क्या शरीर की थकान और करियर में रुकी हुई गति असफलता नहीं, बल्कि इस बात का संकेत हो सकती है कि जीवन की ऊर्जा को फिर से जाग्रत करने की आवश्यकता है। सनातन धर्म में भगवान श्री सूर्य देव को केवल एक ग्रह नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष देवता माना गया है। ऐसी मान्यता है कि उनका प्रकाश सीधे स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, अधिकार, नेतृत्व और जीवन की गति से जुड़ा होता है। जब जीवन में सूर्य तत्त्व कमजोर होता है, तब प्रयास भारी लगने लगते हैं, पहचान कम होती है और ऊर्जा धीरे धीरे क्षीण होने लगती है।
शास्त्रों में कहा गया है- “आरोग्यं भास्करादिच्छेत्”, अर्थात जो व्यक्ति अच्छा स्वास्थ्य चाहता है, उसे सूर्य देव की उपासना करनी चाहिए। सूर्य देव को आत्मबल, शारीरिक शक्ति, नेत्र स्वास्थ्य, नेतृत्व क्षमता और जीवन में दृढ़ता का कारक माना गया है। जब सूर्य तत्त्व असंतुलित होता है, तब बार बार स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, लगातार थकान, आत्मविश्वास में कमी और करियर में ठहराव जैसी स्थितियाँ अनुभव की जाती हैं। इसलिए सूर्य की शक्ति को सशक्त करना केवल शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि जीवन की दिशा और आत्मबल के लिए भी आवश्यक माना गया है।
रथ सप्तमी भगवान श्री सूर्य देव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है। पुराणों के अनुसार, इसी दिन सूर्य देव अपने स्वर्ण रथ पर आरूढ़ होकर संसार को प्रकाश देने के लिए प्रकट हुए थे। सात अश्वों से युक्त उनका रथ जीवन की विभिन्न दिशाओं में ऊर्जा के प्रवाह का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण इस दिन को सूर्य जयंती के रूप में भी देखा जाता है और इसे आरोग्य साधना के लिए विशेष माना गया है। इस वर्ष रथ सप्तमी रविवार को पड़ रही है, जिसे सूर्य का दिन माना जाता है। ऐसी स्थिति को सूर्य–रविवार योग कहा जाता है, जिसे सूर्य उपासना के लिए विशेष माना गया है।
रामायण में सूर्य देव की महिमा का एक महत्वपूर्ण प्रसंग मिलता है। रावण के साथ युद्ध के समय भगवान श्री राम शारीरिक और मानसिक रूप से थक चुके थे। तब ऋषि अगस्त्य ने उन्हें आदित्य हृदय स्तोत्र का उपदेश दिया। ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र के पाठ से भगवान राम को पुनः शक्ति, स्पष्टता और साहस की अनुभूति हुई। तभी से परंपरा में रथ सप्तमी पर आदित्य हृदय स्तोत्र के पाठ को स्वास्थ्य और ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। इस पावन दिन पर सूर्य सहस्रनाम अर्घ्य और आदित्य हृदय पाठ के माध्यम से जल और मंत्रों द्वारा सूर्य देव की उपासना की जाती है। परंपरा में ऐसा माना जाता है कि इन साधनाओं से शरीर, मन और कर्म से जुड़ी जड़ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और जीवन में नई चेतना का अनुभव होता है।
इस अनुष्ठान में श्री मंदिर के माध्यम से भाग लेकर आप भी अपने जीवन में संतुलन, स्पष्टता और सूर्य देव के स्थिर मार्गदर्शन का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। 🌞🙏