🙏 हिंदू ग्रंथों और मंदिर परंपराओं के अनुसार, शनिवार भगवान श्री शनि देव को समर्पित है, जबकि कालाष्टमी भगवान भैरव को, जो भगवान शिव के भयंकर रक्षक रूप हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान भैरव शनि देव के गुरु हैं, जो न्याय और कर्म संतुलन में मार्गदर्शन करते हैं। इसी पवित्र संबंध के कारण, जब शनिवार पर कालाष्टमी हो, तब शनि देव के साथ भैरव जी की पूजा करने से शनि की चुनौतियों की तीव्रता कम होती है और मुश्किल समय में संतुलन आता है।
🙏 कई बार सच्ची कोशिश और अच्छे इरादों के बावजूद प्रगति धीमी हो जाती है, योजनाएं टल जाती हैं, और चिंताएं बार-बार लौट आती हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार, ऐसी स्थिति शनि देव के प्रभाव से जुड़ी होती है, जो अनुशासन और धैर्य सिखाते हैं। ऐसे समय में दिव्य मार्गदर्शन से ताकत और स्पष्टता मिलती है।
🙏 जब कालाष्टमी शनिवार को पड़ती है, तो यह दुर्लभ संयोग बहुत शक्तिशाली माना जाता है। भक्त मानते हैं कि ऐसे दिन भैरव जी की रक्षा ऊर्जा शनि देव के कर्म मार्गदर्शन से मिलकर लंबे समय की देरी, बार-बार बाधाओं, अचानक दुर्भाग्य या अनिश्चितता के डर से मुक्ति दिलाती है।
🙏 इस खास पूजा में शनि ग्रह शांति पूजन से संतुलन, धैर्य और लंबी मुश्किलों से राहत की प्रार्थना की जाती है। भैरव रक्षा कवच महायज्ञ से अदृश्य नकारात्मकता और डर से रक्षा की जाती है। उज्जैन के नवग्रह शनि मंदिर में होने वाली यह संयुक्त पूजा स्थिरता, साहस और धीरे-धीरे राहत लाती है, जिससे भक्त नई आस्था और आत्मविश्वास से आगे बढ़ते हैं।
🙏 श्री मंदिर के माध्यम से यह खास पूजा जीवन के चुनौतीपूर्ण चरणों में रक्षा, संतुलन और आशा की दिव्य कृपा ला सकती है।