कभी कभी जीवन में यह महसूस होता है कि मेहनत पूरी है, इरादे सच्चे हैं, फिर भी धन में स्थिरता नहीं आ रही। आय आती है पर रुकती नहीं, संबंधों में पहले जैसा सामंजस्य कम होने लगता है और मन में एक हल्की सी कमी का भाव बना रहता है। व्यक्ति चाहता है कि जीवन में सुख सुविधाएं बढ़ें, बेहतर जीवनशैली मिले और रिश्तों में मधुरता बनी रहे, लेकिन भीतर का संतुलन डगमगाता हुआ सा लगता है। ज्योतिष में ऐसी स्थितियों को कई बार शुक्र ग्रह की ऊर्जा से जोड़ा जाता है, क्योंकि शुक्र को धन, प्रेम, सौंदर्य और वैभव का कारक माना गया है।
2 मार्च 2026 को सोमवार रात्रि 01:01 बजे शुक्र का गोचर मीन राशि में होगा। मीन राशि शुक्र की उच्च अवस्था मानी जाती है। ऐसी धारणा है कि जब शुक्र अपनी उच्च राशि में होता है, तो उसकी शुभ ऊर्जा अधिक प्रभावशाली हो जाती है। इसी समय मालव्य राजयोग के बनने की भी मान्यता है, जो भौतिक समृद्धि, सुख और रचनात्मकता में वृद्धि के संकेत देता है। कुंभ से मीन में यह परिवर्तन केवल आकर्षण ही नहीं, बल्कि भावनात्मक संतुलन और संबंधों में गहराई लाने वाला भी माना जाता है।
इसी विशेष अवसर पर 21 किलो गूलर लकड़ी हवन और 16,000 शुक्र मंत्र जाप पूजा का आयोजन किया जा रहा है। परंपरा में गूलर की लकड़ी को पवित्र और शुक्र को प्रिय माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जब उच्च अवस्था में स्थित शुक्र के दौरान इस लकड़ी से हवन किया जाता है, तो मंत्रों और अग्नि की ऊर्जा मिलकर शुक्र तत्व को शुद्ध और सशक्त करने का माध्यम बन सकती है। यह अनुष्ठान भौतिक समृद्धि और आर्थिक वृद्धि की कामना के साथ साथ बेहतर जीवनशैली के आकर्षण को जागृत करने की भावना से किया जाएगा।
यह पवित्र अनुष्ठान महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित श्री नवग्रह मंदिर में संपन्न किया जाएगा। नवग्रहों की विशेष ऊर्जा से जुड़ा यह स्थान ग्रह शांति और संतुलन के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। ऐसी धारणा है कि पवित्र भूमि पर किया गया हवन और मंत्र जाप साधना के प्रभाव को और भी गहरा बना देता है।
यह पूजा एक श्रद्धापूर्ण आध्यात्मिक प्रयास है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे भाव और दृढ़ संकल्प के साथ किया गया अनुष्ठान व्यक्ति को भीतर से सशक्त करता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा दिखाता है। श्री मंदिर के माध्यम से आप भी घर बैठे इस साधना में सहभागी बनकर शुक्र की उच्च ऊर्जा के इस विशेष अवसर का हिस्सा बन सकते हैं।