हिंदू धर्म में श्रावण को ब्रह्माण्ड के संचालक महादेव की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव के इस प्रिय महीने में पूजा करने से ग्रह दोष दूर होते हैं। भगवान शनि भी भगवान शिव के प्रिय भक्तों में से हैं। शनिदेव को नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ, न्यायाधीश और दंडक होने का वरदान भगवान शिव से ही प्राप्त हुआ था, इसलिए जो लोग श्रावण के पावन माह में शनिदेव की पूजा करते हैं, उन्हें शुभ फल की प्राप्ति होती है। शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए श्रावण के शनिवार का दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। शनि उन शक्तिशाली ग्रहों में से एक हैं, जिनकी चाल और स्थितियां मनुष्य को सबसे अधिक प्रभावित कर सकती हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, जिन लोगों पर शनिदेव की कृपा होती है उन्हें जीवन में समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है।
वहीं जब कुंडली में शनि शुभ स्थिति में होते हैं तो व्यक्ति को हर कार्य में सफलता मिलती है। यदि शनि अशुभ स्थिति में हो तो बने बनाए काम भी बिगड़ने लगते हैं और जीवन में अनचाही बाधाएं भी आने लगती हैं। पुराणों में शनिदेव को प्रसन्न करने के वैसे तो कई उपाय बताए गए हैं लेकिन उनमें मंत्रों के जाप का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि देव के मूल मंत्र का जाप करने के साथ हवन करने से जीवन के सभी प्रकार के कष्ट कम हो जाते हैं। यह काम में रुकावट एवं बाधाओं से मुक्त करने में भी मददगार सिद्ध होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की महादशा 19 वर्ष तक चलती है इसलिए इस दशा में मूल मंत्र का 19,000 बार जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। यही कारण है कि श्रावण शनिवार के दौरान उज्जैन के श्री नवग्रह शनि मंदिर में 19,000 मूल मंत्र जाप एवं हवन का आयोजन किया जा रहा है, श्री मंदिर के माध्यम से इसमें भाग लें और जीवन में समस्याओं से मुक्ति और मानसिक स्पष्टता का आशीष पाएं।