नकारात्मकता से पूर्ण सुरक्षा और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए कालाष्टमी संपूर्ण रक्षा शक्तिपीठ महानुष्ठान श्री हनुमान, भैरव, महाकाली सम्पूर्ण सुरक्षा महायज्ञ
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कालाष्टमी संपूर्ण रक्षा शक्तिपीठ महानुष्ठान

श्री हनुमान, भैरव, महाकाली सम्पूर्ण सुरक्षा महायज्ञ

नकारात्मकता से पूर्ण सुरक्षा और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए
temple venue
शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर, कोलकत्ता, पश्चिम बंगाल
pooja date
22 March, Saturday, कालाष्टमी
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नकारात्मकता से पूर्ण सुरक्षा और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए कालाष्टमी संपूर्ण रक्षा शक्तिपीठ महानुष्ठान श्री हनुमान, भैरव, महाकाली सम्पूर्ण सुरक्षा महायज्ञ

सनातन धर्म में कालाष्टमी एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जो हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान भैरव, जो भगवान शिव के उग्र रूप हैं, के साथ भगवान हनुमान और मां काली की पूजा करते हैं, जिससे उन्हें संपूर्ण रक्षा (पूर्ण सुरक्षा) का आशीर्वाद मिलता है। इन देवताओं की संयुक्त दिव्य ऊर्जा नकारात्मक शक्तियों और छिपे हुए खतरों से रक्षा करते हुए एक अद्वितीय सुरक्षा कवच प्रदान करती है। भगवान हनुमान साहस और अडिग भक्ति के प्रतीक हैं, भगवान भैरव अज्ञानता और अंधकार को दूर करते हैं, और मां काली बुराई पर विजय और दिव्य शक्ति का संचार करती हैं। कालाष्टमी पर इनकी पूजा से न केवल भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति मिलती है, बल्कि उनके जीवन में साहस, अडिगता और बुराई पर विजय का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

भगवान भैरव: काशी के संरक्षक

भगवान शिव के इस रौद्र रूप को सुरक्षा प्रदान करने वाला देवता माना जाता है। भगवान भैरव का प्रादुर्भाव एक प्राचीन कथा में मिलता है, जो शिव पुराण में वर्णित है। कथानुसार, एक बार देवताओं ने भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु से पूछा कि कौन सबसे महान है। भगवान ब्रह्मा ने स्वयं को सबसे महान बताया और भगवान शिव का अपमान कर दिया। इससे क्रोधित होकर शिव ने अपने उग्र रूप काल भैरव का अवतार लिया और क्रोध में आकर अपने नख से ब्रह्मा का पाँचवाँ सिर काट दिया। इस कृत्य को ब्रह्मा हत्या (ब्राह्मण की हत्या का पाप) माना गया। इस पाप का प्रायश्चित करने के लिए भगवान शिव ने काल भैरव को पृथ्वी पर भेज दिया। काल भैरव काशी पहुंचे, जहाँ उन्हें इस पाप से मुक्ति मिली। तभी से भगवान शिव ने भैरव को काशी का कोतवाल (रक्षक) नियुक्त किया, जो नगर और उसके लोगों की बुरी शक्तियों से रक्षा करते हैं।

भगवान हनुमान: शक्ति और भक्ति की प्रतिमूर्ति

संकटमोचन के नाम से प्रसिद्ध भगवान हनुमान अडिग भक्ति, दिव्य शक्ति और बुद्धिमत्ता के प्रतीक हैं। उनकी अद्वितीय भक्ति और शक्ति ने भगवान राम को सीता की मुक्ति के दौरान रावण को पराजित करने में मदद की। रामायण में हनुमान के समुद्र पार करने और सीता को राम की ओर से बचन देने की घटना का वर्णन मिलता है। अपनी वीरता, बुद्धिमानी और दिव्य शक्तियों के साथ, उन्होंने दुश्मनों को पराजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मान्यता है कि कालाष्टमी पर हनुमान जी की पूजा करने से समस्याओं से सुरक्षा और शत्रुओं पर विजय प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

माँ काली: बुरी शक्तियों का नाश करने वाली देवी

मां काली भी एक उग्र संरक्षक मानी जाती हैं, जो नकारात्मकता और बुरी शक्तियों को दूर करती हैं। शास्त्रों के अनुसार, रक्तबीज नामक राक्षस से देवताओं की रक्षा के लिए मां काली प्रकट हुईं। वह राक्षस अपनी रक्त की हर बूंद से एक नया राक्षस उत्पन्न कर सकता था। मां काली ने युद्धभूमि में अपनी जीभ फैलाई ताकि राक्षस का रक्त भूमि पर न गिर सके और नए राक्षस उत्पन्न न हो सकें। इसके बाद उन्होंने रक्तबीज का वध कर संसार में एक बार फिर शांति सुनिश्चित की। इसी कारणवश मान्यता है कि कालाष्टमी तिथि पर मां काली की उपासना करने से नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है।

ये सभी दिव्य शक्तियां मिलकर भक्तों की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते हैं और छुपे हुई बाधाओं को दूर करते हुए संपूर्ण रक्षा प्रदान करते हैं। इसीलिए श्री मंदिर द्वारा कालाष्टमी के पावन अवसर पर शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर में श्री हनुमान, भैरव, और महाकाली संपूर्ण सुरक्षा महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में भाग लें और नकारात्मकता से पूर्ण सुरक्षा और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद प्राप्त करें।

शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर, कोलकत्ता, पश्चिम बंगाल

शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर, कोलकत्ता, पश्चिम बंगाल
कालीघाट मंदिर, जो कोलकाता, पश्चिम बंगाल में स्थित है, हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है और अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है, जो शक्ति, ऊर्जा और विनाश की देवी मानी जाती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां देवी सती का दाहिने पैर की उंगली गिरी थी, जब भगवान शिव उनके शव को लेकर तांडव कर रहे थे। इस कारण, यह स्थल अत्यंत पवित्र 51 शक्तिपीठों में शामिल है। यहां इस मंदिर में देवी काली की प्रचण्ड रूप की प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा में देवी काली भगवान शिव की छाती पर पैर रखे नजर आ रही हैं और उनके गले में नरमुंडों की माला है, उनके हाथ में कुछ कुल्हाड़ी और कुछ नरमुंड हैं, कमर में कुछ नरमुंड भी बंधे हुए हैं। उनकी जीभ बाहर निकली हुई है और जीभ से कुछ रक्त की बूंदे टपक रह हैं। गौरतलब है कि प्रतिमा में मां काली की जीभ स्वर्ण से बनी हुई है।

वर्तमान में मौजूद मंदिर का निर्माण सबॉर्नो रॉय चौधरी परिवार और बाबू कालीप्रसाद दत्तो के संरक्षण में किया गया था, जिसका निर्माण सन् 1798 में शुरू हुआ और 1809 में पूर्ण हुआ। कालीघाट मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बहुत बड़ा है। यह मंदिर कई सैकड़ों वर्षों से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा है, जो यहां आकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। कालीघाट में देवी काली की पूजा से भक्तों को डर, बुराई, और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है और जीवन में शांति, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है। इसके अलावा, यह मंदिर बंगाल के सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है और यहां के धार्मिक त्योहार, विशेषकर दुर्गा पूजा और काली पूजा, बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं।

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​"By the absolute grace of Maa Bagalamukhi, I was able to attend the grand 1000 kg red chilli yagna online through Sri Mandir. Finding this sacred program was no coincidence; it was a direct calling from Maa herself. Since participating, I feel a profound sense of divine protection and fearlessness in my life. Her grace is truly paralyzing all my obstacles. Jai Maa Bagalamukhi!" Thank you, Sri Mandir, for this divine connection."


Kurma kishore Kurma Usha Rani

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thank you so much for your efforts. very beautiful experience.

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