🌺 सनातन धर्म में विवाह केवल एक सामाजिक या सांसारिक बंधन नहीं है, बल्कि यह दो आत्माओं का पवित्र मिलन है। यह शिव और शक्ति के शाश्वत संतुलन का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव और मां पार्वती पहले दिव्य युगल थे, जिन्होंने प्रेम विवाह किया। उनका विवाह भक्ति, सही समय और भाग्य का आदर्श माना जाता है। शिव पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित उनकी कथा केवल एक कहानी नहीं, बल्कि वैवाहिक सुख, धैर्य और सच्चे साथी की खोज करने वालों के लिए एक जीवंत मार्गदर्शन है।
कई बार जीवन ऐसी राह पर लाकर खड़ा कर देता है, जहां एक के बाद एक शुभ काम टलते जाते हैं और रिश्तों में ठहराव हावी हो जाता है। अकेलापन इस हद तक बढ़ जाता है कि मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है। ऐसा अक्सर समय पर विवाह, वर्तमान रिश्तों में चल रही कलह के चलते भी होता है। विद्वान मानते हैं कि ऐसी परिस्थिति से शिव-पार्वती की दिव्य कृपा ही बाहर निकाल सकती है और सही मार्गदर्शन दे सकती है।
🌺 भगवान शिव स्थिरता, वैराग्य और परम चेतना के प्रतीक हैं, वहीं मां पार्वती की अटूट भक्ति, पवित्रता और परिवर्तनकारी शक्ति उनके पूर्ण पूरक हैं। उनका विवाह अचानक नहीं हुआ, बल्कि कठोर तपस्या, समर्पण और दिव्य समय का परिणाम था। मां पार्वती की तपस्या यह सिखाती है कि विवाह में देरी अस्वीकार नहीं, बल्कि आत्मिक तैयारी, कर्म शुद्धि और सही समय की प्रतीक्षा होती है।
इन दिव्य आशीर्वादों को पाने के लिए विशेष वैदिक अनुष्ठान किए जाते हैं:
शिव–पार्वती विवाह पूजन – शीघ्र और सुखद विवाह हेतु
देवी महात्म्य पाठ – मानसिक दृढ़ता और गृहस्थ सुख के लिए
अर्धनारीश्वर पूजा – समानता और परस्पर सम्मान पर आधारित दांपत्य जीवन के लिए
🌺 श्री मंदिर के माध्यम से इन पवित्र पूजाओं में सहभागी बनें और भगवान शिव-मां पार्वती की कृपा से अपने जीवन में दिव्य सामंजस्य और योग्य जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त करें।