🔱 गुप्त नवरात्रि सनातन धर्म में एक अत्यंत शक्तिशाली समय माना जाता है। यह उत्सव का नहीं, बल्कि गहन साधना और रक्षा के लिए किए जाने वाले विशेष अनुष्ठानों का काल होता है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि की पहली रात लिया गया संकल्प पूरे नवरात्रि मिलने वाले फल को तय करता है। यह समय विशेष रूप से उन लोगों के लिए होता है, जो जीवन में बार-बार आने वाली अनजानी परेशानियों, दुर्घटनाओं या लगातार बने रहने वाले भय से जूझ रहे होते हैं।
🔱 गुप्त नवरात्रि में उग्र और रक्षक स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। इनमें भगवान श्री काल भैरव को सर्वोच्च माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, वे समय, भय और अचानक घटने वाली घटनाओं के नियंत्रक हैं। जब जीवन में अकाल दुर्घटना, अनहोनी या किसी अनजाने संकट का डर बना रहता है, तब काल तत्व सक्रिय माना जाता है। ऐसे समय में भगवान श्री काल भैरव की उपासना से नकारात्मक प्रभावों पर नियंत्रण और सुरक्षा कवच की प्राप्ति संभव है।
🔱 काशी में भगवान श्री काल भैरव को ‘नगर के कोतवाल’ के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि निशित काल यानी गहन मध्य रात्रि में उनकी उपस्थिति सबसे अधिक प्रभावशाली है। माघ कृष्ण अमावस्या की रात, काशी स्थित श्री आदिकाल भैरव मंदिर में यह विशेष अनुष्ठान किया जाएगा। इसमें श्री अष्ट भैरव महारक्षा कवच, 51,000 काल भैरव मूल मंत्र जप और 11 ब्राह्मणों द्वारा महायज्ञ शामिल है। यह पूजा लगातार बने रहने वाले भय से राहत, अकाल दुर्घटनाओं से सुरक्षा और परिवार सहित जीवन में रक्षा के लिए की जाती है।
यह विशेष पूजा श्री मंदिर के माध्यम से की जा रही है, जो अनिश्चित समय में सुरक्षा, साहस और आत्मबल का आशीर्वाद प्रदान करने का माध्यम है।