🌺 हिंदू और तांत्रिक मान्यताओं के अनुसार, माँ तारा तीन प्रमुख स्वरूपों में पूजित हैं- माँ उग्र तारा, माँ नील सरस्वती और माँ एकजटा तारा। इन तीनों का अपना अलग शक्तियों के लिए पूजी जाती हैं। माँ उग्र तारा को भय, बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करने वाली रक्षक देवी माना जाता है। माँ एकजटा तारा को चारों दिशाओं से आने वाले संकटों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। वहीं माँ नील सरस्वती, माँ सरस्वती का उग्र रूप हैं, जो तीव्र बुद्धि, सही सोच और निर्णय शक्ति प्रदान करती हैं। जब इन तीनों स्वरूपों की एक साथ पूजा की जाती है, तो सुरक्षा और ज्ञान एक साथ प्राप्त होता है।
🌺 जीवन में कई बार ऐसा समय आता है जब समस्याएँ आपको चारों तरफ से घेर लेती हैं। मन भ्रमित रहता है, सही निर्णय नहीं ले पाते और सामने या पीछे से विरोध बढ़ने लगता है। पूरी कोशिश के बाद भी भय, मानसिक दबाव या बार-बार असफलता बनी रहती है। आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसे समय में केवल प्रयास नहीं बल्कि दिव्य मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है- जहाँ सुरक्षा और समझ दोनों साथ मिलें। ऐसे समय में भक्त माँ तारा के तीनों स्वरूपों की शरण लेते हैं।
🌺 यह महायज्ञ नीलकंठ पुष्प हवन के माध्यम से किया जाता है, जिसमें पवित्र अग्नि में आहुतियाँ देकर माँ उग्र तारा, माँ नील सरस्वती और माँ एकजटा तारा से एक साथ प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि इस पूजा से भय, भ्रम और नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं तथा सुरक्षा, साहस और स्पष्ट बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यह पूजा पश्चिम बंगाल स्थित शक्तिपीठ माँ तारापीठ मंदिर में की जाती है, जो माँ तारा के सबसे शक्तिशाली स्थानों में से एक है। भक्त यहाँ बुरी शक्तियों से रक्षा और चुनौतियों पर विजय के लिए यह साधना करते हैं।
🌸 श्री मंदिर के माध्यम से की जाने वाली यह विशेष पूजा जीवन के कठिन समय में सुरक्षा, स्पष्टता और आंतरिक शक्ति का आशीर्वाद प्रदान करती है।