हिंदू धर्म में भाद्रपद माह का विशेष महत्व है। यह चातुर्मास का दूसरा महीना भादो के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों के अनुसार इस माह में किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठान बहुत लाभकारी माने जाते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र मास में भगवान शिव की उपासना से सभी प्रकार के दोषों के अशुभ प्रभावों से राहत पाई जा सकती है। वहीं जैसे सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी पर जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं, वैसे ही ज्योतिष शास्त्र में भी इनका विशेष महत्व है। सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है, जबकि चंद्रमा को ग्रहों की रानी कहा जाता है। सूर्य जहां आर्थिक, राजनीतिक, नेतृत्व क्षमताओं, आत्मा, सरकारी काम या नौकरी का प्रतीक माना जाता है। वहीं, चंद्रमा मानसिक स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन दोनों ग्रहों की कुंडली में सही स्थितियाँ जातक को कई समस्याओं से राहत दिला सकती हैं, क्योंकि सूर्य आत्मा का प्रतीक है और चंद्रमा मन का प्रतीक है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दोष से ग्रसित जातक सदैव नकारात्मकता विचारों से घिरा रहता है और न चाहते हुए भी गलत कदम उठा सकता है। इस दोष से ग्रसित जातक के जीवन में मानसिक या भावनात्मक चुनौतियों, बेचैनी, चिंता, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आदि बनी रहती हैं। ज्योतिषियों की मानें तो इस दोष के अशुभ प्रभावों से राहत के लिए सूर्य-चंद्र अमावस्या दोष पूजा करनी चाहिए। ऐसे में जहां रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव को समर्पित है। वहीं श्रवण नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा को माना गया है। इसलिए श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में रविवार एवं श्रवण नक्षत्र के शुभ संयोग पर सूर्य-चंद्र अमावस्या दोष पूजा का आयोजन किया जा रहा है। श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में भाग लें और सूर्य देव एवं चंद्र देव से जीवन में नकारात्मकता से मुक्ति एवं मानसिक स्पष्टता का दिव्य आशीष प्राप्त करें।