त्रिपुरा शक्तिपीठ में आयोजित होने वाला यह दिव्य अनुष्ठान देवी उपासना का एक अत्यंत पावन अवसर माना जाता है, जहाँ श्री यंत्र हवन और महात्रिपुरा सुंदरी आरती के माध्यम से भक्त अपने जीवन में समृद्धि, आकर्षण शक्ति और स्थायी सुख की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस शक्तिपीठ में माँ त्रिपुरा सुंदरी स्वयं श्री विद्या स्वरूप में विराजमान हैं, इसलिए यहाँ की गई साधना केवल एक पूजा नहीं बल्कि चेतना, संतुलन और भौतिक–आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ा एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव मानी जाती है। इस दिव्य स्थान की आरती और हवन भक्त के भीतर सकारात्मक ऊर्जा जगाने, रुकावटों को कम करने और आगे बढ़ने का विश्वास देने की भावना से किए जाते हैं।
माँ महात्रिपुरा सुंदरी को दस महाविद्याओं में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें सौंदर्य, पूर्णता, ऐश्वर्य और संतुलन की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है। उनकी कृपा से जीवन में आकर्षण शक्ति बढ़ने, संबंधों में मधुरता आने और भौतिक उन्नति के मार्ग खुलने की मान्यता है। जब भक्त श्रद्धा के साथ उनके चरणों में अपनी प्रार्थना समर्पित करते हैं, तो यह साधना केवल बाहरी सुखों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मन में विश्वास, स्थिरता और संतुलन का भाव भी जगाती है।
श्री यंत्र हवन का महत्व:
श्री यंत्र को देवी लक्ष्मी और माँ त्रिपुरा सुंदरी का साक्षात दिव्य स्वरूप माना गया है। शास्त्रों में इसे ब्रह्मांड की सृजन शक्ति और धन आकर्षण का प्रतीक बताया गया है। जब वैदिक मंत्रों के साथ श्री यंत्र के समक्ष हवन किया जाता है, तो यह साधना जीवन में धन, नए अवसर, उन्नति और स्थिरता को आमंत्रित करने की आध्यात्मिक प्रक्रिया बन जाती है। हवन की अग्नि में अर्पित की गई आहुतियाँ व्यक्ति के आर्थिक अवरोधों, अस्थिरता और नकारात्मकता को शांत करने की प्रार्थना का प्रतीक होती हैं और समृद्धि के लिए मार्ग प्रशस्त करने की भावना से जुड़ी होती हैं।
इस अनुष्ठान का अंतिम चरण महात्रिपुरा सुंदरी शक्तिपीठ आरती है, जिसे देवी के प्रति कृतज्ञता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। आरती के समय उत्पन्न होने वाली दिव्य ऊर्जा भक्त के मन को शांति, विश्वास और सकारात्मकता से भरने की अनुभूति कराती है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस पावन अनुष्ठान में अपने नाम से संकल्प जोड़कर भक्त माँ त्रिपुरा सुंदरी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, ताकि उनके जीवन में समृद्धि, आकर्षण, संतुलन और आगे बढ़ने की नई प्रेरणा का भाव जागृत हो सके।