अनुसार, राहु के कारण उत्पन्न होने वाले दोषों से मुक्ति पाने के लिए लोग इस मंदिर में पूजा करते हैं। विशेष रूप से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और राहु महादशा से राहत पाने के लिए श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करते हैं। कुछ कथाओं में कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य जी ने करवाया था, जबकि एक अन्य कथा के अनुसार पांडवों ने अपनी स्वर्गारोहिणी यात्रा के दौरान इस मंदिर का निर्माण कराया था, ताकि राहु दोष से मुक्ति मिल सके और वे भगवान शिव तथा राहु की पूजा कर सकें।

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