🔱 गुप्त नवरात्रि की अष्टमी को सनातन धर्म में अत्यंत निर्णायक रात्रि माना जाता है। यह समय बाहरी उत्सव के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और भय से मुक्ति के लिए की जाने वाली विशेष साधना के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि अष्टमी तिथि में की गई प्रार्थना अधिक प्रभावी होती है, क्योंकि इस समय देवी शक्ति जाग्रत अवस्था में मानी जाती है। यह काल विशेष रूप से उन लोगों द्वारा चुना जाता है, जो छिपे हुए संकटों, बार-बार होने वाली परेशानियों या ऐसे भय से जूझ रहे हों, जो हर प्रयास के बाद भी जीवन को प्रभावित करता रहता है।
🔱 गुप्त नवरात्रि की अष्टमी पर उग्र और रक्षक स्वरूपों की उपासना की जाती है, जिनमें भगवान श्री भैरव देव को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। शास्त्रों में उन्हें काल (समय), भय और अचानक घटने वाली घटनाओं का नियंत्रक बताया गया है। जब जीवन में अकाल दुर्घटना, हादसे या भयानक अनहोनी का डर हावी होने लगता है, तब माना जाता है कि काल तत्व सक्रिय हो जाता है। ऐसे समय में काशी स्थित क्रोधन भैरव मंदिर में की गई पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि काशी को भैरव की सीधी कृपा का क्षेत्र माना जाता है। यहाँ की गई आराधना से नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं और दिव्य सुरक्षा कवच बनता है।
🔱 काशी में भगवान श्री भैरव देव की उपस्थिति निशित काल, यानी गहरी मध्यरात्रि में सबसे अधिक प्रभावशाली मानी जाती है। माघ शुक्ल अष्टमी की रात, श्री क्रोधन भैरव मंदिर में यह विशेष गुप्त नवरात्रि अनुष्ठान निशित काल में किया जाता है। इसमें श्री अष्ट भैरव महारक्षा कवच, 51,000 भैरव देव मूल मंत्र जप और 11 ब्राह्मणों द्वारा महायज्ञ संपन्न किया जाता है। मान्यता है कि यह अनुष्ठान निरंतर भय से राहत, अकाल घटनाओं से सुरक्षा और परिवार सहित जीवन की रक्षा में सहायक होता है।
यह विशेष पूजा श्री मंदिर के माध्यम से श्रद्धालुओं को अनिश्चित समय में सुरक्षा, साहस और आंतरिक शक्ति का आशीर्वाद प्रदान करने के लिए की जाती है।